पर्यटन के पथप्रदर्शक
इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2026 में राज्यों ने पर्यटन आकर्षणों में विविधता लाने और नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने का खाका पेश किया

गोवा में आयोजित इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2026 के दौरान विजेता प्रतिनिधियों के साथ (बैठे हुए, बाएं से पांचवें क्रम से) गोवा के मुख्यमंत्री, प्रमोद सावंत, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य
घरेलू पर्यटन जैसे-जैसे तेजी से बढ़ रहा है और विभिन्न राज्य अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की होड़ में हैं, भारत का पर्यटन क्षेत्र एक नए दौर में दाखिल हो रहा है. इसमें विकास और सस्टेनेबिलिटी के बीच संतुलन, पर्यटन स्थलों में विविधता लाने तथा पारंपरिक पर्यटन परिपथों से आगे बढ़ने पर जोर है. ये विषय 14 और 15 जून को गोवा में आयोजित इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2026 की चर्चाओं के केंद्र में रहे. इस मौके पर नीति-निर्माताओं, प्रशासकों और पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों ने भारतीय पर्यटन के भविष्य के लिए अपना नजरिया और अपनी योजनाओं को सामने रखा.
अपने मुख्य वक्तव्य में गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि राज्यों से वैश्विक मानकों के अनुरूप 50 नए प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास की योजना तैयार करने को कहा गया है. इससे देश के सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, ''हमने राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रूप से काम शुरू कर दिया है ताकि पर्यटन स्थलों से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों का समग्र समाधान करने के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट अथॉरिटीज की स्थापना की जा सके.''
भारत हर साल लगभग 2 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की मेजबानी करता है और देश की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 6 फीसद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप दीर्घकालिक लक्ष्य साल 2047 तक सालाना 10 करोड़ पर्यटकों की मेजबानी करना और जीडीपी में पर्यटन की हिस्सेदारी को 10 फीसद तक पहुंचाना है. शेखावत ने कहा कि यह लक्ष्य हासिल होने पर कृषि के बाद पर्यटन देश में रोजगार सृजन का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा. इस अवसर पर उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की मौजूदगी में 11 श्रेणियों में 23 राज्यों के प्रतिनिधियों को इंडिया टुडे टूरिज्म अवॉर्ड्स भी प्रदान किए.
अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि और गोवा के राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में गोवा सिर्फ समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध पर्यटन स्थल से आगे बढ़कर अनुभव-आधारित पर्यटन केंद्र बन गया है. उन्होंने कहा, ''अब लोग सिर्फ घूमने की जगहें नहीं, बल्कि ऐसे अनुभव चाहते हैं जो प्रामाणिक, सार्थक और यादगार हों. वे संस्कृति, प्रकृति, वेलनेस, सीखने और रोमांच का अनुभव चाहते हैं और गोवा में इन सभी को एक साथ उपलब्ध कराने की विशिष्ट क्षमता है.''
समिट में गोवा और राजस्थान सरीखे राज्यों ने अपनी पारंपरिक छवि से आगे बढ़ने की मंशा व्यक्त की. गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन खाउंटे ने कहा कि गोवा अब केवल अपने समुद्र तटों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि घरेलू-विदेशी पर्यटकों को अपने हरित ग्रामीण क्षेत्र, मंदिर, चर्च, खेल गतिविधियों और जीवंत सांस्कृतिक विरासत को भी दिखाना चाहता है. वहीं, राजस्थान की पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की सेक्रेटरी शुचि त्यागी ने बताया कि राजस्थान भी केवल किलों और महलों की जगह वाली छवि से आगे बढ़ रहा है. राज्य अब वन्यजीव पर्यटन, डेजर्ट सफारी, एस्ट्रो टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है.
महाराष्ट्र अपने प्राचीन जियोग्लिफ्स, समुद्र तटों, किलों और विश्व धरोहर स्थलों जैसे कम चर्चित आकर्षणों को सामने ला रहा है. मध्य प्रदेश पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में काम कर रहा है. तो, छत्तीसगढ़ आदिवासी और गैर-आदिवासी उत्सवों पर केंद्रित एक विशिष्ट पर्यटन मॉडल को बढ़ावा दे रहा है.
अगले पन्नों में देश के पर्यटन की नई तस्वीर गढ़ने वाले प्रमुख बिंदुओं, रणनीतियों और सफलता की कहानियों को पेश किया गया है. देश के 23 राज्यों को 11 श्रेणियों में इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स 2026 प्रदान किए गए.
जड़ों की ओर वापसी: पर्यटन के जरिए भारत की पुनर्खोज
गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा, ''आजकल, खासकर कोविड के बाद, जीवन को देखने का नजरिया बदला है. आज की पीढ़ी, खासकर 50 वर्ष से कम उम्र के लोग अनुभव-केंद्रित पर्यटन को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसलिए हमने पर्यटन में नए एवं अनूठे अनुभव विकसित करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहन एवं सहयोग देना शुरू किया है.''
''माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर के 50 नए पर्यटन स्थलों के विकास की परिकल्पना की है. यात्रियों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने के लिए हमने अब राज्यों के साथ सक्रिय रूप से काम शुरू किया है, ताकि पर्यटन और पर्यटकों से जुड़ी चुनौतियों के हल के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट अथॉरिटीज की स्थापना की जा सके.''
''बस्तर नया पर्यटन गंतव्य बनने जा रहा है. कभी इसकी पहचान बंदूकों, गोलियों और नक्सलवाद से होती थी. मगर, आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर आपने बस्तर नहीं देखा तो आपने भारत नहीं देखा. यह क्षेत्र इतना सुंदर और हराभरा है कि हर किसी को यहां आना चाहिए.''
भारत के समग्र गंतव्य के रूप में गोवा का उभार
पी. अशोक गजपति राजू, राज्यपाल, गोवा ने कहा, ''आज लोग ऐसे अनुभवों की तलाश में हैं जो प्रामाणिक, सार्थक और अविस्मरणीय हो. वे संस्कृति, प्रकृति, वेलनेस, सीखने के अवसर, रोमांच चाहते हैं. वे कहानियों की तलाश करते हैं. गोवा के पास इन सभी अनुभवों को एक साथ उपलब्ध कराने की विशिष्ट क्षमता है.''
गोवा राज्यपाल ने आगे कहा, ''आज के दौर में पर्यटकों को संरक्षण का साझेदार बनना होगा. उन्हें स्वच्छता का साझेदार, पर्यावरण संरक्षण का साझेदार और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का साझेदार बनना होगा.''
पी. अशोक गजपति राजू , राज्यपाल, गोवा
जुपल्ली कृष्णा राव, मद्यनिषेध एवं आबकारी; पर्यटन एवं संस्कृति और पुरातत्व मंत्री, तेलंगाना ने कहा, ''हमें लोगों में अवकाश और आनंद के लिए यात्रा करने की आदत विकसित करनी चाहिए. शुरुआत के तौर पर अगर लोग हर महीने कम-से-कम दो दिन यात्रा करें, तो यह काफी होगा''
जुपल्ली ने आगे कहा, ''पांच सदी से भी अधिक वक्त से हैदराबाद बहुलतावाद की जीवंत मिसाल है. सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ यहां विविध परंपराएं मौजूद हैं. हमारी गलियों में कदम रखते ही आपको तेलुगु, दक्कनी और अन्य भाषाएं एक साथ सुनाई देंगी.''
अपने राज्य को घरेलू और वैश्विक पर्यटन ब्रान्ड बनाने की राह
शुचि त्यागी, सचिव, पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान ने कहा, ''राजस्थान अब सिर्फ किलों और महलों की अपनी पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं है. साल 2025 की पर्यटन नीति के तहत राज्य सरकार वन्यजीव पर्यटन, डेजर्ट सफारी, एस्ट्रो-टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दे रही है. पर्यटकों को विविध अनुभव प्रदान करने के लिए नए टूरिज्म सर्किट भी विकसित किए जा रहे हैं.''
वहीं, शेरिंग थेंदुप भूटिया, वाणिज्य एवं उद्योग, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री, सिक्किम ने कहा कि पर्यटन सिक्किम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं, जिनमें प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग पर पाबंदियां और पर्यटक वाहनों में कचरा बैग रखना अनिवार्य करना शामिल है.'
समंदर किनारे रेत और धूप से आगे गोवा
दरअसल, रोहन खाउंटे ने इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे ऐंड अवार्ड्स की शुरुआत एक स्पष्टीकरण से की. उन्होंने कहा कि गोवा की 'सुसेगाद' संस्कृति का अर्थ आलस्य नहीं बल्कि सुकून से जीने की भावना है. उन्होंने गोवा सरकार की अहम प्राथमिकताओं को भी बताया.
उन्होंने बताया कि 2022 में प्रमोद सावंत सरकार बनने के बाद से गोवा की पहचान को समुद्र तटों से आगे ले जाने के प्रयास हो रहे हैं. उन्होंने कहा, ''हम पर्यटन के अन्य आयामों को विकसित कर रहे हैं. जैसे गांव, एडवेंचर, वेलनेस, खानपान अनुभव, विरासत और परंपराएं.'' उन्होंने कहा कि खेल पर्यटन भी नया उभरता क्षेत्र है. उनके मुताबिक, पर्यटकों के बदलते रुझान के साथ रणनीतिक बदलाव जरूरी है. उन्होंने कहा, ''गोवा आने वाला पर्यटक इसे अपना दूसरा घर मानने लगता है या फिर दोबारा लौटकर इसे और गहराई से जानना चाहता है.''
