एक लैब जहां ढाली जाती हैं प्रतिभाएं
अपनी शानदार विरासत आगे बढ़ाते हुए आइआइटी, दिल्ली पढ़ाई को ज्यादा लचीला, रिसर्च को ज्यादा कोलैबरेटिव और इनोवेशन को उद्योग तथा समाज के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा

प्रोफेसर सोमनाथ बैद्य राय डीन, प्लानिंग, आइआइटी दिल्ली
भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान अब केवल कड़े अनुशासन वाली पढ़ाई तक सीमित नहीं. आज उनसे उम्मीद की जाती है कि ऐसे छात्र तैयार करें जो तकनीक में तेजी से आ रहे बदलावों को समझ सकें, विभिन्न विषयों को साथ जोड़कर काम करने में माहिर हों और दुनिया की जटिल समस्याएं सुलझा सकें.
आइआइटी, दिल्ली पूरी दक्षता के साथ इस बदलाव पर खरा उतर रहा है. सिर्फ अपनी पुरानी साख पर निर्भर रहने के बजाय, संस्थान खुद को नए सिरे से ढाल रहा है. इसके लिए पाठ्यक्रम लचीला बनाने, वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने, इंटरडिसिप्लिनरी (बहुविषयक) रिसर्च पर जोर देने और इनोवेशन, संवाद तथा छात्रों की सेहत और कल्याण पर भी खासा ध्यान दिया जा रहा है.
आइआइटी दिल्ली में डीन, प्लानिंग प्रोफेसर सोमनाथ बैद्य राय कहते है, “छात्र ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं. हमारा लक्ष्य देश-दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली युवाओं को अपने साथ जोड़ना और उन्हें रिसर्च, इनोवेशन तथा समाज के लिए भविष्य के लीडर के रूप में तैयार करना है.”
संस्थान की एक प्रमुख पहल ‘अलाइन’ है जो 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआइटी) के साथ मिलकर चलाई जा रही है. इसके तहत एनआइटी के मेधावी छात्र अपने स्नातक वर्ष का एक साल आइआइटी दिल्ली में बिता सकते हैं और फिर यहीं से पीजी और पीएचडी पूरी कर सकते हैं.
संस्थान अपनी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी भी लगातार बढ़ा रहा है. पेरिस की सोरबॉन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलॉजी में शुरू की गई नई ज्वाइंट डिग्री इसी दिशा में एक कदम है.
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और कई अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के साथ आइआइटी दिल्ली की पार्टनरशिप पहले से ही चल रही है. संस्थान ने यहां दाखिला लेने वाले विदेशी छात्रों की संख्या भी दोगुनी कर दी है, ताकि परिसर को ऐसा वैश्विक माहौल मिले जिसमें ज्वाइंट डिग्री, स्टूडेंट एक्सचेंज और ज्वाइंट रिसर्च हर छात्र के अनुभव का हिस्सा बन सके.
पूरे बदलाव के केंद्र में पाठ्यक्रम में किया गया सुधार ही है. अब स्नातक, एम.टेक और पीएचडी पाठ्यक्रमों में छात्रों को ज्यादा छूट मिलती है. छात्र आसानी से अलग-अलग विभागों के विषयों को चुन सकते हैं.
अपनी रुचि के अनुसार छोटे कोर्स कर सकते हैं और एक से ज्यादा विषयों को मिलाकर पढ़ाई कर सकते हैं. कॉग्निटिव साइंस में नया एम.टेक कार्यक्रम इसी सोच का बेहतरीन नमूना है, जहां न्यूरोसाइंस, बायोलॉजिकल साइंस, कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को एक साथ पढ़ाया जाता है.
पढ़ाई को सभी छात्रों के लिए आसान बनाने के लिए तकनीक की भी मदद ली जा रही है. मंथन पहल के तहत क्लासरूम लेक्चर्स को रिकॉर्ड करके विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवादित किया जा रहा है. इससे उन छात्रों को बहुत मदद मिल रही है जिनकी शुरुआती पढ़ाई अंग्रेजी में नहीं हुई है.
इससे वे कठिन से कठिन कॉन्सेप्ट भी मातृभाषा में आसानी से समझ सकते हैं. आने वाले समय में एआइ-आधारित अनुवाद के माध्यम से इस पहल को और विस्तारित किया जाएगा.
केवल तकनीकी जानकारी होना ही सब कुछ नहीं है, इस बात को समझकर ही आइआइटी दिल्ली ने टीचिंग-लर्निंग सेंटर और सेंटर फॉर एकेडमिक कम्युनिकेशन की शुरुआत की है.
ये केंद्र रिसर्च को सही ढंग से पेश करने और अपनी बात प्रभावी ढंग से एक बड़े वर्ग तक पहुंचाने में छात्रों की मदद करते हैं. इसके साथ, छात्रों की मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखना भी संस्थान की प्राथमिकता है.
एकेडमिक प्रोग्रेस ग्रुप पढ़ाई के मामले में छात्रों को व्यक्तिगत स्तर पर मदद देता है जबकि काउंसलर्स और अस्पतालों का विस्तृत नेटवर्क बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करते हैं.
प्रोफेसर राय कहते हैं, “हम छात्रों के जीवन से हर तरह का तनाव खत्म तो नहीं कर सकते मगर एक ऐसा मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूर तैयार कर सकते हैं जो हर चुनौती से उबरने में उनकी मदद करे.”
इनोवेशन सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं. स्नातक और एम.टेक छात्रों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप, पीएचडी छात्रों के लिए उद्योगों का सीधा अनुभव, सक्रिय टेक्निकल क्लब, मेकरस्पेस (साथ काम करने के लिए लैब).
और बेहतरीन तकनीकों से लैस सेंट्रल वर्कशॉप से छात्रों को अपने विचार वास्तविक मॉडल में बदलने की प्रेरणा मिलती है. सभी पहल मिलकर ऐसे इनोवेटर्स तैयार करने में आइआइटी की मदद कर रही हैं जो दुनिया में लीडर बनकर उभर सकें.