रुढ़ियों पर निशाना! | शीतल देवी, 19 वर्ष | विश्व की पहली और इकतौली बिना हाथ वाली महिला वर्ल्ड पैरा-आर्चरी चैंपियन लोइधर, जम्मू-कश्मीर
क्या है जो बनाता है उन्हें सिरमौर : जन्म से ही उन्हें फोकोमेलिया नाम की समस्या थी—यह एक स्थिति, जिसके कारण उनके हाथ नहीं थे. शीतल एक के बाद एक बाधाएं तोड़ते हुए आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने खुद को खेल के क्षेत्र में भारत की सबसे प्रेरणादायी शख्सियतों में शामिल कर लिया है

शीतल देवी (फोटो- एफपी)
शीतल को हमेशा से एहसास था कि वे दूसरों से अलग हैं क्योंकि उनके हाथ नहीं थे. लेकिन वे अपने पैरों और उनकी उंगलियों से खातीं-पीतीं, लिखतीं, यहां तक कि पेड़ पर भी चढ़ जातीं. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दूरदराज के, शांत-सी जिंदगी वाले लोइधर गांव में इतना काफी था. पिता मान सिंह और मां शक्ति देवी किसान हैं.
शीतल ने तीरअंदाजी का नाम तक नहीं सुना था. भारतीय सेना की मदद से 2020 में इलाज के लिए वे बेंगलूरू गई थीं. वहीं उनके कुछ असेसमेंट कराए गए. वे याद करती हैं, “उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा धड़ और निचला हिस्सा मजबूत है. मुझको तीन खेल सुझाए गए, जिनमें से एक तीरअंदाजी था.” वह दिन नए सफर की शुरुआत बन गया. उनकी ट्रेनिंग जम्मू के कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई.
2023 की अर्जुन अवॉर्डी शीतल अपने कंधे से जुड़े रिलीज डिवाइस का इस्तेमाल करती हैं. वे पैर की उंगलियों से तीर उठाती और नॉक करती हैं, शरीर और पैरों से धनुष खींचती हैं, निशाना लगाती हैं और सटीक तीर छोड़ती हैं.
शीतल वर्ल्ड नंबर वन बनीं, जब उन्होंने हांगझोऊ में 2022-23 एशियाई पैरा गेम्स में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता.
पेरिस 2024 पैरालंपिक्स में उन्होंने मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य जीता और 17 वर्ष की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बनीं.
2025 में उन्होंने ग्वांगजू में वर्ल्ड आर्चरी पैरा चैंपियनशिप में तुर्किये की वर्ल्ड नंबर वन ओजनूर क्युरे गिर्दी को हराकर व्यक्तिगत स्वर्ण जीता—और विश्व खिताब जीतने वाली पहली बिना हाथों वाली महिला बनीं.
एक बड़े कदम के रूप में वे सक्षम शरीर वालों की जूनियर राष्ट्रीय टीम के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय पैरा-आर्चर भी बनीं. अगली चुनौती जापान के आइची-नागोया में 2026 एशियन पैरा गेम्स हैं, जहां वे अपने खिताबों की रक्षा करेंगी.