विशेषांकः पथ प्रदर्शक
महज 24 साल की उम्र में कपूर ने अपना स्टूडियो आरके फिल्म्स स्थापित किया. आवारा के साथ वे स्वतंत्र भारत के सबसे विलक्षण फिल्म प्रतिभा बन गए.

75वां स्वतंत्रता दिवस विशेषांक-पथप्रवर्तक / सिनेमा
राज कपूर (1924-1988)
सिमी ग्रेवाल
एक शख्स के तौर पर राज कपूर भावुक, बच्चों-जैसे, शक्की और भगवान से डरने वाले थे. वे बेहद उदार मेजबान थे और बेहद खिलंदड़ थे और उन्हें आर्ची कॉमिक्स पढ़ना बहुत पसंद था. वे मूडी थे और कई बार झक्की की तरह बर्ताव करते थे.
कई बार वे बेचैन दिखते थे, और कभी-कभी बहुत वाचाल हो उठते थे, वे स्नेहिल भी थे और बहुत पजेसिव और संवेदनशील भी. हर चीज में वे डबल डोज सरीखे थे.
कल्पना के मामले वे बेहद प्रतिभाशाली थे; निश्चित रूप से एक संपूर्ण मनुष्य, जिसमें आंतरिक आग, ऊर्जा, मूर्खता और बुद्धिमत्ता भरी हुई थी.
बतौर फिल्मकार, जब राजकपूर ने कहा था, 'सिनेमा मेरी जिंदगी है’, तो यह उनमें कूटकर भरी हुई हकीकत थी. फिल्मों को लेकर उनमें जो पीड़ादायक जुनून था, वह अद्भुत था. उनके लिए उनकी फिल्मों से अधिक अहम कोई और चीज या व्यक्ति नहीं था.
राजजी अपने क्रू को लेकर स्नेहिल थे, यहां तक कि उनका वे अपने बच्चों से भी अधिक ध्यान रखते थे. अगर किसी ने बढ़िया काम किया हो, तो उसकी तारीफ से वे पीछे नहीं हटते थे.
वे भारतीय सिनेमा के लिए पथ प्रदर्शक थे. चाहे किसी राहत कोष के लिए चैरिटी का शो हो, राजजी फिल्मोद्योग की डांस और गानों में अगुआई करते थे. वे न तो कभी सकुचाए, न कभी डरे, वे आत्मविश्वास से भरकर आगे बढ़ते रहे और उन्हें खुद पर और इस दुनिया में अपनी जगह को लेकर पक्का यकीन था.
सिमी ग्रेवाल ने राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर में अभिनय किया और एक डॉक्यूमेंट्री लिविंग लीजेंड राज कपूर का निर्देशन किया है.