आवरण कथाः प्यास है कि बुझती ही नहीं

आजादी के सात दशक बाद भी देश के 19.1 करोड़ परिवारों में तकरीबन एक-तिहाई को ही नल कल से पीने का पानी नसीब, अब देश की उम्मीदें महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन पर टिकीं

हंसी-खुशी की धारा राजस्थान के सिंद्रठ गांव में रात में अपने घर के सुकून में नल से पानी भरतीं महिलाएं
हंसी-खुशी की धारा राजस्थान के सिंद्रठ गांव में रात में अपने घर के सुकून में नल से पानी भरतीं महिलाएं

नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के मुख्यालय में अतिरिक्त सचिव तथा जल जीवन मिशन के निदेशक भरत लाल अपने कंप्यूटर पर क्लिक करके सरकार के उस विशाल कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लेते हैं जो हरेक ग्रामीण घर में पेयजल के लिए नल कनेक्शन देने का वादा करता है. उनके क्लिक करते ही मंत्रालय की वेबसाइट पर तेजी से उभरता है कि उस एक दिन देश भर के 1,27,000 घरों में सुचारू नल कनेक्शन लगा दिया गया है. फिर वे पता करते हैं कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआत करने के बाद अब तक कुल कितने घरों में सुचारू नल का कनेक्शन लगाया गया है. 3.84 करोड़ का आंकड़ा सामने आ जाता है. यह असाधारण प्रगति है, खासकर इस बात को देखते हुए कि इस मिशन की लॉन्चिंग से पहले महज 3.2 करोड़ घरों में सुचारू नल के कनेक्शन आजादी के बाद से लगाए गए थे.

हालांकि, जल जीवन मिशन की इस तेज रफ्तार तरक्की के बावजूद, महज 36.9 फीसद घरों में ही नल का पानी पहुंच सका है, जो देश में कुल 19.1 करोड़ घरों में से एक-तिहाई से कुछ ही ज्यादा है. यह देश और उसके नेताओं के लिए निश्चय ही शर्म की बात होनी चाहिए कि करीब 63 फीसद ग्रामीण आबादी को अब भी अपनी रोजमर्रा की जरूरत का पानी लाने के लिए अपने घरों से बाहर निकलना पड़ता है और कई बार घंटों कतार में लगना पड़ता है.

यही वजह  है कि लाल और उनके साथी धुन और पक्के इरादे से इस जल जीवन मिशन में जुटे हैं और इसकी समय सारिणी पर बाज की तरह आंखें गड़ाए हैं, जो स्कूलों के अलावा सारे ग्रामीण घरों में 2024 तक सुचारू नल का कनेक्शन लगाने का वादा करता है. पेयजल मुहैया करने की अतीत में भी जबरदस्त कोशिशें की गई हैं, जिनमें 1986 में राजीव गांधी के हाथों लॉन्च राष्ट्रीय पेयजल मिशन भी शामिल है, लेकिन उनमें से कोई भी जल जीवन मिशन की बराबरी नहीं करता. 'हर घर नल से जल' कार्यक्रम के तहत 2024 का लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार को अगले तीन साल में हर साल 3 करोड़ नए घरों में नल लगाना है.

प्यास है कि बुझती ही नहीं

रोकड़ा कोई मसला नहीं है. इसे हासिल करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने 3.26 लाख करोड़ रुपए अलग रख छोड़े हैं. मगर जल जीवन मिशन की टीम जो काम कर रही है, वह यह है कि नल का जल मुहैया करने के लिए जरूरी पाइप, नलों और दूसरे साजो-सामान के मानक रूपों के इस्तेमाल पर जोर देने और मिशन की प्रगति पर नजर रखने के लिए बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाए. लाल देश के किसी भी जिले या गांव पर ध्यान गड़ा सकते हैं और वहां बुनियादी ढांचा लगाने और नलों में पानी आने के बारे में हुई प्रगति का पता लगा सकते हैं. यही वह लगातार निगरानी है जो न केवल जलापूर्ति की मात्रा पक्की करती है बल्कि इससे उसकी गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है.

लाल ने ही 2000 के दशक के मध्य में गुजरात की पुरस्कार विजेता जल आपूर्ति और स्वच्छता योजना की अगुआई की थी. लिहाजा वे जल जीवन कार्यक्रम को जमीन पर उतारने की जटिलताओं से बखूबी वाकिफ हैं. अपने लक्ष्य पूरे करने में पिछड़ रहे राज्यों की बहानेबाजी से वे अधीर हो उठते हैं. उनके तईं सामुदायिक भागीदारी ही यह पक्का करने की कुंजी है कि नल का जल न केवल हरेक घर में पहुंचे बल्कि अच्छे और सधे तरीके से संचालित भी किया जाए और यह टिकाऊ साबित हो. मिशन 'पानी समिति' की अवधारणा पर जोर दे रहा है जो जलापूर्ति की देख-रेख और संचालन के लिए ग्रामीणों और खासकर महिलाओं को ताकतवर बनाती है (देखें जहां महिलाओं का बोलबाला है).

जल जीवन मिशन के तहत टैंकों का निर्माण, नल और बिजली के काम, जल गुणवत्ता प्रबंधन, जलशोधन, कैचमेंट या जलग्रहण सुरक्षा और संचालन और प्रबंधन सरीखे कार्य सामुदायिक भागीदारी के जरिए किए जाएं. लाल कहते हैं, ''हरेक घर में नल का कनेक्शन मुहैया करना देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम और जरूरी है. पानी भरकर लाने की यंत्रणा महिलाओं को झेलनी पड़ती है और अगर घर पर सुचारू नल न हो तो इसका मतलब है कि उनका बहुत सारा समय और ऊर्जा जाया होती है. नल उन्हें कड़ी मशक्कत से बचाता है और ताकत देता है. घर पर शोधित पानी की आपूर्ति का मतलब कम बीमारी और कम खर्च भी है. कुल मिलाकर, इससे खासकर महिलाओं के लिए जिंदगी कहीं ज्यादा आसान और अच्छी होगी.''

जल स्रोतों की निरंतरता पक्की करने के लिए मिशन जल संग्रह की तकनीकों के जरिए स्थानीय जल स्रोतों को बढ़ाने और मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है. ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपशिष्ट पानी का शोधन करके उसे काम में लाएं और खेती-किसानी के कामों में उसका इस्तेमाल करें. टैंकों का निर्माण, पानी के पाइप बिछाना और नल लगाना ग्रामीण तकनीशियनों के लिए रोजगार का विशाल स्रोत है. इससे उन्हें रोजगार मिला है तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा. अगर जल जीवन मिशन अपने वादे पर खरा उतरता है तो यह 2024 तक ग्रामीण भारत का कायापलट कर देगा.

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