आत्मनिर्भरता के झंडाबरदार
भारत की आयात निर्भरता कम करने वाले प्रोडक्ट्स उत्पादन की अपनी योजना के बारे में नाटूभाई पटेल बताते हैं, ''आयात पर निर्भरता घटाने और आयात खत्म करने वाले प्रोडक्ट्स बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

36वीं वर्षगांठः दिग्गज कारोबारी
नटवरलाल पटेल, 68 वर्ष,
अहमदाबाद, गुजरात
कंपनीः मेघमणि ऑर्गेनिक्स, मेघमणि फाइनकेम
कुल संपत्तिः 1,400 करोड़ रु .
सबके नाटू काका
गुजरात में नेता हों या दूसरे उद्योगपति, सभी नटवरलाल पटेल को 'नाटू काका’ के नाम से ही बुलाते हैं. पटेल के मुताबिक, सामाजिक कार्यों में सक्रिय होने के चलते लोगों ने उन्हें यह नाम दिया है.
नटवरलाल पटेल उर्फ नाटूभाई पटेल के कारोबार की एक खास पहचान यह है कि वे ऐसे बेसिक केमिकल्स का उत्पादन कर रहे हैं, जिसके लिए भारत तकरीबन पूरी तरह आयात पर निर्भर है. मसलन वाइट पिगमेंट. इसे टाइटेनियम डायऑक्साइड भी कहते हैं. इसका इस्तेमाल पेंट, प्लास्टिक और पेपर में होता है. भारत हर साल 2.50 लाख टन वाइट पिगमेंट आयात करता है जो कुल जरूरत का 90 प्रतिशत है.
केंद्र सरकार पिछले कुछ सालों से यह चाह रही थी कि वाइट पिगमेंट के उत्पादन 'मेक इन इंडिया’ के तहत हो. नाटूभाई पटेल ने इसके लिए नया प्लांट लगाया और अब उनकी कंपनी 2023 के जनवरी से इसका उत्पादन शुरू करने जा रही है. शुरुआत में इसकी सालाना क्षमता 15,000 टन होगी जिसे दो साल में बढ़ाकर 60,000 टन करने की योजना है.
भारत की आयात निर्भरता कम करने वाले प्रोडक्ट्स उत्पादन की अपनी योजना के बारे में नाटूभाई पटेल बताते हैं, ''आयात पर निर्भरता घटाने और आयात खत्म करने वाले प्रोडक्ट्स बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. हमने आठ महीने पहले इपोक्लोरोहाइड्रिन यानी ईसीएच का उत्पादन शुरू किया.
इसका इस्तेमाल कई तरह के केमिकल बनाने में कच्चे माल के तौर पर होता है. भारत में पहली बार इसका उत्पादन शुरू हुआ. हम इसकी तकनीक फ्रांस से लेकर आए. हमने इसी साल जून में सीपीवीसी बनाना शुरू किया. भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत सीपीवीसी आयात करता है.
अमेरिका, जापान और चीन से यह आता है. इसका इस्तेमाल पाइपिंग और फिटिंग्स में होता है. हमारी कंपनी ने 380 करोड़ रुपए का निवेश करके दाहेज में नया कैंपस बनाया है जहां इंपोर्ट सब्स्टीट्यूट करने वाले एग्रो केमिकल बनाने हैं.’’
नाटूभाई पटेल की दो कंपनियां हैं. इनमें से एक है मेघमणि ऑर्गेनिक्स. यह कंपनी एग्रो केमिकल्स बनाती है. वहीं दूसरी कंपनी मेघमणि फाइनकेम बेसिक केमिकल्स बनाती है. बेसिक केमिकल्स ऐसे केमिकल्स को कहते हैं जिनका इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर दूसरे उत्पाद तैयार करने के लिए होता है.
नौ भाइयों के परिवार में जन्मे नटवरलाल पटेल बहुत कम उम्र से ही चाहते थे कि वे केमिकल के कारोबार में जाएं. एमएससी की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में कुछ समय तक काम किया और 1980 में अपना कारोबार शुरू किया. नाटूभाई के पिता का नाम मेघजी भाई और मां का नाम मणि बेन था. अपने मां-पिता के नाम के आधार पर उन्होंने अपनी कंपनी का नाम मेघमणि रखा.
शुरुआती दिनों के बारे में नाटूभाई कहते हैं, ''मैंने टेक्सटाइल कलर के कारोबार से काम शुरू किया. 1986 में मेघमणि ऑर्गेनिक लिमिटेड की स्थापना की. हमने पिगमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए. 1995 में एग्रो केमिकल्स का उत्पादन शुरू किया. एग्रो केमिकल्स का बाजार पिगमेंट के मुकाबले दस गुना बड़ा है.
