केतन, चेतन और वो
दो कारोबारी परिवार, एक शादी की तैयारी और बीच में आया एक प्रेमी. नतीजा, पुणे के एक पहाड़ी किले में घिनौने अपराध को अंजाम देने की दर्दनाक घटना

आरोपी सिया गोयल 3 जुलाई को अदालत में पेश होने से पहले
- ओमकार वाबले
पुणे के लोगों के लिए शहर के बाहरी इलाके में स्थित लोहागढ़ किला हमेशा से फुरसत के पल बिताने की पसंदीदा जगह रहा है. लेकिन अब यह जगह एक भयावह घटना के कारण सुर्खियों में बनी हुई है. किले में आने वाले लोगों की संख्या अचानक बढ़ गई है और हर कोई कुख्यात हो चुके 'सिया पॉइंट' से उस खाई की एक झलक देखना चाहता है जहां से केतन को धक्का दिया गया.
18 जून की सुबह सिया गोयल और केतन अग्रवाल किले की पहाड़ी पर चढ़ रहे थे. दोनों की सगाई हो चुकी थी और छह महीने बाद शादी होने वाली थी. लेकिन सिया के इरादे कुछ और ही थे और उसने कथित तौर पर चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को 400 फुट गहरी खाई में धकेल दिया. चेतन के वहां से भाग निकलने के बाद सिया ने शोर मचाया, दावा किया कि केतन का पैर फिसल गया और वह नीचे गिर गया.
बाद में बचाव दल ने केतन का शव बरामद किया और दुर्घटना में मौत का मामला दर्ज किया गया. यहां तक, केतन के माता-पिता यानी अग्रवाल परिवार ने लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के अधिकारियों से कहा कि उन्हें किसी गड़बड़ी का शक नहीं है, क्योंकि गोयल परिवार के साथ उनकी पुरानी जान-पहचान है. लेकिन इस घटना ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए, जिसने जांच को आगे बढ़ाया.
पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल कहते हैं, ''मामले में कई संदेह उपजे क्योंकि लोहागढ़ में पहले कभी ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ था...यह जगह काफी सुरक्षित मानी जाती है.''
21 जून को किले के सीसीटीवी फुटेज में इस जोड़े की गतिविधियां खंगाल रहे एक पुलिस अधिकारी ने देखा—33 डिग्री की गर्मी के बावजूद एक व्यक्ति हुडी वाली स्वेटशर्ट पहने टिकट काउंटर के करीब सिया और केतन के आसपास मंडरा रहा था. गिल का दावा है, ''उसने अपना हेडफोन हुडी के ऊपर लगा रखा था. यह साफ तौर पर खुद को कैमरे से बचाने का प्रयास लग रहा था.''
इसके अलावा, घटना कैसे हुई, इस पर सिया के बयान भी विरोधाभासी थे. पहले उसने कहा कि तेज हवाओं के बीच किले के किनारे पर तस्वीरें लेने के दौरान केतन का पैर फिसल गया (लेकिन पुलिस को केतन के फोन पर यहां की कोई भी तस्वीर नहीं मिली). बाद में, उसने दावा किया कि वे लोग चढ़ाई के बाद आराम करने के लिए रुके थे और सिया को पानी की बोतल पकड़ाते समय संतुलन बिगड़ने से केतन नीचे खाई में गिर गया. बहरहाल, पुलिस के गोपनीय जांच शुरू करने के लिए इतना काफी था. तब तक केतन का परिवार भी दाल में कुछ काला होने का संदेह जताने लगा था. 23 जून को पुणे पुलिस ने सिया और चेतन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
कैसे तय हुआ था रिश्ता
इसी साल फरवरी की बात है जब परिचितों और रिश्तेदारों ने शहर के बिल्डर विशाल अग्रवाल के बेटे केतन और पुणे मार्केट यार्ड में ड्राइ फ्रूट्स और मसालों के थोक व्यापारी प्रवीण गोयल की बेटी सिया की शादी कराने का प्रस्ताव रखा. गोयल और अग्रवाल परिवार 1980 के दशक से एक-दूसरे को जानते थे, जब अग्रवाल परिवार मुंबई से करीब 450 किमी दूर धाराशिव (उस्मानाबाद) के तुलजापुर तीर्थस्थल में किराने और ड्राइ फ्रूट्स का थोक व्यापार करता था. केतन के परदादा किशनलाल जब भी सामान खरीदने पुणे आते, तो गोयल परिवार के साथ ही रुकते थे.
