इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: सेवा सीखने वालों का श्रेष्ठ ठिकाना

अपनी स्थापना के 90वें वर्ष में टीआइएसएस फील्डवर्क, विशेषज्ञों के साथ कांफ्रेंस और विचारशील कक्षाओं के माध्यम से देशभर से आने वाले छात्रों में समाज की गंभीर समझ विकसित कर रहा

डीन बिपिन जोजो, टीआइएसएस स्कूल ऑफ सोशल वर्क इंटरैक्टिव क्लासरूम में छात्रों के साथ

सोशल वर्क: नं. 1 सोशल वर्क टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई

सोशल वर्क में बैचलर्स डिग्री की तृतीय वर्ष की छात्रा रिया अविनाश म्हात्रे मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआइएसएस) परिसर के पास ही रहती हैं फिर भी यह कैंपस उनके लिए 'दूसरे घर' जैसा है—एक ऐसा घर जिसे वे इसके पुराने स्कूल वाले शांत माहौल की वजह से ज्यादा पसंद करती हैं. हर सोमवार और मंगलवार को वे अपने कोर्स के फील्डवर्क के सिलसिले में एक बाल गृह जाती हैं. रिया कहती हैं, ''फील्डवर्क ने मुझे जमीनी हकीकत से रू-ब-रू कराया. इससे मेरी सोच बदल पाई और मैंने दूसरों के नजरिए का सम्मान करना सीखा.''

अपने मास्टर्स और पीएचडी के लिए मशहूर टीआइएसएस को रिया जैसे ग्रेजुएशन के छात्रों के आने से नई ऊर्जा मिली है. यह ऊर्जा कॉलेज के प्रोफेसरों में भी साफ दिखाई देती है. टीआइएसएस स्कूल ऑफ सोशल वर्क के डीन, बिपिन जोजो कहते हैं, ''यह हमें पढ़ाने के तरीकों और छात्रों से जुड़ने के बारे में कुछ नया और अलग सोचने का मौका देता है.''

बदलाव की वजहों से पढ़ाई-लिखाई के तरीकों में कई नए प्रयोग हुए हैं, जिनमें पेरेंट-टीचर मीटिंग और पढ़ाने के लिए पॉडकास्ट और कहानी लेखन का उपयोग शामिल है. यहां के प्रोफेसर छात्रों को समझदारी से एआइ का इस्तेमाल करना सिखाते हैं. जोजो कहते हैं, ''कुछ क्षेत्रों में एआइ के कई फायदे हैं, जैसे आने वाले प्रोजेक्ट्स का अनुमान लगाना, डेटा विजुअलाइजेशन, मानव संसाधन में क्षमता विकास, डॉक्युमेंटेशन और संसाधनों का मोबलाइजेशन आदि.'' यूनिसेफ में डिसएबिलिटी ऐंड डेवलपमेंट के ग्लोबल लीड और टीआइएसएस के पूर्व छात्र गोपाल मित्रा कहते हैं, ''इसको जो बात सबसे अलग और खास बनाती है, वह है इसकी गंभीर किताबी पढ़ाई और सघन फील्डवर्क. इन्हें एक साथ जोड़ना यह तय करता है कि किताबी थ्योरी को समाज की हकीकत की कसौटी पर कैसे परखा जाए. टीआइएसएस ने मुझे विचारों का सम्मान करना और अपने खुद के पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाना सिखाया. मैं आज भी यही मूल्य और कौशल उपयोग में लाता हूं.''

दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क में विद्यार्थी

इस वर्ष यह संस्थान 90 साल पूरे कर रहा है. आने वाले समय में कई सेमिनार, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ कॉन्फ्रेंस, रिसर्च पब्लिकेशन और महिलाओं तथा किसानों के मुद्दों पर खास ध्यान देने की योजना है.

पढ़ाई की विविधता नई दिल्ली की  जागृति यादव जैसे स्टूडेंट्स को टीआइएसएस की तरफ खींचती है. जागृति के मुताबिक, ''हम फील्डवर्क से सीखी बातों और अनुभवों को डायरी में लिखते हैं. इसने मुझे चीजों को ज्यादा बारीकी से देखना सिखाया है और सामाजिक समस्याओं के पीछे के असल कारण को समझने में मदद की है.'' यादव कहती हैं कि टीआइएसएस में सीनियर स्कॉलर्स से सीखने का मौका मिलता है. फील्डवर्क और क्लासरूम की पढ़ाई से सामाजिक हकीकत की गहरी समझ विकसित होती है और क्षेत्र में काम करने का कौशल मिलता है. 

इंडिया टुडे के बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026:

देशभर के 1,800 से अधिक संस्थानों की 14 प्रमुख स्ट्रीम्स में रैंकिंग, साथ में कोर्स, प्लेसमेंट और कैंपस लाइफ का विस्तृत विश्लेषण पढ़िए इंडिया टुडे के इस विशेषांक में. भारत के बेस्ट सोशल वर्क कॉलेज कौन-से हैं? पूरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें- https://bestcolleges.indiatoday.in/full-rankings

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