बारूद के ढेर पर बैठी बस्तियां

कौशांबी जिले की अवैध पटाखा फैक्ट्री में वि‍स्फोट से 14 लोगों की मौत. प्रदेश में जारी जानलेवा विस्फोटों की यह अगली कड़ी भर. आखिर कौन बिछा रहा बस्तियों में बारूद?

Special Report | Illegal
कौशांबी के महमूदपुर मनौरी गांव से लगे मजरे चिल्ला शाहबाजी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके से जमींदोज अपने मकान के मलबे पर खड़े शेषनारायण और उनकी पत्नी रानी

प्रयागराज और कौशांबी जिले की सीमा पर पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी गांव में दिल्ली-हावड़ा रेल रूट से सटे मजरा चिल्ला शाहबाजी में इन दिनों दहशत पसरी है. चारों तरफ पुलिस का पहरा है. पेड़ों पर धूल जमी है. टूटे हुए हाइटेंशन लाइन के टावर दूसरी जगह शिफ्ट करने का काम चल रहा है.

इसी खंभे के सामने मकानों के मलबे में 60 वर्षीय शेषनारायण और उनकी पत्नी रानी अपनी गृहस्थी का सामान तलाश रहे हैं. इस बुजुर्ग दंपती का मकान 31 अगस्त को धमाके की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था.

दोपहर करीब पौने 12 बजे हुआ यह धमाका शेषनारायण के घर के बगल में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से हुआ था. गनीमत थी कि तब शेषनारायण और उनकी पत्नी घर के बाहर खेत में काम कर रहे थे और दोनों बेटे नौकरी पर गए हुए थे.

करीब सवा घंटे तक लगातार होते रहे धमाकों की गूंज तीन किलोमीटर तक सुनाई पड़ी. आसपास का इलाका धुएं के गुबार में डूब गया. धुंधलका छंटने तक पटाखा फैक्ट्री के अगल-बगल के चार मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके थे. चपेट में आए 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

इनमें से कुछ के चीथड़े तक उड़ गए. धमाके की आवाज सुनकर 15 वर्षीय संजना भी घर की तरफ भागीं. वे कुछ सामान खरीदने आई थीं. धमाकों और धुएं के बीच वे बदहवास-सी दूर से ही अपने घर को लपटों से घिरा देखती रहीं.

धमाके कुछ थमे तो संजना क्षतिग्रस्त घर में घुसीं. सारा मंजर देखकर वे हक्का-बक्का थींः उनके पिता, मां और दोनों भाइयों की मौत हो चुकी थी. संजना बिलखकर रोने लगीं. उनकी टीशर्ट पर लिखा था, “नेवर लुक बैक.” लेकिन परिवार खो चुकीं संजना को अब आगे का रास्ता कौन दिखाएगा?

धमाके में पूरे परिवार को खोने वाली संजना

अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट की सूचना मिलते ही प्रयागराज और कौशांबी जिलों में हड़कंप मच गया. पुलिस और प्रशासन के आला अफसर मौके पर आ पहुंचे. दमकल की नौ गाड़ियां और तीन दर्जन फायरकर्मी रेस्क्यू अभियान में जुटे.

पांच घायलों को प्रयागराज के स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जिनमें से तीन की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई. अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में मरने वालों की कुल संख्या 14 पहुंच गई. 

घटना की जानकारी म‌िलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा. इसके बाद पिपरी थाना प्रभारी समेत कुल सात पुलिसकर्मियों, आठ लेखपालों और एक राजस्व निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया.

चकबंदी और अग्निशमन विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कौशांबी के जिलाधिकारी अमित पाल ने शासन को संस्तुति भेजी. पाल कहते हैं, “हर स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पक्की की जा रही है.”

यह घटना उस अवैध कारोबार का बड़ा नेटवर्क दिखाती है, जिसमें कच्चे माल की खरीद से लेकर पटाखों के निर्माण, भंडारण और दूसरे जिलों तक आपूर्ति का सिलसिला शामिल है. सवाल यह है कि बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का महीनों तक जमा होना स्थानीय प्रशासन और पुलिस की नजर से कैसे बचा रहा?

यह कारखाना चोरी-छिपे महमूदपुर मनौरी गांव का रहने वाला नौशाद अली चलाता था. विस्फोट के हादसे के अगले दिन पुलिस ने मुठभेड़ में नौशाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. नौशाद की पत्नी, बेटा और भाई को भी गिरफ्तार किया जा चुका है.

मनौरी गांव स्थित नौशाद के आलीशान मकान को अवैध घोषित कर बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया. जांच के दौरान पुलिस ने चिल्ला शाहबाजी और दो अन्य गांवों में नौशाद के गोदामों से 20 क्विंटल से ज्यादा बारूद और पटाखे बरामद किए.