अमेरिका से मास्टर डिग्री लेने वाला केतन अपनी पारिवारिक रियल एस्टेट फर्म सक्सेस ग्रुप का मुख्य मार्केटिंग अधिकारी था. पिता विशाल के दो भाइयों सहित पूरा संयुक्त परिवार मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के पास गहुंजे में 45 एकड़ की एक आलीशान गेटेड सोसाइटी में रहता था.
सिया के रिश्तेदारों के मुताबिक, शादी की बातचीत तब कुछ समय के लिए रुक गई थी जब पता चला कि लड़के के सिर पर बाल कम हैं और वह हेयर पैच लगाता है. साथ ही, थोड़ा हकलाता भी है. पुणे के एक संभ्रांत स्कूल में पढ़ी सिया 12वीं में फेल होने के बाद शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से पढ़ाई छोड़ चुकी थी. बेकिंग की शौकीन सिया घर से पेस्ट्री का बिजनेस चला रही थी. इंटरनेट पर केतन की प्रोफाइल देखने और उससे मिलने के बाद फिर से सब कुछ ठीकठाक हो गया और दोनों परिवार 19 फरवरी को पुणे के एक फाइव-स्टार होटल में शानदार सगाई पार्टी के लिए जुटा था. शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर के एक रिजॉर्ट में होनी तय हुई.
चेतन की एंट्री
बताया जा रहा है कि चेतन से सिया की मुलाकात 2025 में एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान हुई थी. बीबीए छात्र चेतन भी सिया के बड़े भाई साहिल की तरह क्रिकेटर था और दोनों एक-दूसरे से परिचित थे. राजस्थान का रहने वाला चेतन का परिवार भी उसी मार्केट यार्ड में किराने की सेमी-होलसेल दुकान चलाता है जहां सिया के पिता की दुकान है. गोयल परिवार के एक रिश्तेदार का दावा है कि साहिल ने एक समय दोनों के रिश्ते को लेकर सवाल किया था लेकिन दोनों ने इससे इनकार कर दिया था.
पुलिस अब दोनों के बीच रिश्ते को पुख्ता करने के लिए कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है. सिया ने कथित तौर पर केतन के चाचा से पूछा था कि क्या शादी एक साल के लिए टाली जा सकती है. पुलिस का यह भी कहना है कि सिया और चेतन के बीच जनवरी से जून के बीच 2,004 बार फोन पर बातचीत हुई है. 6 जून को केतन और उसकी बहन संजना, सिया और उसका भाई साहिल प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली जाने वाले थे. लेकिन, मुंबई एयरपोर्ट पर जाकर पता लगा कि केतन के बैग में उसका पासपोर्ट ही नहीं है (अब सिया पर ही उसे गायब करने का संदेह है). इससे कुछ तनाव पैदा हो गया था और पुलिस को दिए बयान में केतन के पिता विशाल ने कहा कि घर लौटने के बाद बेटे ने उन्हें बताया था कि सिया और उसके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर बहस हो जाती है.
