इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: अकादमिक उत्कृष्टता की पूरी एक सदी
अपने शताब्दी वर्ष में एसआरसीसी इंटरडिसिप्लिनरी पढ़ाई, उभरती तकनीक पर ध्यान, रिसर्च और बेजोड़ पूर्व एलुमनाइ नेटवर्क के जरिए कॉमर्स शिक्षा के ऊंचे मानक कायम रख पाने में कामयाब.

एसआरसीसी कॉलेज
इस साल श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में आने वाले छात्र एक अहम मोड़ पर इसका हिस्सा बनेंगे. 1926 में स्थापित यह कॉलेज अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है, जो भारत के शीर्ष कॉमर्स और इकोनॉमिक्स संस्थानों में से एक के 100 साल पूरे होने का अवसर है. साल भर चलने वाले शताब्दी समारोहों के साथ-साथ छात्र ऐसे कैंपस को देखेंगे, जो उच्च शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलावों के अनुरूप बदल रहा है.
इस बदलाव का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (यूजीसीएफ) से प्रेरित है, जो छात्रों को अपने डिग्री प्रोग्राम की सीमाओं से बाहर जाकर पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.
मिसाल के तौर पर, कॉमर्स का छात्र अब मनोविज्ञान, पर्यावरण अध्ययन या उद्यमिता जैसे कोर्स भी पढ़ सकता है. एसआरसीसी की प्रिंसिपल सिमरित कौर कहती हैं, ''एनईपी 2020 की भावना भारतीय उच्च शिक्षा को इस सवाल से कहीं आगे ले जा रही है कि 'छात्रों को क्या जानना चाहिए?’ अब सवाल यह है कि 'छात्रों को किस तरह का व्यक्ति बनना चाहिए?’’
यहां रिसर्च भी एक अहम फोकस क्षेत्र है. कॉलेज अब छात्रों को रिसर्च प्रोजेक्ट, नीति अध्ययन और फील्ड आधारित जांच में भाग लेने के लिए ज्यादा प्रोत्साहित कर रहे हैं. एसआरसीसी ने अपनी छात्र रिसर्च पत्रिका स्ट्राइड्स को मजबूत किया है, जबकि उसके बिजनेस एनालिस्ट जर्नल को हाल ही में ऑस्ट्रेलियन बिजनेस डीन काउंसिल की 2025 जर्नल क्वालिटी लिस्ट में शामिल किया गया.
तकनीक भी अब ज्यादा दिखाई दे रही है. यह कॉलेज स्मार्ट क्लासरूम और उभरती तकनीकों में निवेश कर रहा है. 2026-27 के लिए प्रस्तावित एक पहल पेशेवर सेवा कंपनी ईवाइ के साथ एक साल का कार्यक्रम है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्योग में उसके इस्तेमाल पर केंद्रित होगा.
पढ़ाई से इतर, एसआरसीसी में छात्र जीवन उसकी कई सोसाइटी और आयोजनों के जरिए चलता है. ये मंच नेतृत्व, टीमवर्क, सार्वजनिक भाषण और उद्यमिता के ऐसे अवसर देते हैं, जो क्लासरूम की पढ़ाई को पूरा करते हैं.
20,000 से ज्यादा लोगों को दुनिया भर में जोड़ने वाले अपने एलुमनाइ नेटवर्क के जरिए छात्र अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों से संवाद करते हैं. पुराने छात्रों के व्याख्यान, पॉडकास्ट और नेटवर्किंग कार्यक्रम कैंपस जीवन का नियमित हिस्सा हैं.
2026 में आने वाले छात्र ऐसे संस्थान में प्रवेश करेंगे, जिसके पास एक सदी का इतिहास है, लेकिन इसके साथ ही वह तेजी से बदलती दुनिया के लिए छात्रों को पढ़ाने, सीखने और तैयार करने के नए तरीकों पर भी प्रयोग कर रहा है.
छात्रा की राय
एसआरसीसी में सीखना क्लासरूम से कहीं आगे की बात थी. दोस्तों, फैकल्टी और पूर्व छात्रों के साथ बातचीत ने मेरा नजरिया व्यापक किया और भविष्य का सामना करने को आत्मविश्वास, धैर्य और जुझारूपन दिया.
गरिमा राजपूत, बीकॉम, फोर्थ ईयर
गुरु वाणी
एसआरसीसी में हर दिन सिद्धांतों पर चलने वाले लोग भारत के भविष्य में भरोसा जगाते हैं. वे कॉलेज के आदर्श वाक्य 'तमसो मा ज्योतिर्गमय’ को जीते हैं, जिसका अर्थ है हमें सीख, सेवा और ईमानदारी के जरिए अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें.
सिमरित कौर, प्रिंसिपल