दक्षिण में नया सवेरा

इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव में सियासत से लेकर संस्कृति तक के दिग्गजों  ने सियासी विभाजन, परिसीमन और विविधता सरीखे मुद्दों पर चर्चा की

india today Conclave 2026 South
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू और आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश

दक्षिण के पांच राज्य—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश—देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं. ये मिलकर भारत की जीडीपी में करीब एक-तिहाई योगदान देते हैं और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक तथा राजनीतिक विविधता के लिए भी जाने जाते हैं.

29 और 30 सितंबर को कोच्चि में आयोजित इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव में राजनीति, कारोबार, रक्षा, शिक्षा, सिनेमा, कला और संस्कृति से जुड़े दिग्गज एक मंच पर जुटे. इस दौरान देश के भविष्य में दक्षिण की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई.

कॉन्क्लेव का आगाज रक्षा क्षेत्र पर चर्चा से हुआ. एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, न्यूस्पेस रिसर्च ऐंड टेक्नोलॉजीज और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के विशेषज्ञों ने स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में दक्षिण के योगदान को रेखांकित किया. भारतीय तटरक्षक के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने एआइ के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर बात की.

राजनीतिक सत्रों में जाति जनगणना, आरक्षण, चुनाव सुधार, युवा राजनीति और धर्म तथा राजनीति के साथ-साथ परिसीमन के विवादास्पद मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कर्नाटक के मंत्री संतोष एस. लाड ने कहा कि राज्य में जाति जनगणना का काम पूरा होने के करीब है. वहीं भाजपा नेता अरविंद बेल्लाड ने ओबीसी आरक्षण का समर्थन किया.

आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग के तरीके का बचाव किया, तो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने आयोग पर जनता के भरोसे को लेकर अपने विचार रखे.

एआइएमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता पर बात की. वहीं, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने उन पूर्व कांग्रेसी नेताओं से फिर कांग्रेस में लौटने की अपील की, जो अब खुद की पार्टियों का नेतृत्व कर रहे हैं या भाजपा में हैं.

परिसीमन एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरा. केरल से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथेर ने कहा कि आबादी की दर को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के कारण दक्षिणी राज्यों का सियासी प्रतिनिधित्व घटना नहीं चाहिए.

आंध्र प्रदेश ने निवेश पर अपने जोर को रेखांकित किया और बताया कि पिछले दो वर्षों में वहां 14 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है.

कॉन्क्लेव में विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विमर्श से उभरी आवाजों और विचारों को अगले पन्नों में पेश किया जा रहा है.

Read more!