विशेषांकः सूर्य किरण की सवारी

भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता और इसके इस्तेमाल को बढ़ाया है. अब जरूरत पूरी तरह से गैर-जीवाश्म ईंधनों पर चले जाने की है

उज्ज्वल भविष्य कर्नाटक के पावागडा सोलर पार्क में लगे सोलर पैनल
उज्ज्वल भविष्य कर्नाटक के पावागडा सोलर पार्क में लगे सोलर पैनल

अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को 84 फीसद तक पेट्रोलियम आयात करना पड़ सकता है. पर एक ईंधन हमारे पास प्रचुर मात्रा में है: धूप. देश के अधिकांश हिस्सों में साल में 250-300 दिनों तक मौसम साफ और धूप खिली होती है. ऊर्जा में एक क्रांति लाने के लिए अब उसका दोहन किया जा रहा है, जो जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता में भारी कटौती कर सकता है और जलवायु परिवर्तन पर 2015 के पेरिस समझौते में जताई गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम बना सकता है.

मोदी ने संकल्प जताया था कि 2030 तक भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद की ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 33-35 फीसद तक कम करेगा. भारत ने प्रतिबद्धता जताई कि 2030 तक विद्युत शक्ति की अपनी स्थापित क्षमता का 40 फीसद गैर-जीवाश्म ईंधन से हासिल करेगा जो 2015 की इसकी गैर-जीवाश्म क्षमता में 33 फीसद की छलांग है.

तब से, भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि का जो संकल्प दिखाया है उसकी सराहना हुई है. पिछले पांच वर्षों में हमने अपनी सौर क्षमता में भारी वृद्धि करते हुए इसे 2,600 मेगावाट से बढ़ाकर 37,474 मेगावाट किया है. सौर ऊर्जा जल्द ही पवन ऊर्जा की स्थापित 38,624 मेगावाट क्षमता को पीछे छोड़ देगी और अक्षय ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत बन जाएगी. अक्षय ऊर्जा स्रोत, जिनमें सौर, पवन, लघु पनबिजली और बायोमास पावर शामिल हैं, 91,153 मेगावाट या देश की कुल स्थापित 3,75,322 मेगावाट विद्युत क्षमता का 23.5 फीसद है. बीते कुछ वर्षों में शुल्क में नाटकीय कमी के साथ और अभी लगभग 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध सौर ऊर्जा, ताप विद्युत से सस्ती हो गई है.

इस बीच, उद्यमियों को प्रोत्साहन प्रदान करने वाले बड़े सौर पार्क स्थापित करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के अलावा, मोदी सरकार ने 2019 में एक अभिनव योजना शुरू की जिसमें किसानों को सौर-ऊर्जा संचालित सिंचाई पंप लगाने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है. प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान नामक इस योजना के तीन उद्देश्य हैं: किसानों को व्यक्तिगत रूप से कृषि उपयोग के लिए 17 लाख स्वतंत्र सौर पंपों को लगाने में मदद करना; व्यक्तिगत किसानों या सहकारी समितियों को उनके खेत के आसपास 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भारी प्रोत्साहन देना; किसानों को अतिरिक्ति बिजली को राज्य विद्युत कंपनियों को बेचने की अनुमति देना. इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की ओर से करीब 34,000 करोड़ रुपए की मदद से लगभग 25,000 मेगावाट की सौर क्षमता को जोड़ना है.

भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का एक संस्थापक सदस्य है. यह 100 से अधिक देशों का एक समूह है जो सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बेहतर तकनीक विकसित करने के लिए धन देता है. देश में 7,000 किमी से अधिक विशाल और हवादार तटवर्ती क्षेत्र हैं, इसलिए तटीय क्षेत्रों में पवन से बिजली उत्पन्न करने के लिए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं. लागत अभी भी बहुत अधिक है, पर इन्हें कम करने पर काम किया जा रहा है. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय कई स्रोतों से बिजली बनाने पर भी काम कर रहा है, जिसमें ऊर्जा पैदा करने के लिए कचरे को जलाना भी शामिल है.

एक रोमांचक क्षेत्र मोटर वाहनों के लिए एक स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग है—मंत्रालय इस पर शोध करने वाले कई समूहों का समर्थन कर रहा है. इन सभी पहलों के साथ, भारत इस बात को लेकर आश्वस्त है कि वह जीवाश्म ईंधन निर्भरता को तय समय से पहले कम करके पेरिस की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करेगा. ये सभी तथ्य भारत के लिए उत्साहजनक हैं.

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