गोवा के पीले रंग के खूबसूरत पुर्तगाली शैली के विला पहले ही दुनिया भर के यात्रियों की स्मृतियों का हिस्सा हैं. खाउंटे चाहते हैं कि पर्यटक कई अन्य यादगार छवियां भी साथ ले जाएं. उनकी अहम पहलों में महिला सशक्तीकरण पर जोर के साथ होमस्टे नीति, ग्रामीण एवं आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन शामिल है. इसके तहत 11 मंदिरों को प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित किया जा रहा है.
'अतिथि देवो भव:' की भावना को कर रहे साकार
टिमोथी डी. शिरा, कृषि एवं किसान कल्याण, फिशरीज एवं पर्यटन मंत्री, मेघालय ने कहा कि मेघालय में कई सुंदर प्राकृतिक स्थल हैं. मगर बेहतर संपर्क के अभाव और अन्य कारकों की वजह से यह लंबे समय तक पसंदीदा पर्यटन स्थलों में अपनी जगह नहीं बना पाया था.
पसंगा दोरजी सोना, शिक्षा, ग्रामीण कार्य, संसदीय मामले, पर्यटन एवं पुस्तकालय मंत्री, अरुणाचल प्रदेश
''पर्यटकों की संख्या को संभालना दोधारी तलवार की तरह है. अगर हमारा पूरा ध्यान केवल पाबंदियां लगाने पर रहेगा, तो पर्यटन से होने वाली आय और इस क्षेत्र पर निर्भर लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है.''
शेरिंग थेंदुप भूटिया, वाणिज्य एवं उद्योग, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री, सिक्किम ने कहा कि अतिथि देवो भव:' भावना की शुरुआत ग्रामीण पर्यटन से होती है. आतिथ्य-सत्कार हमारे स्वभाव का अभिन्न हिस्सा है. स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से पर्यटन क्षेत्र में सिक्किम को सफलता मिली.
अनदेखा भारत: उभरते हुए स्थल किस तरह घरेलू पर्यटन को दे रहे विस्तार
विवेक आचार्य, एमडी, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन-केंद्रित बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश कर रहा है, आदिवासी युवाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर रहा है और ग्लास ब्रिज, पानी से जुड़ी गतिविधियों और इको-टूरिज्म सर्किट सरीखी रोमांचक पर्यटन चीजें विकसित कर रहा है.
प्रमोद जी. कृष्णन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, केरल ने कहा कि पूर्व शिकारियों और जंगलों पर निर्भर समुदायों को संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा गया है. इससे एक ओर तो उनकी आजीविका के नए अवसर तैयार हुए हैं, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिली है.
दीपांकर मोहापात्र, निदेशक, ओडिशा पर्यटन ने कहा कि ओडिशा अब केवल पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर के पारंपरिक 'गोल्डन ट्रायंगल' तक सीमित नहीं रहना चाहता. राज्य अपनी 574 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, राष्ट्रीय उद्यानों, पर्वतीय स्थलों और बौद्ध विरासत स्थलों को भी प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित कर रहा है.'
चंद्रशेखर जायसवाल, जीएम, महाराष्ट्र पर्यटन विकास कॉर्पोरेशन ने कहा कि महाराष्ट्रपर्यटन की दृष्टि से सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है, चाहे वह आधुनिक धरोहर हो, प्राचीन विरासत हो या विश्व धरोहर स्थल...अब हमारा ध्यान गहन अनुभव वाले पर्यटन की ओर है...यह बदलाव 'अनदेखे महाराष्ट्र' को पर्यटकों के सामने लाने की दिशा में एक नई पहल है.
भारत के पर्यटन और आतिथ्य की नई परिकल्पना
पुनीत चटवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से निवेश किया गया हर रुपया अर्थव्यवस्था में लगभग 3.2 से 3.3 रुपए का आर्थिक प्रतिफल उत्पन्न करता है.'
उनके मुताबिक, ''फिलहाल भारत के पर्यटन क्षेत्र का आधार मूल्य लगभग 250 अरब डॉलर है. इसके साल 2047 तक बढ़कर 3 लाख करोड़ डॉलर के आर्थिक योगदान वाले एक सशक्त क्षेत्र बनने का अनुमान है.''
बुला रहा गोवा का जादू
संदीप जैक्स, पर्यटन आयुक्त सह सचिव, गोवा ने कहा कि मॉनसून के दौरान गोवा हमें पर्यटन का एक अहम सबक सिखाता है: पर्यटन स्थलों पर केवल घूमने नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह अनुभव करने के लिए जाना चाहिए.
''अगुआड़ा जेल का पुन: उपयोग और डोना पाउला जैसे स्थलों के पुनर्विकास सरीखी परियोजनाएं विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटकों को अनुभव को बेहतर बनाने की हमारी व्यापक सोच को दर्शाती हैं.''