कानूनी शिक्षा के शिखर पर
कानून की शिक्षा का स्वर्णिम मानक NLSIU अहम क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच बढ़ा रहा. नए वकीलों को इस पेशे में अपनी जगह बनाने में वह मदद भी कर रहा.

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलूरू कैंपस में छात्र
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआइयू) की स्थापना कानून की पढ़ाई में सुधार लाने और भारत की कानूनी प्रणाली में बदलाव के मकसद से की गई थी. नए एकेडमिक साल में इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए भारत में कानून की पढ़ाई का यह आला संस्थान दो तरीके आजमा रहा है.
इनमें से एक तो है क्लिनिक्स प्रोजेक्ट. इसे पांच क्षेत्रों में इंसाफ की पहुंच से जुड़े गंभीर मसलों को हल करने के लिए तैयार किया गया है. ये पांच क्षेत्र हैं—किशोर न्याय, आपराधिक न्याय, जातीय न्याय, श्रम न्याय तथा नागरिकता और आव्रजन. साथ ही संस्थान कानून के युवा छात्रों को यह अहम अनुभव भी करवाता है कि इन क्षेत्रों में मुकदमेबाजी, वकालत और प्रैक्टिस असल में कैसी होती है.
कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए ये छात्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अन्य लोगों तथा संस्थाओं के साथ काम करेंगे. उन लोगों में नागरिक समाज संगठन, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं. एनएलएसआइयू के वाइस चांसलर प्रो. सुधीर कृष्णस्वामी कहते हैं, ''हमें बहुत खुशी है कि हम इस साल भारत का सबसे बड़ा क्लिनिकल प्रोग्राम लॉन्च करने वाले हैं.’’
दूसरा हस्तक्षेप, एनएलएसआइयू लिटिगेशन फेलोशिप के जरिए है. इसके तहत हर साल करिअर शुरू करने वाले पहली पीढ़ी के 30 वकीलों की 30,000 रुपए के मासिक स्टाइपेंड, पेशेवर परामर्श और दो साल तक लगातार सीखने के मौकों के साथ मदद की जाएगी.
प्रोफेसर कृष्णस्वामी कहते हैं, ''हमें उम्मीद है कि समय के साथ हम लॉ स्कूल के अलावा भी कानून के पेशे को आकार देने के मामले में खासा असर डालने में सक्षम होंगे.’’ यह एनएलएसआइयू की रगों में बसा है.
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