लोहागढ़ का प्लान
बताया जा रहा है कि सिया और केतन 31 मई को एक साथ लोहागढ़ घूमने पहुंचे थे और वहीं पर पहली बार उसके दिमाग में हत्या का विचार आया. वह कथित तौर पर चाहती थी कि दोनों 4 जून को फिर किले पर जाएं लेकिन केतन की मां ने मना कर दिया. हालांकि, वे 14 जून को फिर किले पर गए थे. पुलिस के मुताबिक, यहां सिया ने केतन को चट्टान के पास से धक्का देकर उसकी जान लेने की कोशिश की. लेकिन केतन ने उस समय एक पेड़ को पकड़कर खुद को बचा लिया. सिया ने तब दावा किया था कि उसने सांप से बचाने के लिए केतन को धक्का दिया था. एक पुलिस जांचकर्ता के मुताबिक, उन्होंने केतन की मां और बहन से पूछा था कि केतन 14 और 18 जून को फिर किले में क्यों गया. इस अधिकारी के मुताबिक ''केतन ने उन्हें बताया था कि 4 जून को मना करने के बाद सिया रोई थी. उसने अपने परिवार को बताया था कि चूंकि सिया 19 जून को महाबलेश्वर में दोस्तों के साथ अपना 20वां जन्मदिन मनाने जा रही थी, इसलिए उसके दोस्त एक दिन पहले लोहागढ़ में उसे सरप्राइज देने वाले थे.''
उधर, पुलिस का कहना है कि सिया और चेतन 17 जून को लुल्लानगर स्थित एक कॉफी शॉप में मिले थे. यहां उन्होंने कथित तौर पर किले के वीडियो खोजे, गूगल अर्थ से लोहागढ़ के नक्शे डाउनलोड किए, और हत्या की साजिश रचने और एक सुनसान जगह चुनने के लिए एआइ का इस्तेमाल किया. दोनों ने कथित तौर पर कैफे के पास एक जगह यह अभ्यास भी किया कि केतन को चट्टान से कैसे धक्का देना है. पुलिस का कहना है कि उसने तीन मोबाइल फोन (इनमें दो सिया के) बरामद किए हैं. पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों ने पुणे के बालेवाड़ी में एक निजी कंपनी में काम करने वाले चेतन के सहपाठी को भी इस घटना में शामिल करने की कोशिश की थी लेकिन उसने मना कर दिया.
18 जून को सिया और केतन किले पर चढ़े और चेतन कथित तौर पर उनके ठीक पीछे चल रहा था. पुलिस का कहना है कि सिया जमीन पर बैठ गई, जो चेतन के लिए अंदर आने और केतन को धक्का देने का संकेत था. फिर, उन दोनों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देकर मार डाला. पुलिस ने चेतन का मोबाइल नंबर ट्रैक किया, लेकिन पाया कि 18 जून को सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक उसका मोबाइल डेटा बंद था. फोन का इस्तेमाल केवल कॉल रिसीव करने के लिए किया जा रहा था. एक पुलिस अफसर ने कहा, ''हमने फोन करने वालों से पूछा कि कॉल का जवाब किसने दिया था. इस पर पता चला कि वह उसकी दुकान का कर्मचारी था.''
घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने अपनी कड़ियां कुछ इस तरह जोड़ी हैं: चेतन अपने दोपहिया वाहन से किले तक पहुंचा, केतन उसको पहचान न ले इसलिए हुडी पहनकर चोटी पर चढ़ा, पीड़ित को चट्टान से नीचे धक्का देते या धक्का देने में मदद करने के बाद नीचे उतरा और चुपचाप वहां से चला गया. इस हिसाब से उसने किले के ऊपर पहुंचने और नीचे आने में मात्र 48 मिनट का समय लगाया. हालांकि, चेतन के वकील राम शहाणे इससे सहमत नहीं हैं. शहाणे कहते हैं, ''मेरे मुवक्विल को झूठा फंसाया गया है. हुडी और मोबाइल फोन की कहानी पुलिस ने गढ़ी है, और इसे पुष्ट करने वाला कोई पुख्ता सबूत नहीं है.''