स्थानीय लोग बताते हैं कि नौशाद पहले छोटा पटाखा कारोबारी था. वह पिता का पुश्तैनी धंधा संभालता था. धीरे-धीरे उसने कारोबार बढ़ाया और पटाखा निर्माण तक पहुंच गया. उसने कई स्थानों पर कच्चा माल और तैयार पटाखे रखने के लिए गोदाम बना लिए.

यानी अवैध कारोबार केवल एक परिसर तक सीमित न था, बल्कि इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर भंडारण की व्यवस्था भी तैयार की गई थी. अवैध पटाखा फैक्ट्री में हादसे के मुख्य आरोपियों में शामिल नौशाद के खिलाफ दो साल पहले भी गैरकानूनी ढंग से पटाखा फैक्ट्री चलाने के मामले में कार्रवाई हो चुकी है. 2024 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

आरोप है कि 2025 में दीपावली से पहले जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर पुराने कारोबार को चोरी-छिपे शुरू कर दिया. लोगों का कहना है कि नौशाद लंबे समय से अवैध पटाखे के कारोबार से जुड़ा था. वह बेटे अदील के नाम से धंधा करता था.

तैयार पटाखों की सप्लाइ कौशांबी के अलावा फतेहपुर, चित्रकूट और आसपास के दूसरे जिलों में भी किए जाने की बात सामने आई है. यानी कौशांबी विस्फोट ने जिस तस्वीर को सामने रखा है, उसमें एक फैक्ट्री से ज्यादा बड़ा नेटवर्क दिखाई देता है.

पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के साथ उठता धुएं का गुबार; पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार फैक्ट्री संचालक नौशाद अली

प्रयागराज में भारतीय वायु सेना की केंद्रीय वायु कमान के मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर हुए विस्फोट ने सुरक्षा और खुफिया प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मनौरी बाजार के व्यापारी राकेश मोदवाल कहते हैं, “दिल्ली-हावड़ा रेल रूट और मनौरी पावर सबस्टेशन के निकट महीनों से बारूद का यह अवैध जखीरा तैयार हो रहा था लेकिन रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और उसकी विशेष खुफिया शाखाओं को भनक तक न लगी.”

सवाल उठ रहा है कि आरपीएफ, जीआरपी और उनका इंटेलिजेंस नेटवर्क इस खतरनाक गतिविधि को समय रहते क्यों नहीं भांप पाया? रेलवे सुरक्षा तंत्र में पटरियों और पावर ग्रिड जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की 24 घंटे निगरानी के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं.

आरपीएफ की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच यानी सीआइबी और स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच यानी एसआइबी का मुख्य काम रेल संपत्ति और ट्रैक के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है. इसके बावजूद ट्रैक के ‘राइट ऑफ वे’ यानी बफर जोन से सटे चिल्ला शाहबाजी में टनों विस्फोटक सामग्री का भंडारण होता रहा.

मोदवाल कहते हैं, “यह केवल स्थानीय पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि आरपीएफ के गश्ती दलों की नियमित पैट्रोलिंग की भी पोल खोलती है. क्या ट्रैक किनारे होने वाली गश्त केवल कागजों पर दर्ज हो रही थी? या सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई थीं?

इसकी आंतरिक जांच होनी चाहिए.” विस्फोट से 132 केवी का भारी बिजली टावर उखड़ गया और वंदे भारत तथा जम्मू तवी एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें जहां-तहां रुक गईं. यह विस्फोट किसी यात्री ट्रेन के गुजरते समय होता तो नतीजा अकल्पनीय होता. 

असल में ब्रांडेड पटाखों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में आए उछाल का फायदा अवैध कारोबारी उठा रहे हैं. पुलिस-प्रशासन की निगाहों से बचकर दीपावली और शादी आयोजनों में खपत के लिए अवैध रूप से पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा है.

20 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले कौशांबी में पटाखा निर्माण और भंडारण का लाइसेंस महज एक संचालक को मिला है. वहीं 12 लोगों के पास स्थायी पटाखा बिक्री का लाइसेंस है. जिले के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध पटाखा निर्माण का अंदेशा जताया जा रहा है.

पटाखा बनाने के लिए एलई-1 लाइसेंस जरूरी है. उत्तर प्रदेश सरकार की सेवा सूची भी इसे अनिवार्य लाइसेंस बताती है. जिला स्तर की लाइसेंसिंग व्यवस्था में एलई-1 के तहत एक समय में अधिकतम 15 किलोग्राम तक आतिशबाजी या बारूद के निर्माण की अनुमति वाली श्रेणी है.

