विशेषांकः रातोरात बना कंटेनर में अस्पताल

सरकार के अधीर अनुरोध पर ललित किरी ने एक ही दिन में कोविड केयर सेंटर खड़ा किया.

समाधान  बंक हाउस कोविड केयर सेंटर
समाधान  बंक हाउस कोविड केयर सेंटर

स्वयंसेवा का गणतंत्र/चिकित्सा सेवा

ललित किरी की कहानी रंक से राजा बने एक फार्मेसिस्ट की कहानी है, जिसने राजस्थान के बाड़मेर में तेल की खोज कर रही केयर्न एनर्जी को लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करके शानदार कामयाबी हासिल की और उसके बाद लगातार आगे बढ़ता रहा.

कोविड-19 की महामारी की शुरुआत से ही वे सरकार से आग्रह करते आ रहे थे कि जिन इलाकों में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है, वहां अस्थायी कोविड अस्पताल बनाने के लिए 'कंटेनर बंक हाउसों’ का इस्तेमाल करे. ये शिपिंग कंटेनर होते हैं जिन्हें निर्माण स्थलों पर कमरों की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

राज्य के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कुछ हफ्तों पहले किरी को इन बंकहाउसों से पचपदरा के नजदीक संभारा में कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए अनुरोध भेजा. उन्होंने उन्हें महज 24 घंटे दिए. मुश्किलों के बावजूद किरी ने यह काम कर दिखाया. उन्होंने प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, लैंडस्केपर और ट्रांसपोर्टरों सहित सौ लोगों के अलावा जीसीबी (खुदाई करने वाले) सरीखी मशीनें जुटाईं.

वे कहते हैं, ''हम सौ लोग 24 घंटे सोए नहीं.’’ इस पूरी तरह एयरकंडीशंड और सुसज्जित कोविड केयर सेंटर में 10 ऑक्सीजन वाले और 15 नियमित बिस्तर हैं. साथ ही 24 घंटे की ओपीडी भी. इलाके में परियोजना की 1 करोड़ रुपए की पूरी लागत ललित किरी ने उठाई. अस्थायी तौर पर बना अस्पताल इस अंचल में ग्रामीणों के लिए वरदान बनकर आया.

वैसे, उन्हें इलाज के लिए चार घंटे सफर करके कस्बों और शहरों में जाना पड़ता था. जिन्हें तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, वे इस केंद्र में हासिल कर सकते हैं. जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, वे यहां डॉक्टरों को दिखाकर उनके नुस्खे में लिखी दवाइयां तुरंत ले सकते हैं.

मसलन, बाड़मेर जिले के संतरा गांव की 68 वर्षीया देवी कंवर कुछ दिन बुखार रहने के बाद 5 मई को कोविड पॉजिटिव निकलीं. कुछ दिन बाद उनका ऑक्सीजन का स्तर गिरने पर चिंता बढ़ गई, क्योंकि नजदीकी अस्पताल 40 किमी दूर बालोतरा में था और वहां बिस्तर भी नहीं था. मगर गांव से 30 किमी दूर किरी के अस्थायी अस्पताल—बंक हाउस कोविड केयर सेंटर—का उद्घाटन ठीक उसी दिन हुआ था.

अहमदाबाद में ट्रांसपोर्टर का काम करने वाला उनका बेटा भागा-भागा उन्हें बंक हाउस ले गया. यहां उन्हें ऑक्सीजन पर रख दिया गया. नौ दिन बाद उनकी हालत में इतना सुधार आ गया कि फिर उन्हें इसकी जरूरत नहीं रही. कंवर के बेटे कहते हैं, ''हमारी बहुत अच्छी तरह देखभाल की गई, बड़े अस्पताल में हम जितनी (उम्मीद) कर सकते थे, उससे भी अच्छी.’’ बंक हाउस के प्रभारी डॉ. मुकेश राजपुरोहित यह भी जोड़ते हैं कि इसने इलाके में बड़े अस्पतालों का बोझ कुछ कम कर दिया है. ठ्ठ

मुझसे कहा गया कि जिंदगियां बचाने के लिए 24 घंटे में संभारा में कोविड सेंटर बनाना है, और मैंने अपने लोग और संसाधन इस काम को पूरा करने में झोंक दिए

ललित किरी 
ललित किरी, डायरेक्टर, किरी ऐंड कंपनी लॉजिस्टिक्स
उन्होंने क्या किया 24 घंटे में ऑक्सीजन बेड से लैस अस्थायी कोविड केयर सेंटर बना दिया.

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