परिवार उठा रहा सवाल
उधर, केतन के पिता विशाल ने भी बाद में पुलिस को दिए अपने बयान में कई आरोप लगाए. इसमें उन्होंने यह भी बताया कि बाली यात्रा रद्द होने के बाद केतन को ऐसा लगने लगा था कि सिया का किसी और के साथ चक्कर चल रहा है, और इसका एक कारण उसका हर बात में अपने 'दोस्त चेतन' का नाम लेना भी था. सिया अंतिम संस्कार के बाद केतन के घर भी गई थी, जहां उसकी बहन संजना ने कथित तौर पर उससे पूरी घटना के बारे में बताने को कहा था. विशाल ने अपने बयान में कहा कि उसके गोलमोल जवाबों और केतन की मौत से दुखी न दिखने पर परिवार को संदेह होने लगा था.
दूसरी तरफ, सिया के पिता प्रवीण गोयल का कहना है कि उन्हें चेतन के साथ अपनी बेटी के रिश्ते की कोई भनक तक नहीं लगी थी. वे कहते हैं, ''अगर मुझे पता होता तो कुछ करता भी...लेकिन यह बात मेरी जानकारी में बिल्कुल नहीं आई. अगर मेरी बेटी दोषी है, तो उसे फांसी दे दो... लेकिन कम से कम अपना बचाव करने का मौका तो दो. वह दोषी है या नहीं, यह अदालत को तय करना है.'' सिया की तरफ से पेश बचाव पक्ष के वकील विपुल दुशिंग कहते हैं, ''कोई मकसद नहीं दिखता, मामला केवल अनुमानों पर आधारित है...जो मुख्यत: पीड़ित के माता-पिता के संदेह पर केंद्रित हैं.'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केतन की हत्या का कोई गवाह नहीं था, और इस मामले में केवल संदेह पुख्ता सबूतों का विकल्प नहीं हो सकता.
इस मामले की मीडिया कवरेज ने पुलिस और प्रशासन पर भी दबाव बना दिया है. केतन के पिता विशाल ने 26 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर त्वरित सुनवाई की मांग की. राज्य ने इस मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेज दिया है और जाने-माने वकील व भाजपा राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है. अधिकारी मुकदमे को मजबूत करने के लिए पुख्ता सबूत तलाश रहे हैं. जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी कहते हैं, ''हत्या के समय किले में 208 लोग मौजूद थे. हमें उम्मीद है कि किसी ना किसी के कैमरे में कोई फोटोग्राफिक सबूत कैद हुआ होगा.''
अनसुलझे सवाल
> ठोस उद्देश्य का अभाव: सिया साफ मना कर सकती थी, केतन से शादी करने से इनकार कर सकती थी, यहां तक कि चेतन के साथ भाग भी सकती थी. उसके भाई साहिल ने दोनों से उनके रिश्ते के बारे में पूछा भी था. पारिवारिक बयानों से पता चलता है कि सिया ने अपनी इच्छा से केतन का प्रस्ताव स्वीकार किया था. तो फिर उसने उसकी हत्या क्यों की?
> मास्टरमाइंड कौन? पुलिस सूत्रों का कहना है कि सिया और चेतन ने पूछताछ के दौरान अब तक कुछ खास नहीं उगला है. जांचकर्ता यह पता लगाने के लिए क्राइम सीन रीक्रिएशन पर भरोसा कर रहे हैं कि योजना किसने शुरू की और किसने केतन को मौत के घाट उतारा.
> पुख्ता सबूतों की कमी: यह साबित करने वाला कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि केतन को धक्का दिया गया था. अब तक कोई भी गवाह के रूप में सामने नहीं आया है, और न ही कोई आपत्तिजनक सबूत मिला है.
> डिजिटल फुटप्रिंट: साइबर फॉरेंसिक विभाग का कहना है कि सिया और चेतन के फोन से महीनों के व्हाट्सएप चैट और वॉयस नोट्स डिलीट पाए गए. क्या चैट की रिकवरी से निर्णायक सबूत मिलेंगे?
> संदेह के संकेत: अग्रवाल परिवार ने सिया के बार-बार चेतन का नाम लेने, हर समय उसका फोन व्यस्त रहने और सबसे बड़ी बात 4 जून को केतन को चट्टान से धक्का देने के कथित प्रयास जैसे संदेहास्पद संकेतों को नजरअंदाज क्यों किया?