यूपी सरकार के नागरिक सेवा पोर्टल के अनुसार पटाखों से संबंधित लाइसेंस निर्माण, स्टोरेज, बिक्री और अस्थायी बिक्री के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं में जारी होते हैं. दिलचस्प बात यह है कि सीएसआइआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की ग्रीन-क्रैकर पंजीकृत निर्माताओं की सूची में यूपी की कई इकाइयां दर्ज हैं.

इनमें शामली, अमरोहा, सहारनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद और मेरठ की कई इकाइयां प्रमुख हैं. यानी यूपी का पटाखा निर्माण नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं लेकिन पश्चिमी यूपी इसका स्पष्ट केंद्र दिखाई देता है.

पर्यावरण विभाग के एक वैज्ञानिक बताते हैं, “यूपी में पटाखा बनाने का लाइसेंसी नेटवर्क पश्चिमी जिलों में केंद्रित है, लेकिन अवैध फैक्ट्रियों का भूगोल इससे अलग है. कौशांबी, लखनऊ, गोंडा, बरेली और फिरोजाबाद जैसे जिलों में हुए हादसे संकेत देते हैं कि अवैध उत्पादन लाइसेंसी क्लस्टर से बाहर फैल चुका है.” यही अंतर इस धंधे की सबसे बड़ी चुनौती है.

त्योहारों के नजदीक आते ही कौशांबी की घटना की दूसरे जिलों में पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सभी जिलों को अभियान चलाकर पटाखों के अवैध कारोबार को पकड़ने के आदेश दिए हैं. 7 सितंबर को कौशांबी विस्फोट की जांच के सिलसिले में प्रयागराज में एक पटाखा सप्लायर को गिरफ्तार किया गया.

इसके अलावा 8 सितंबर को नैनी के चकदोंदी इलाके में एक मकान में अवैध रूप से रखे करीब तीन क्विंटल पटाखे बरामद किए गए. पुलिस ने मकान मालिक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया. बलरामपुर के गोविंदबाग मोहल्ले की एक दुकान से करीब 400 किलो अवैध पटाखे बरामद हुए और पुलिस ने मोहम्मद रईस को गिरफ्तार किया.

एक अन्य कार्रवाई में दुकान और मकान से 120 किलोग्राम पटाखे बरामद कर 65 वर्षीय सगीर अहमद को गिरफ्तार किया गया. सितंबर के पहले हफ्ते में राज्य स्तर पर चल रहे अभियान में 17 गिरफ्तारियों और करीब 3,500 किलोग्राम पटाखा स्टॉक की जब्ती का दावा किया गया है.

लेकिन असल चुनौती उस सप्लाइ चेन को तोड़ने की है जो कच्चे माल से शुरू होकर तैयार पटाखों को बाजार तक पहुंचाती है. सप्लाइ चेन नष्ट नहीं होने से हर बार त्योहार के नजदीक आते ही पटाखों का अवैध कारोबार तेजी पकड़ लेता है.

“फायर वर्क्स डीलर वेलफेयर एसोसिएशन” के वरिष्ठ पदाधिकारी अंकुर शर्मा बताते हैं, “अवैध पटाखा इकाइयों में मुख्यतः ऑक्सीडाइजर, ईंधन, धातु पाउडर, बाइंडर, फ्यूज तथा कागज-कार्डबोर्ड जैसी सामग्री की जरूरत पड़ती है. इनकी खरीद और भंडारण की वैधता की जांच से अवैध फैक्ट्री की सप्लाइ चेन तक पहुंचा जा सकता है.” शर्मा के मुताबिक, अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में बारूद, गंधक, पोटाश, कोयला जैसे कच्चे माल का प्रयोग करके अनार, मेहताब और जमीन पर पटककर दगाने वाले पटाखे आमतौर पर बनाए जाते हैं.

ये ब्रांडेड कंपनियों के पटाखों की तुलना में आधे से कम दाम पर बेचे जाते हैं. शर्मा बताते हैं, “त्योहार के नजदीक आते ही अवैध पटाखों का स्टॉक जमा होता है. घटिया सामग्री और उचित ‘इंसुलेटर’ का प्रयोग न करने से गर्मी मिलते ही इनमें विस्फोट होता है.”

पता चला है कि अवैध पटाखे में इस्तेमाल रसायन हापुड़ के पिलखुवा से आया था. रसायन के रूप में पोटेशियम नाइट्रेट यानी कलमी शोरा का नाम सामने आया है. बताया जा रहा है कि पिलखुवा के एक सुनार के यहां से यह रसायन कौशांबी भेजा गया था. अब असली परीक्षा इस बात की है कि जांच इस अहम नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुंच पाती है या नहीं.

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