निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की कवायद

इंडिया टुडे स्मार्ट मनी फाइनेंशियल समिट में नीति निर्धारकों और बाजार के दिग्गजों ने निवेश के तरीकों का विश्लेषण किया जिससे कि निवेशकों को आज की अनिश्चित दुनिया में मदद मिले और वे सही मौके पहचान सकें

इंडिया टुडे स्मार्ट मनी फाइनेंशियल समिट में एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान

भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक के तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) से बेहतर शायद ही कोई जगह हो. यह मौका था मुंबई में 18 जून को इंडिया टुडे स्मार्ट मनी फाइनेंशियल समिट के दूसरे संस्करण का. यह समिट ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच 'संघर्ष विराम' हो रहा था और एनएसई अपने आइपीओ की तैयारी कर रहा था जो देश का दूसरा सबसे बड़ा आइपीओ हो सकता है. 

लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव में नए इजाफे ने यह जरूरत बढ़ा दी कि निवेशकों को अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए. एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए टेक्नोलॉजी की ताकत पर जोर दिया और कहा कि कैसे 'मिथॉस' जैसे डर के खिलाफ संगठनों को भविष्य के लिए ज्यादा तैयार रहने की जरूरत है.

हीरानंदानी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने रियल एस्टेट सेक्टर की आशावादी तस्वीर पेश की, क्योंकि इसने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) के जरिए निवेशकों के लिए नई मंजिलें खोली हैं. 

म्यूचुअल फंड (एमएफ) निवेश के एक पसंदीदा विकल्प के तौर पर उभरे हैं. कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा कि हालांकि अभी तक सभी आर्थिक संकेतक बाजार के लिए अच्छे रहे हैं, लेकिन कमजोर मॉनसून इसमें खलल डाल सकता है. इसके बाद म्यूचुअल फंड उद्योग के शीर्ष अधिकारियों—आइसीआइसीआइ प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के सीईओ निमेश शाह; यूटीआइ एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और सीईओ वेत्री सुब्रह्मण्यम; जियो ब्लैकरॉक म्यूचुअल फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर ऋषि कोहली; और एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सीईओ कैलाश कुलकर्णी—के एक पैनल ने इस सेक्टर की संभावनाओं पर चर्चा की.

वे इस बात पर सहमत दिखे कि भारत के लिए आर्थिक फंडामेंटल इससे बेहतर नहीं हो सकते थे. लेकिन युद्ध और कॉर्पोरेट की सुस्त आय चिंता का मसला रहीं. एडलवाइस म्यूचुअल फंड की प्रबंध निदेशक और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि उन्हें भारत में निवेश करने पर पूरा भरोसा है. 

क्रिसिल के डी.के. जोशी, आदित्य बिड़ला ग्रुप की इला पटनायक और बैंक ऑफ बड़ौदा के मदन सबनवीस जैसे अर्थशास्त्रियों ने पूंजी निवेश को बढ़ावा देने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के हाल के उपायों पर चर्चा की. सबनवीस ने आगाह किया: बाजार जरूरत से ज्यादा महंगे हैं, और निवेश योग्य संसाधनों की कुल मात्रा में भारी कमी आई है. इसलिए, बाजार दबाव में रह सकते हैं. पटनायक आरबीआइ के इस कदम पर और चर्चा चाहती थीं, क्योंकि यह उस नीति में बदलाव का संकेत था जो हमेशा ऋण के बजाए इक्विटी को प्राथमिकता देती थी. जोशी आशान्वित थे कि युद्ध खत्म हो गया है और महंगाई नियंत्रण में है.

आज की कोई भी चर्चा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के असर का विश्लेषण किए बिना पूरी नहीं हो सकती. फ्रैक्टल के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव और नैसकॉम के चेयरपर्सन श्रीकांत वेलमकन्नी ने जोर देकर कहा कि कमजोरियों का पता लगाने के लिए एआइ के नवीनतम मॉडल का इस्तेमाल करने और हमारे सबसे अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर की लगातार टेस्टिंग की जरूरत है. उन्होंने कहा, ''सिक्योरिटी को सिस्टम के डिजाइन में ही शामिल किया जाना चाहिए, इसे बाद में नहीं जोड़ा जाना चाहिए.''

