विशेषांकः अंतिम छोर के आदमी से नाता
मजबूत पंचायती राज संस्थाओं के साथ ही महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों ने इस मरु प्रदेश में नन्न्शा बदलने का काम किया है.

गांवों पर जोर ‘गांव के संग’ कार्यक्रम के दौरान सीएम गहलोत
राजस्थान: शासन के पैमाने पर श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले बड़े राज्य
राजस्थान पिछले कुछ वर्षों से शासन के मामले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्य का पुरस्कार जीत रहा है. यह कम आय वाला और सबसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाला रेगिस्तानी राज्य है. राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण और शासन में सुधार के लिए 'ई-मित्र’ जैसे मुद्दों पर जमीनी स्तर पर ध्यान केंद्रित किया है.
अब राज्य का दावा है कि सभी पंचायत सदस्यों में से 56 प्रतिशत महिलाएं हैं और ई-गवर्नेंस सभी 11,341 पंचायतों को जोड़ती है. राज्य में प्रति एक लाख की आबादी पर 18 ई-मित्र केंद्र उपलब्ध हैं, जहां 500 प्रकार की सेवाएं मुहैया की जाती हैं. इसने सरकारी सेवा में लगने वाले समय और प्रयास को भी काफी हद तक कम कर दिया है. इसके अलावा, ऐसी सेवाएं प्रदान करने वाले 87,166 कियोस्क ने कई नौकरियां पैदा की हैं.
लेकिन राज्य को व्यापार सुगमता के मामले में अब भी बहुत कुछ करना है, जहां यह देश में 8वें स्थान पर है और ऑनलाइन लेनदेन कम है, जो प्रति हजार जनसंख्या पर अभी सिर्फ 4,895 है. धीरे-धीरे बिजली बिल, वाहनों और संपत्तियों के पंजीकरण शुल्क, लाइसेंस जारी करने आदि सहित कई भुगतान ऑनलाइन किए जा रहे हैं.
राजस्थान पंचायती राज संस्थाओं में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देता है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं, ''पंचायती राज संस्थानों को शक्तियां हस्तांतरित करने पर ध्यान केंद्रित करने से हम ई-गवर्नेंस को ग्रामीण राजस्थान के सुदूर कोनों तक ले गए.’’
हालांकि, राज्य केंद्र की और साथ ही अपनी योजनाओं के कार्यान्वयन के प्रति धीमी प्रतिक्रिया जैसे मानकों में पिछड़ रहा है. इसका एक कारण नौकरशाही और राजनीतिक व्यवस्था की जड़ता है.