इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: सेवा की चेतना जगाने वाला कैंपस
क्रिस्टू जयंती के सोशल वर्क प्रोग्राम के छात्रों के लिए ग्रामीण भारत में एनजीओ और समुदाय आधारित संगठनों के साथ काम करना और वर्क लैब्स में असली तजुर्बे वाली ट्रेनिंग लेना बहुत फायदेमंद साबित हो रहा

बेंगलूरू में क्रिस्टू जयंती यूनिवर्सिटी का कैंपस
सोशल वर्क: नं. 1 सर्वाधिक सुधार वाला कॉलेज* क्रिस्टू जयंती (डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटी) बेंगलूरू
इसकी स्थापना 1999 में बेंगलूरू में उस समय हुई थी जब शहर सॉफ्टवेयर क्रांति के लिए अंगड़ाई ले रहा था. तब से क्रिस्टू जयंती (डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटी) ने नई सदी की तेज गति जैसी तरक्की की रफ्तार हासिल की है—यह 2013 में ऑटोनॉमस बनी और 2025 में यूनिवर्सिटी बन गई. 1999 में सिर्फ नौ छात्रों के साथ शुरू हुई संस्था में दाखिला ले चुके छात्रों की संख्या इस साल 18,000 हो जाएगी.
वाइस चांसलर फादर डॉ. ऑगस्टीन जॉर्ज कहते हैं, ''यहां कुछ भी अचानक नहीं होता. योजना के तहत होता है. संस्थान के तौर पर हम महत्वाकांक्षी हैं. यह हमारे एनएएसी (नैक) और एनआइआरएफ स्कोर में दिखता है.'' वे इस रफ्तार का श्रेय टीम और मजबूत एकेडमिक ढांचे को देते हैं. वे कहते हैं, इसका मुख्य कारण वैल्यू सिस्टम और सीखने की संस्कृति है जिसे संस्थान ने विकसित किया है.
2003 में शुरू हुए इस सोशल वर्क प्रोग्राम का मुख्य फोकस प्रैक्टिकल फील्डवर्क और ट्रेनिंग को बढ़ावा देना है. रजिस्ट्रार डॉ. एलॉयसियस एडवर्ड जे. कहते हैं, ''इसके करिकुलम में एनजीओ, हॉस्पिटल और समुदाय आधारित संगठनों के साथ फील्डवर्क करना और उनसे जुड़े बढ़िया प्लेसमेंट शामिल हैं. इस तरह यह थ्योरेटिकल कॉन्सेप्ट्स को प्रैक्टिकल अनुभव से जोड़ता है.'' जो एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) डिग्री कराई जाती है, उसमें स्किल डेवलपमेंट, प्रोजेक्ट के आधार पर और अनुभव के साथ सीखने पर जोर दिया जाता है और यह सीखना ग्रामीण शिविरों और सोशल वर्क लैब के जरिए होता है.
एडवर्ड कहते हैं, ''सोशल वर्क प्रोग्राम का मुख्य आधार रिसर्च तथा प्रोजेक्ट के प्रस्ताव बनाना और उनका प्रेजेंटेशन करना है.'' वे कहते हैं, ''सोशल वर्क के मुख्य पहलुओं में सहानुभूति, ईमानदारी, दखल और सेवा शामिल हैं. छात्रों के लिए ऐक्टिव रहना जरूरी है, इसलिए हमारे पास देशभर में 250 से ज्यादा फील्डवर्क पार्टनर हैं.'' वे बताते हैं कि पढ़ाई के साथ फील्डवर्क करने से अक्सर प्लेसमेंट भी मिल जाता है. हाल के वर्षों में क्रिस्टू जयंती के इस कोर्स ने तेजी से तरक्की की है: 2022 में 14वें नंबर से बढ़कर इस साल यह आठवें नंबर पर आ गया है, जिससे यह इस कैटेगरी में सबसे ज्यादा सुधार करने वाला कॉलेज बन गया है.
उत्तर-पूर्वी बेंगलूरू के कोतानुर में बनी क्रिस्टू जयंती यूनिवर्सिटी का 10 एकड़ का कैंपस बेहद साफ और हरा-भरा है, जहां एकेडमिक ब्लॉकों के रास्तों में कतारों में पेड़ लगे हैं. छात्र कैंपस में स्वच्छता और प्लास्टिक-मुक्त अभियानों में हिस्सा लेते हैं. वीसी कहते हैं कि यह गर्व और स्वामित्व का एहसास पैदा करने का हिस्सा है.
उनका कहना है कि इसी तरह, पढ़ाई और करिकुलम लागू करने के मामले में भी संस्थान ने यह पक्का किया कि फैकल्टी शिक्षक लक्ष्यों को अच्छी तरह समझें. फादर जॉर्ज कहते हैं, ''अब हम रिसर्च फ्रेमवर्क पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं...कि हम अपने कैंपस में माइक्रो रिसर्च ग्रुप किस तरह बना सकते हैं और छात्रों और फैकल्टी सदस्यों दोनों को जोड़ने के लिए माहौल पैदा कर सकते हैं.''
वीसी कहते हैं, ''उच्च शिक्षा संस्थान के तौर पर हमें उन संसाधनों की जानकारी है जिन्हें हमें विकसित करना है. एक छोटे कॉलेज से ऑटोनॉमस कॉलेज तक का सफर और अब हम एक यूनिवर्सिटी हैं.'' यह दर्जा मिलने के एक साल बाद क्रिस्टू जयंती विस्तार के नए चरण की तैयारी कर रही है, जिसकी शुरुआत बेंगलूरू में जुलाई में खुलने वाले दूसरे, अत्याधुनिक कैंपस से होगी. इसमें एक एक्सक्लूसिव मैनेजमेंट स्कूल होगा. लंबी अवधि की अपनी योजना के तहत यूनिवर्सिटी का बेंगलूरू से बाहर भी विस्तार करने का इरादा है.
इंडिया टुडे के बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026:
देशभर के 1,800 से अधिक संस्थानों की 14 प्रमुख स्ट्रीम्स में रैंकिंग, साथ में कोर्स, प्लेसमेंट और कैंपस लाइफ का विस्तृत विश्लेषण पढ़िए इंडिया टुडे के इस विशेषांक में. भारत के बेस्ट सोशल वर्क कॉलेज कौन-से हैं? पूरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें- https://bestcolleges.indiatoday.in/full-rankings