दहशत के दौर की वापसी!

कथित रूप से सुपारी लेकर अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर किए गए जानलेवा हमले ने बॉलीवुड में गैंगस्टरों की धमकियों और मुंबई में अपराधियों की वापसी के अंदेशों को दी हवा

tiger shroff attack
मुंबई के जुहू में 18 अक्तूबर को टाइगर श्राॅफ की कार पर हमला करते बदमाश; ‌घटनास्थल की पड़ताल करती फोरेंसिक टीम; श्रॉफ से मिलने उनके घर पहुंचे महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

मुंबई के उपनगर में गोलीबारी ने दहशत के उस पुराने दौर की फिर से याद दिला दी. तो क्या अंडरवर्ल्ड फिर से सिर उठा रहा है? 18 अक्तूबर की शाम को जुहू में 36 वर्षीय अभिनेता टाइगर श्रॉफ को कथित तौर पर सुपारी देकर मारने की साजिश रची गई थी. हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ बताया जा रहा है. टाइगर बच गए पर उनका ड्राइवर और एक राहगीर घायल हो गए.

मुंबई, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में अंतरराज्यीय पुलिस अभियानों के तहत दो महिलाओं समेत 10 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. 19 अक्तूबर को राजस्थान पुलिस ने कोटा रेलवे स्टेशन से संदिग्ध शूटरों रेहान रहीसुद्दीन उर्फ सुक्का और फूल सिंह (दोनों की उम्र 18 साल है और दोनों हरियाणा के सोनीपत में एक ही गांव के रहने वाले हैं) और बिहार के रहने वाले उनके मददगार ऋतिक महतो उर्फ रोशन फाइटर (22) को गिरफ्तार कर लिया.

वहीं, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें कुणाल (21), सुमित (19) और अंकित खट्टर (18) तीनों सोनीपत के रहने वाले हैं, जबकि राधा (23) और ब‌‌बिता (23)—उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं. 21 अक्तूबर को मुंबई पुलिस ने हरियाणा में स्थानीय पुलिस की मदद से दो और समीर तथा जतिन को उठाया.

हमले के बाद हरियाणा के पानीपत निवासी और अमेरिका से गतिविधियां चलाने वाले गैंगस्टर अनिल पंडित (32) और विदेश के ही उसके सहयोगी हरमन संधू ने बिश्नोई गैंग की ओर से इस हमले की जिम्मेदारी ली. वे बोले कि उन्होंने टाइगर को चेतावनी दी थी.

हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि श्रॉफ की ओर से धमकियों को लेकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी. मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच (डिटेक्शन) के डीसीपी राज तिलक रौशन का कहना है कि इन दावों की सचाई जांची जा रही है. “हम इन्हें ऐसे ही सच नहीं मान सकते.”

फिल्म इंडस्ट्री को चेतावनी देते हुए पंडित ने कहा कि अभिनेता सलमान खान उसके ‘भाई’ लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज से माफी मांगें. 1998 में राजस्थान में काले हिरण के शिकार के कथित मामले को लेकर सलमान खान लंबे समय से इस समाज के गुस्से का शिकार हैं. बिश्नोई समाज में इस पशु को पूज्य माना जाता रहा है.

धमकी से फिल्म इंडस्ट्री में बेचैनी है. ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज ने फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि “इस साजिश में शामिल सभी लोगों को ढूंढ निकाला जाएगा. किसी को बख्शेंगे नहीं.”

साजिश का खुलासा
जांचकर्ताओं के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ इसलिए बाल-बाल बच गए क्योंकि शूटर रेहान या तो बंदूक का ट्रिगर ठीक से खींच नहीं पाया या उसकी बंदूक जाम हो गई थी. इसके बाद फूल सिंह ने अभिनेता की कार पर पांच गोलियां चलाईं, जिससे ड्राइवर को गोली लग गई.

गोलियों से बचने के लिए टाइगर तुरंत ही पीछे की तरफ झुक गए थे लेकिन टूटे शीशों के कांच लगने से उन्हें मामूली चोटें आ गईं. डीसीपी रौशन के मुताबिक, जिस तरह से गोलियां चलाई गईं, उससे साफ था कि इरादा हत्या का ही था.

गोलीबारी के बाद तीनों आरोपी मोटरसाइकिल से फरार हो गए, जिसे ऋतिक चला रहा था. अंधेरी पश्चिम रेलवे स्टेशन के पास बाइक छोड़ वहां से बोरीवली के लिए लोकल ट्रेन पकड़ी, फिर सूरत के लिए कैब ली और जयपुर-पुणे ट्रेन में चढ़ गए.

पुलिस ने जल्द उनका सुराग लगा लिया. मुंबई पुलिस ने मोटरसाइकिल के मालिक का पता लगा लिया, जबकि सूरत में एक टैक्सी ड्राइवर को किए गए ऋतिक के फोन ने मुंबई पुलिस को गुजरात, राजस्थान और दिल्ली की पुलिस से संपर्क करने में मदद कर दी. ट्रेन के डिब्बे के बारे में मुंबई पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर राजस्थान पुलिस ने हमले के 15 घंटे के भीतर ही कोटा में तीनों को दबोच लिया.

इन गिरफ्तारियों से जांचकर्ताओं को यह समझने में भी मदद मिली कि टाइगर श्रॉफ को निशाना क्यों बनाया गया. मुमकिन है वे गैंग की पहली वरीयता न रहे हों. कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि शूटरों ने सलमान खान, अमिताभ बच्चन और आमिर खान के घरों की भी रेकी की थी. पर शायद उनकी कड़ी सुरक्षा देख निराश होने पर उनका ध्यान टाइगर श्रॉफ की तरफ गया. हालांकि, डीसीपी रौशन ने ऐसी रिपोर्ट की “पुष्टि या खंडन” से इंकार कर दिया है.

