निडर और नायाब | अनाहत सिंह, 18 वर्ष | स्क्वैश खिलाड़ी और जूनियर विश्व स्क्वैश चैंपियन नई दिल्ली

क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : अनाहत सिंह ने पिछले साल किशोरावस्था में ही विश्व स्क्वैश रैंकिंग में टॉप-20 में जगह बना ली. इसी साल जुलाई में उन्होंने विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीती. ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय बनीं और इस खिताब पर पिछले 11 वर्षों से चले आ रहे मिस्र के दबदबे को समाप्त कर दिया

अनाहत सिंह (फोटो- बंदीप सिंह)

शैल देसाई

अनाहत सिंह बेहद प्रतिभाशाली हैं. उन्हें खेल का माहौल घर में बचपने में ही मिल गया. उनके वकील पिता और इंटीरियर डिजाइनर मां, दोनों हॉकी खेलते थे. हालांकि, उन्होंने शुरुआत बैडमिंटन से की लेकिन जल्द ही बड़ी बहन के नक्शेकदम पर चलते हुए स्क्वैश में हाथ आजमाया और आठ की उम्र तक आते-आते घरेलू स्क्वैश सर्किट का एक नियमित चेहरा बन गईं.

14 वर्ष की उम्र में अनाहत 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय टीम की सबसे कम उम्र की सदस्य थीं. तब तक वे अंडर-11 ब्रिटिश जूनियर ओपन और अंडर-15 यूएस जूनियर ओपन जीत चुकी थीं. उन्होंने 2022 एशियाई खेलों में फिर राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और मिक्सड डबल्स तथा टीम स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक जीते.

पिछला साल बेहद कामयाबी भरा रहा—सीनियर सर्किट में अनाहत ने अमेरिका में स्क्वैश ऑन फायर ओपन जीत अपना पहला पीएसए वर्ल्ड टुअर ब्रॉन्ज खिताब हासिल किया. कुछ महीनों बाद अपनी पहली सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाइ किया.

समझदारी भरे स्वभाव और शीर्ष स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन की उनकी चाहत ने अनाहत के व्यवहार को और भी सौम्य बना दिया है. ग्रेगरी गॉल्टियर और सौरभ घोषाल के मार्गदर्शन में वे खुद को ज्यादा अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार कर चुकी हैं.

फिलहाल उनका अगला लक्ष्य: 2028 में होने वाला लॉस एंजेलिस ओलंपिक है, जिसमें स्क्वैश पहली बार शामिल होगा.

हालांकि, इस समय अनाहत सितंबर में होने वाले एशियाई खेलों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. यहां काफी कुछ दांव पर होगा क्योंकि स्वर्ण पदक विजेता को सीधे ओलंपिक के लिए क्वालिफाइ करने का मौका मिलेगा.

वे कहती हैं, “अगर मैं स्वर्ण पदक जीतती हूं, तो क्वालीफाइ करने की कोशिशों में जुटे रहने के बजाय अगले दो साल ओलंपिक की तैयारी में बिता सकती हूं.” इन दिनों अनाहत जिस आत्मविश्वास से आगे बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए यह लक्ष्य उनकी पहुंच में नजर आता है.

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