लीक से हटकर सीख
अपने छात्रों में निहित संभावनाओं को विस्तार देने के बहुमुखी तरीकों के चलते सिम्बायोसिस प्राइवेट एजुकेशन के क्षेत्र में भारत के सबसे अग्रणी संस्थानों में से एक बना.

सिम्बायोसिस में दुनिया भर से छात्र आते हैं (फोटो: मंदार देवधर)
पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में बॉटनी के प्रोफेसर रहे एस.बी. मजूमदार ने 1970 में शहर में पढ़ रहे विदेशी छात्रों से बातचीत करना और उनको होने वाली दिक्कतों के बारे में लिखना शुरू किया. जल्द ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए सिम्बायोसिस इंटरनेशनल कल्चरल सेंटर शुरू किया.
यह महसूस करते हुए कि ये प्रयास सीमित दायरे के हैं, मजूमदार ने शिक्षा के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया. शुरुआत उन्होंने गैर-अंग्रेजी भाषी देशों के छात्रों के लिए सिम्बायोसिस इंग्लिश लैंग्वेज टीचिंग इंस्टीट्यूट (एल्टिस) से की. इसके बाद 1977 में लॉ कॉलेज, 1978 में बिजनेस मैनेजमेंट संस्थान और आखिरकार कई और विषयों के कॉलेज शुरू हुए.
सिम्बायोसिस को 2002 में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. आज सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) एक बहु-विषयक संस्थान है, जिसके 45 संस्थान, 105 कोर्स और प्रोग्राम, 1,300 से ज्यादा फैकल्टी सदस्य और भारत तथा 85 दूसरे देशों से आए करीब 70,000 छात्र हैं.
देश में इसके छह कैंपस के अलावा दुबई में भी एक है. पुणे के बाहरी हिस्से की पहाड़ियों में स्थित विश्वविद्यालय का 400 एकड़ का लवाले कैंपस हिल बेस और हिल टॉप कैंपस में बंटा है और यहां 19,000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं.
सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की मौजूदा प्रो-चांसलर और मजूमदार की बेटी डॉ. विद्या येरवडेकर कहती हैं, “सिम्बायोसिस और दूसरे निजी विश्वविद्यालयों के बीच मुख्य फर्क यह है कि इसकी स्थापना एक शिक्षक ने की थी.” 2019 में सिम्बायोसिस देश का पहला निजी संस्थान बना, जिसने विशेष रूप से महिलाओं के लिए मेडिकल कॉलेज स्थापित किया.
सिम्बायोसिस मेडिकल कॉलेज फॉर विमेन देश में सबसे कम फीस लेने वाले संस्थानों में से एक है, सालाना 10 लाख रुपए, और यह 900 बेड वाले टीचिंग अस्पताल से जुड़ा है.
वाइस-चांसलर रामकृष्णन रमन कहते हैं, “हम रास्ता दिखाते हैं, दुनिया उसका अनुसरण करती है.” वे बताते हैं कि मजूमदार ने उस समय बिजनेस स्कूल शुरू किया, जब कम ही संस्थान इस दिशा में सोच रहे थे. रमन के मुताबिक, सिम्बायोसिस ने 2015 में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप कार्यक्रम शुरू किए, जब सरकार अब भी स्टार्टअप और उद्यमिता पर अपना रुख विकसित कर रही थी.
इसका एमबीए इन इनोवेशन ऐंड आंत्रप्रेन्योरशिप प्लेसमेंट नहीं देता, फिर भी सिर्फ 60 सीटों के लिए करीब 12,000 आवेदन आते हैं, उस दौर में जब एमबीए कार्यक्रमों को आम तौर पर उनके प्लेसमेंट रिकॉर्ड से आंका जाता है. रमन दावा करते हैं कि सीएक्सओ और वाइस-प्रेसिडेंट स्तर के हर चार कॉर्पोरेट लीडर्स में से एक सिम्बायोसिस का पूर्व छात्र है.
सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (एसआइबीएम) के प्रोफेसर और निदेशक श्रीरंग अल्टेकर कहते हैं कि संस्थान ने 100 से ज्यादा स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है. उनके मुताबिक, “हम चाहते हैं कि छात्र नौकरियां मांगने वाले नहीं बल्कि नौकरियां पैदा करने वाले बनें.” पाठ्यक्रम का करीब 80 फीसद हिस्सा फैकल्टी सदस्य पढ़ाते हैं, जबकि बाकी 20 फीसद इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स सिखाते-पढ़ाते हैं.
सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ डिजिटल ऐंड टेलीकॉम मैनेजमेंट (एसआइडीटीएम) के निदेशक अभिजीत चिरपुटकर कहते हैं कि मुख्य फोकस ऐसे इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सों पर है, जो गुणवत्ता का कोई न कोई पहलू जोड़ते हैं. मसलन, मैनेजमेंट कार्यक्रमों में दूसरे विषयों के क्रेडिट शामिल होते हैं.
विश्वविद्यालय के अकादमिक और एक्स्ट्राकरिकुलर इन्फ्रास्ट्रक्चर में रिसर्च सेल, बैडमिंटन और पिकलबॉल कोर्ट, जिम और ईट राइट सर्टिफिकेशन वाली डाइनिंग सुविधाएं शामिल हैं. छात्र जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल और बेल्जियम समेत यूरोप के साझेदार विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर एक्सचेंज, समर स्कूल और विंटर स्कूल में हिस्सा ले सकते हैं.
एसआइडीटीएम के दूसरे वर्ष के एमबीए छात्र के.आर. अरविंद कहते हैं, “यहां पढ़ाई सिर्फ अकादमिक चीजों तक सीमित नहीं. यह हमारे पूर्व छात्र नेटवर्क के जरिए सबसे नए ट्रेंड और टेक्नोलॉजी को भी जोड़ती है, ताकि हमें उद्योग के लिए तैयार किया जा सके.”
सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ बैंकिंग ऐंड फाइनेंस के एमबीए छात्र केविन गांधी कहते हैं कि दुनिया भर से आए छात्रों की मौजूदगी बहुसांस्कृतिक अनुभव देती है. एसआइएमसी में एमबीए इन कम्युनिकेशन मैनेजमेंट की छात्रा अविशी उपाध्याय कहती हैं कि सुविधाएं, संसाधन और फैकल्टी छात्रों को बढ़त देते हैं.
अभिनेता अमिताभ बच्चन फैकल्टी ऑफ मीडिया ऐंड कम्युनिकेशन में प्रोफेसर एमेरिटस हैं. पवन के. वर्मा, तलमीज अहमद और विजय गोखले जैसे पूर्व राजनयिक डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर हैं. ऑस्कर विजेता डॉक्युमेंट्री द एलिफेंट व्हिस्परर्स की टीम का हिस्सा रहे राघव खन्ना और गरिमा पुरा एसआइएमसी के छात्र रहे हैं.