ये लोग सेलिब्रिटी के प्रशंसक बनकर उनके घरों की तस्वीरें लेने के बहाने ऑटो में बैठकर मुंबई में घूमते थे. उनके आकाओं ने उन्हें ऐसे सितारों की पहचान करने को कहा था जिनकी सुरक्षा व्यवस्था थोड़ी कमजोर हो.

ऐसे में टाइगर श्रॉफ आसान पहुंच वाले शिकार के तौर पर सामने आए. रिपोर्टों के मुताबिक, एक ऑटो चालक ने उन्हें टाइगर के रविवार को फुटबॉल खेलने के रूटीन के बारे में बताया था. शूटरों ने 11 अक्तूबर को रेकी की लेकिन उस दिन टाइगर नहीं आए.

वे 18 अक्तूबर को फिर आए. मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ जांच अधिकारी कहते हैं, “बिश्नोई गैंग शायद बॉलीवुड और मुंबई में खौफ फैलाने और फिरौती के लिए किसी बड़े चेहरे को निशाना बनाना चाहता था.” एक अन्य अधिकारी के मुताबिक टाइगर “आसान निशाना” थे क्योंकि उनके पास निजी सुरक्षा नहीं थी.

ऋतिक एक ऐप-आधारित सेवा में राइडर के तौर पर काम करता था, और बताते हैं, रेहान तथा फूल हमले से तीनेक हफ्ते पहले मुंबई पहुंचे थे. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, वे ‘हिंसक वारदातों’ में शामिल रहे हैं. तीनों पर हत्या के प्रयास और आर्म्स ऐक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

जांच में हथियारों की आपूर्ति के एक कथित नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है. सोनीपत जेल से जुलाई में छूटे कुणाल (21) की पहचान एक परिचित के जरिए अनिल पंडित से हुई थी.

गोलीबारी से पखवाड़े भर पहले, कुणाल और सुमित (19) ने अमृतसर में बिना किसी सप्लायर से मिले, एक ‘डेड लेटर बॉक्स’ ड्रॉप के जरिए विदेशी पिस्तौल और 20 कारतूस हासिल किए थे. जांचकर्ता पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह खेप पंजाब सीमा के पार से चल रहे हथियारों के किसी नेटवर्क के जरिए आई थी?

कुणाल की दो महीने पहले राधा (23) से दोस्ती हुई थी और उसने उसे पिस्तौल ले जाने को राजी कर लिया. 15 अक्तूबर को उसने सोनीपत की फैक्ट्री में काम करने वाली राधा और उसकी सहेली ब‌बिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ा.

दोनों ट्रेन से मुंबई पहुंचीं और दादर के एक लॉज में रुकीं. 17 अक्तूबर को एक नाबालिग उनसे एक बैग ले गया. गोलीबारी वाले दिन ही दोनों महिलाएं हरिद्वार एक्सप्रेस से दिल्ली लौट आईं. उन्हें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दबोच लिया गया. इसके बाद कुणाल और सुमित को भी सोनीपत में दबोचा गया. बताते हैं अनिल पंडित ने इस ऑपरेशन पर “लाखों रुपए” खर्च किए थे.

इस्तेमाल की गई पिस्तौलें फेंक दी गई थीं और अभी बरामद नहीं हुई हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को संदेह है कि संगठित अपराध के लिए सोनीपत एक भर्ती केंद्र बनकर उभर रहा है क्योंकि इस इलाके के कई लोग इस तरह के मामलों में कथित रूप से शामिल पाए गए हैं.

अंडरवर्ल्ड 2.0?
टाइगर श्रॉफ पर हमला मुंबई में बिश्नोई गैंग के पैर जमाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है, जहां कभी अंडरवर्ल्ड का राज चला करता था. लेकिन 1990 और 2000 के दशक में पुलिस के कई ‘एनकाउंटर’, अपराधियों के कॉर्पोरेट जैसा रुख अपनाने और रियल एस्टेट जैसे व्यवसायों में हाथ आजमाना शुरू करने आदि के कारण इस पर काबू पाने में मदद मिली (देखें-हिंसा का सिलसिला).

तो क्या मुंबई पुलिस बिश्नोई बंधुओं की कस्टडी मांगेगी? रौशन का कहना है कि मामला अदालत में है और पुलिस “कानूनी रास्ते और एसओपी का पालन करेगी.” केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के तहत जांच एजेंसियों को बिश्नोई बंधुओं को जेल से बाहर ले जाने पर रोक है.

लॉरेंस 2015 से हिरासत में है और अगस्त 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि अनमोल को 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था. वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है.

पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अविनाश धर्माधिकारी की मानें तो गैंग के सामने एक बड़ी बाधा है—दाऊद इब्राहिम, अरुण गवली और छोटा राजन सरीखे पुराने दौर के डॉन के विपरीत बिश्नोई के पास कोई मजबूत स्थानीय आधार नहीं है. वे कहते हैं, “उन लोगों के पास स्थानीय स्तर पर मददगारों का पूरा नेटवर्क था, जो बिश्नोई के पास नहीं है.”

डॉन के पुराने दौर के बाद से मुंबई की पुलिसिंग में काफी बदलाव आया है, जिसमें खुफिया जानकारी साझा करने की पुख्ता व्यवस्था, एजेंसियों के बीच तालमेल और टेक्नोलॉजी का ज्यादा प्रयोग है. ये उपाय अंडरवर्ल्ड को दूर रखने के लिए काफी होंगे?

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