इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: रिसर्च और इनोवेशन का उभरता केंद्र

अत्याधुनिक प्रशिक्षण, रिसर्च और इनोवेशन ने नागपुर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल (जीडीसीएच) को पहुंचाया सफलता के नए शिखर पर.

Dental
मरीजों के दांतों का इलाज करते स्टुडेंट

- योगेश पांडेय

सन् 1968 में स्थापित नागपुर का गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल डेंटल एजुकेशन, रिसर्च और ओरल हेल्थकेयर के लिए भारत के अग्रणी केंद्रों में से एक है. स्थापना के बाद से अब तक यह संस्थान 3,000 से ज्यादा डेंटल ग्रेजुएट को प्रशिक्षित कर चुका है, जो अब भारत ही नहीं विदेश तक में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के परिसर में स्थित इस कॉलेज को एशिया के सबसे बड़े मेडिकल परिसरों में से एक के तौर पर जाना जाता है.

बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) कार्यक्रम के लिए हर साल निर्धारित सीटों की संख्या शुरुआत में 30 थी, जो अब बढ़कर 63 हो चुकी है. सभी मान्यता प्राप्त डेंटल स्पेशिएलिटीज में मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (एमडीएस) प्रोग्राम 1981 में शुरू किया गया था. इसके अलावा, संस्थान ने 2014 में पीएचडी प्रोग्राम और 2017 में विभिन्न आधुनिक विषयों में फेलोशिप प्रोग्राम भी शुरू कर दिए.

अस्पताल के डीन डॉ. मंगेश फणनाइक कहते हैं, ''हमारी यह विरासत 60 वर्ष पुरानी है. नीट टॉपर इस कॉलेज को पसंद करते हैं. हमारे यहां अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों ही स्तरों पर बेहतरीन रिसर्च एक्टिविटी होती हैं.’’ कॉलेज अपने अनुभवी शिक्षकों के लिए नियमित तौर पर फैकल्टी एन्हांसमेंट वर्कशॉप भी आयोजित करता है. वे यह भी कहते हैं, ''हमारे यहां आने वाले मरीजों की संख्या अच्छी-खासी है. हमारे पास जांच और इलाज की आधुनिक तकनीकें भी मौजूद हैं.’’

ओरल हेल्थकेयर के सबसे बड़े (टर्शरी) रेफरल सेंटर के तौर पर जीडीसीएच, नागपुर हर साल 3,00,000 से ज्यादा मरीजों का इलाज करता है. यह संस्थान आधुनिक क्लिनिकल और प्रयोगशाला ढांचे से लैस है, जिसमें कैड-कैम तकनीक, सर्जिकल गाइड के लिए 3डी प्रिंटिंग सुविधाएं, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, उन्नत जांच और सर्जिकल उपकरण, आधुनिक डेंटल यूनिट्स और विशेष उपचार केंद्र शामिल हैं.

जरूरतमंद और वंचित आबादी तक ओरल हेल्थकेयर सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल डेंटल यूनिट्स और सैटेलाइट केंद्रों माध्यम से काम किया जाता है. वर्ष 2017 से अब तक संस्थान ने 1,000 से ज्यादा आउटरीच कैंप आयोजित किए हैं, जिसका 75,000 से ज्यादा लोगों को लाभ मिला. कोविड-19 महामारी के दौरान संस्थान ने म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों के इलाज और पुनर्वास के लिए एक अग्रणी केंद्र की स्थापना भी की थी.

जीडीसीएच नागपुर ने देश में अपनी तरह का पहला सुपरस्पेशिएलिटी डेंटिस्ट्री और रिसर्च सेंटर भी शुरू किया है. यह अत्याधुनिक सुविधा एस्थेटिक डेंटिस्ट्री, डिजिटल डेंटिस्ट्री, ओरल इम्प्लांटोलॉजी, स्पोट्र्स डेंटिस्ट्री और फोरेंसिक ओडोंटोलॉजी जैसी एडवांस्ड डिसिप्लिन एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं.

ये केंद्र क्वालिटी एजुकेशन, ट्रेनिंग, इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक आधुनिक सिमुलेशन लैब, एक एडवांस्ड डिजिटल लाइब्रेरी, एक केंद्रीय संग्रहालय और आइसीटी-सक्षम स्मार्ट क्लासरूम से लैस है. स्टुडेंट्स ट्रेनिंग असेसमेंट रेटिंग (स्टार) सिस्टम और रिफ्लेक्शन लॉगबुक जैसी अनूठी पहलकदमियों ने परिणाम आधारित शिक्षा और शिक्षार्थियों के मूल्यांकन को मजबूत किया है.

कॉलेज रोजगार क्षमता और व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण ऐड-ऑन कोर्स भी कराता है. डॉ. फणनाइक का कहना है कि सुपरस्पेशिएलिटी डेंटल एजुकेशन, आधुनिक तरीके से मरीजों की देखभाल और ट्रांसलेशनल रिसर्च के मामले में इसके एक राष्ट्रीय केंद्र के तौर पर उभरने की उम्मीद है. राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) के मूल्यांकन के पहले चक्र में संस्थान ने 3.33 के उत्कृष्ट सीजीपीए के साथ प्रतिष्ठित ए+ ग्रेड हासिल किया है.

बीडीएस अंतिम वर्ष की छात्रा कोमल रेवतकर के मुताबिक, उन्हें जीडीसीएच, नागपुर से बेहतरीन क्लिनिकल अनुभव प्राप्त हुआ: ''हमें हमेशा यही सिखाया जाता है कि डेंटिस्ट्री विज्ञान के साथ-साथ एक कला भी है, और इसमें हुनर को निखारना बहुत मायने रखता है.’’ रेवतकर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में संस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

वे यह भी बताती हैं कि सेल्फ-डायरेक्टेड लर्निंग जैसी आधुनिक शिक्षण पद्धतियां छात्रों में आत्मविश्वास और प्रेजेंटेशन स्किल्स विकसित करने में मददगार रहीं. रेवतकर का कहना है, ''आउटरीच ऐक्टिविटी से छात्रों को ग्रामीण आबादी को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है और रिसर्च के लिए नए आइडिया भी मिलते हैं.’’

शिक्षकों और विद्यार्थियों की तरफ से रिसर्च, इनोवेशन और बौद्धिक संपदा तैयार करना और शोधपत्रों का प्रकाशन इस संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. जीडीसीएच में अंडरग्रेजुएट स्तर पर रिसर्च के लिए एक जीवंत माहौल बना हुआ है जो छात्रों को अपनी पसंद के मेंटॉर के मातहत रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू करने को प्रोत्साहित करता है. ऐसी गतिविधियों से छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और गंभीर सोच को बढ़ावा देने में मदद मिलती है. 

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