प्रधान संपादक की कलम से
हमने इन्हें 'नई नस्ल 100' कहा है और इनमें वे युवा शुमार हैं जिन्होंने नेता, वैज्ञानिक, लेखक, कलाकार, खिलाड़ी और आंत्रेप्रेन्यौर के तौर पर अपनी अलग छाप छोड़ी है.

अरुण पुरी
इंडिया टुडे (अंग्रेजी) का पहला अंक हमारे गणतंत्र के रजत जयंती वर्ष में बाजार में आया था. अब से तीन साल बाद, जब गणतंत्र 75 का होगा, हम अपने वजूद का अर्धशतक मनाएंगे. कितना अविश्वसनीय सफर रहा है यह. एक भी अंक चूके बिना हमने आपातकाल से लेकर महामारी तक बीते कुछ दशकों में भारत के रोमांचकारी सफर के हरेक उतार-चढ़ाव की गहराई से पड़ताल की.
इस पत्रिका का वर्षगांठ अंक अक्सर हमारे लिए आत्ममंथन का अवसर होता है. इस तरह के पिछले अंकों में हमने बीते दशक की अहम घटनाओं, शीर्ष शख्सियतों के जिंदगी बदल देने वाले पलों और ग्रामीण भारत के बदलावों पर नजर डाली.
हमें यह भी एहसास है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में हम सबसे ज्यादा युवाओं वाले देश में रह रहे हैं—आधा भारत 29 से कम की वय का है. दुनिया की आबादी का पांचवां हिस्सा युवा है. यह युवा उभार हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और निजी अथवा सामूहिक तौर पर वे जो करेंगे, उसी से तय होगा कि राष्ट्र के नाते हम कहां जाएंगे.
तो अपनी 46वीं वर्षगांठ पर हमने आने वाले कल के भारत पर नजर डालने का फैसला किया—यानी उन युवक और युवतियों पर, जो तब जन्मे भी नहीं थे जब हमारी पत्रिका लॉन्च हुई थी, और इसके बावजूद आज वे अपने-अपने क्षेत्र में बुलंदी की तरफ बढ़ रहे हैं.
हमने सौ युवक-युवतियों को चुना है, जो इस देश के भावी सितारे होंगे. हमने इन्हें 'नई नस्ल 100' कहा है और इनमें वे युवा शुमार हैं जिन्होंने नेता, वैज्ञानिक, लेखक, कलाकार, खिलाड़ी और आंत्रेप्रेन्यौर के तौर पर अपनी अलग छाप छोड़ी है. कइयों ने खेल के नियम बदल दिए. एक पूरी पीढ़ी लगी तब कहीं जाकर रिलायंस और इंफोसिस भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियां बनीं.
बायजूज़ को अगस्त में 1.6 लाख करोड़ रुपए (21 अरब डॉलर) के बाजार पूंजीकरण के साथ दुनिया की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी बनाने में 40 वर्षीय बायजू रवींद्रन को महज एक दशक लगे. 2020 में बिहार के विधानसभा चुनाव में 32 वर्षीय तेजस्वी यादव भारी-भरकम सत्तारूढ़ दलों के साथ मुकाबले में भारत के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने से बाल-बाल चूक गए—फिलहाल वे विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं.
इस साल 23 वर्षीय नीरज चोपड़ा ओलंपिक स्वर्ण पदक के लिए भाला फेंककर इन खेलों के ध्येयवाक्य 'और तेज, और ऊंचे, और मजबूत' पर खरे उतरे. वे साल की सबसे अहम खेल सनसनी और उन लोगों में से हैं जिन पर आने वाले सालों में नजर रखी जाएगी.
एंटरटेनर भुवन बाम को यूट्यूब पर वैसी ही ख्याति और वाह-वाही हासिल है जैसी हमारी शुरुआत के साल बॉक्स ऑफिस पर अमिताभ बच्चन को हासिल थी. फिर कई युवा आंत्रेप्रेन्योर भी हैं जिन्होंने अपने नए विचारों से कामयाब कारोबारों का ताना-बाना बुना.
चाहे वे 32 वर्षीय अंकित मेहता हों, जिनका स्टार्टअप आइडियाफोर्ज भारत की सबसे प्रमुख ड्रोन फर्म बन गया है; या सारेगामा की डायरेक्टर अवर्णा जैन हों, जिन्होंने पुराने जमाने की एक संगीत कंपनी को घर-घर में लोकप्रिय नाम और भारत का सबसे बड़ा संगीत का भंडार बना दिया; या अंतरिक्ष उद्यमी 32 वर्षीय पवन कुमार चांदना हों, जो 2022 में निजी स्तर पर निर्मित रॉकेट से उपग्रह लॉन्च करने का मनसूबा बना रहे हैं. एडेलवेइस एएमसी की एमडी और सीईओ 38 वर्षीय राधिका गुप्ता भारत की सबसे प्रभावशाली कारोबारी महिलाओं में से एक हैं.
दूसरों ने कोविड से उपजे संकट में मौका ताड़ा. 37 वर्षीय आयुषि गुडवाणी ने महामारी के दौरान महिलाओं के लिए अपनी बिजनेसवीयर लाइन का एक्सेसरीज में विस्तार किया. भाजपा के सबसे युवा लोकसभा सांसद 31 वर्षीय तेजस्वी सूर्या ने अपने मतदाताओं को चिकित्सा सहायता और सामान पहुंचाने के लिए कोविड टास्क फोर्स का गठन किया.
पर इस तरह की कोई भी सूची समग्र नहीं हो सकती. यह केवल इशारा भर कर सकती है कि भारत हरेक क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं और अथाह ऊर्जा से ओतप्रोत है. यह ऐसी पीढ़ी है जो दुनिया के बेहतरीन से बेहतरीन के आगे तनकर खड़ी हो सकती है.
वे भारत का भविष्य हैं. हौसला बढ़ाने वाली बात यह है कि वे आशावाद, आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा की रोशनी बिखेर रहे हैं. उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं. देश में ढेरों गड़बड़ियां हैं पर ये युवक-युवतियां मुझे उम्मीद बंधाते हैं कि हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा.
इसी उम्मीद के साथ मैं आप सबके लिए इस बात की शुभकामना करता हूं कि 2022 आपके लिए अच्छी सेहत, प्रसन्नता और समृद्ध देने वाला साबित हो. इनकी वाकई हमें बहुत जरूरत है.