इन चर्चाओं का एक जैसा संदेश था: ज्यादा चुनौती वाले वित्तीय माहौल में आगे बढ़ने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने और भारत की लाँग-टर्म ग्रोथ स्टोरी को बरकरार रखने के लिए नए तरीकों की जरूरत होगी. आगे के पन्नों में वक्ताओं के विचारों और जानकारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है. 
—एम.जी. अरुण

ट्रेडिंग और टेक्नोलॉजी: इनोवेशन किस तरह भारतीय बाजारों को आगे बढ़ा रहा है 

आशीषकुमार चौहान, एमडी और सीईओ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने कहा, ''हम एआइ का उपयोग निगरानी, पैटर्न समझने और प्रोग्रामिंग के लिए करते हैं, लेकिन ट्रेडिंग के लिए नहीं क्योंकि इसके लिए निश्चित नतीजों की जरूरत होती है. हमारे पास 26 करोड़ खाते हैं और हम भारत के 25 'परिवारों को सेवा देते हैं''  

उन्होंने आगे कहा, ''मिथॉस एंथ्रोपिक का बनाया एक मार्केटिंग मिथ है. बड़े संगठनों ने सुरक्षा की परतें बनाई हैं इसलिए मिथॉस ऑपरेटिंग सिस्टम में कमजोरियों का पता लगाने में सक्षम नहीं है.''  

उथल-पुथल भरे दौर में समझदारी से निवेश 

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी नीलेश शाह ने कहा, ''संभवत: बाजारों में निवेश की कमी और शॉर्टिंग थी, जिससे युद्ध के दौरान गिरावट आई. मॉनसून और डीप टेक्नोलॉजी को लेकर आगे चिंताएं रहेंगी. रिटर्न औसत रहेगा, उतार-चढ़ाव अधिक होगा और इसे मैनेज करना होगा''   

नीलेश शाह, एमडी, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी

भारत का समय: दमदार एसेट क्लास के तौर पर रियल एस्टेट का उभरना

जीडीपी वृद्धि के मुकाबले रियल एस्टेट की बढ़ोतरी तेज रफ्तार से होगी... लेकिन, सस्ते घरों की बिक्री में 20 ''की गिरावट चिंता की बात है'' 

''पहले, रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए आपको घर खरीदना पड़ता था. अब, आप आइपीओ*, रीट्स** ले सकते हैं और फ्रैक्शनलाइजेशन भी बहुत दूर नहीं है''  
निरंजन हीरानंदानी, फाउंडर और चेयरमैन, हीरानंदानी ग्रुप

निरंजन हीरानंदानी, फाउंडर और चेयरमैन, हीरानंदानी ग्रुप

अनिश्चितता के बीच निवेश: उतार-चढ़ाव भरे बाजार में कमाई

राधिका गुप्ता, एमडी और सीईओ, एडलवाइस म्यूचुअल फंड के मुताबिक, ''अपने पोर्टफोलियो का 10-15 'हिस्सा विदेश में निवेश करना मजबूत रणनीति है, क्योंकि आर्थिक चक्र के अलग-अलग चरणों में विभिन्न बाजार बेहतर प्रदर्शन करते हैं''  

''अगर मुझे अगले दस सालों के लिए पोर्टफोलियो बनाना हो, तो मैं एक मल्टी-कैप पोर्टफोलियो बनाऊंगी जिसमें लार्ज-कैप और मिड-कैप दोनों तरह की कंपनियों की अच्छी-खासी हिस्सेदारी हो''  

राधिका गुप्ता, एमडी और सीईओ, एडलवाइस म्यूचुअल फंड

खाई पाटने की जरूरत: बीमा की पहुंच बढ़ाने की रणनीतियां

रत्नाकर पटनायक लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. उन्होंने कहा, ''हमने राष्ट्र निर्माण के 70 सार्थक वर्ष पूरे किए. हम करीब 58 लाख करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं. देश में 98 करोड़ लोगों तक बीमा पहुंचाया जा सकता है लेकिन हमारी कुल पॉलिसियों की संख्या सिर्फ 30 करोड़ है''  

''करीब 10 करोड़ लोग बीमा लेने के लिए तैयार हैं. अगर हम प्रक्रिया को आसान और तेज बना सकें तो वे हमारे पास आएंगे''  

''डेंसिटी यानी प्रति व्यक्ति दिया जाने वाला प्रीमियम 90 डॉलर (8,500 रुपए) है, जो कम है. मैं प्रोटेक्शन गैप को लेकर चिंतित हूं... बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए इनोवेटिव प्रोडक्ट लाने की जरूरत है''  

रत्नाकर पटनायक, मैनेजिंग डायरेक्टर, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

वेत्री सुब्रह्मण्यम, एमडी और सीईओ, यूटीआइ एसेट मैनेजमेंट के मुताबिक, ''किसी भी सरकार के लिए पूंजी आकर्षित करने के लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा पूंजी बाजार अमेरिका हर जगह से पूंजी खींच रहा है. हालांकि यह स्थिति अपने आप ठीक हो जाएगी''   ''बाजार में गिरावट की मात्रा से ज्यादा उसकी अवधि सब लोगों को परेशान कर रही है. इसके अलावा कमजोर आय वृद्धि से भी फर्क पड़ा.''  

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