हमें पता था कि कृषि में मंदी नहीं आती, क्योंकि कोई भी भूखा नहीं रह सकता. इसलिए हमें लगा कि एग्रो केमिकल लगातार चलने वाला बिजनेस है. हमने पहला प्लांट 1995 में शुरू किया. साथ ही हम पिगमेंट का कारोबार भी बढ़ाते गए. 1995 में हमें वेंचर कैपिटल इक्विटी मिली और यहां से हमारे कारोबार को नया आयाम मिला.’’
और उसके बाद तो कारवां चल निकला. 2004 में उन्होंने सिंगापुर में अपनी कंपनी की लिस्टिंग कराई और बीएसई के साथ-साथ एनएसई में 2008-09 में लिस्टिंग कराई गई. बेसिक केमिकल जैसे कास्टिक, क्लोरीन, हाइड्रोजन आदि में इन्वेंस्टमेंट नहीं आ रहा था. इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने 2007 में मेघमणि फाइनकेम बनाई और इसे भी शेयर बाजार में लिस्ट कराया.
आज स्थिति यह है कि वे अपने पेस्टिसाइड 75 से ज्यादा देशों में बेच रहे हैं और पिगमेंट 40 से अधिक देशों में. पिगमेंट में वे कलर्स का स्कोप बढ़ा रहे हैं. अधिक से अधिक रंगों के पिगमेंट बनाने पर उनका जोर है. पिगमेंट में भारत से सबसे अधिक निर्यात करने वाली कंपनी मेघमणि है. वे अपने पेस्टिसाइड उत्पादन का 80 प्रतिशत निर्यात कर रहे हैं. अगले तीन साल में उनका यह कारोबार 5,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाने की उम्मीद है.
नाटूभाई कहते हैं कि वे भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देना चाहते हैं और जाहिर है कि कंपनी की आमदनी अधिक होगी तो सरकार को ज्यादा से ज्यादा टैक्स मिलेगा जो देश के विकास में इस्तेमाल होगा. नाटू भाई बताते हैं, ''पिछले 25 सालों में हर साल हमारी कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले अधिक टैक्स दिया है.’’ मेघमणि समूह की दोनों कंपनियों की कार्य संस्कृति के बारे में उनका कहना है कि ''हम टाटा की संस्कृति का पालन करते हैं और किसी भी कीमत पर यह पक्का करते हैं कि हमारे प्रोडक्ट्स पर लोगों का विश्वास बना रहे.’’
नाटूभाई पटेल शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़े सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं. सात अलग-अलग फैकल्टी वाले मेघमणि कॉलेज उन्होंने अहमदाबाद में स्थापित किए हैं. इन कॉलेजों में 4,500 से अधिक लड़कियां शिक्षा ले रही हैं. वे गुजरात के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल चला रहे हैं. नाटूभाई सरदारधाम परियोजना के उपाध्यक्ष हैं. इसके तहत कौशल विकास और सिविल सेवा की तैयारी कराने का काम किया जा रहा है.
इसके तहत गुजरात के पांच शहरों में इसके सेंटर खुलने हैं. भुज और अहमदाबाद का सेंटर शुरू हो गया है. बड़ौदा, सूरत और भावनगर के सेंटर भी जल्द ही शुरू होने वाले हैं. इस परियोजना के तहत दिल्ली में एक सेंटर का उद्घा टन 2021 में किया गया. नाटूभाई अपने कारोबार का काम खत्म करके रोज शाम 2 घंटे सरदारधाम परियोजना के कार्यालय में जाते हैं और इससे जुड़े काम करते हैं. उनके मेघमणि समूह ने इसमें अच्छी-खासी रकम दान में दी है.
नटवरलाल पटेल गुजरात में 'नाटू काका’ के नाम से बुलाए जाते हैं. वे चाहे उद्योगपति हों, नेता हों या फिर कोई और, नाटूभाई सबके लिए नाटू काका हैं. इस बारे में वे कहते हैं, ''जब से मैं सामाजिक कार्यों में सक्रिय हुआ तब से लोग नाटू काका कहने लगे. यह साथी कारोबारियों का बड़प्पन है. वे ही मुझे खुद औद्योगिक संगठनों में जाने के लिए दबाव डालते हैं.’’
गुजरात के उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व करने वाली 74 साल पुरानी संस्था गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के तौर पर भी नाटूभाई पटेल ने काम किया है. हॉबी के बारे में पूछने पर नाटूभाई कहते हैं, ''सामाजिक कार्य ही मेरी हॉबी है. उसी में व्यस्त रहता हूं. मुझे बहुत सारे लोगों से मिलना पसंद है.’’ वे अपनी बात आगे बढ़ाते हुए यह भी बताते हैं, ''मैं छोटे कारोबारियों से मिलता हूं तो उनसे भी बहुत कुछ सीखता हूं.’’