भरोसा तो है लेकिन बेचैनी भी कायम

ज्यादातर लोगों की राय में यह सही है लेकिन इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानने वालों की संख्या भी कम नहीं.

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कोलकाता में 4 नवंबर 2025 को मतदाता सूची पुनरीक्षण के विरोध में रैली

भारतीय लोकतंत्र ऐसा विषय है जिस पर लगातार बहस होती है. आज भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है? क्या चुनाव स्वतंत्र 
और निष्पक्ष होते हैं? क्या लोग बिना डर के अपनी राय जाहिर करते हैं?

इनके जवाब लोकतांत्रिक बैरोमीटर का काम करते हैं, वे न केवल भरोसा या बेचैनी दर्शाते हैं बल्कि सभी संस्थाओं और प्रक्रियाओं में ताकत और जवाबदेही, नियमन और आजादी के स्तर की भी थाह देते हैं.

प्र. विपक्षी दलों ने विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के मतदाता सूची के पुनरीक्षण को गलत बताते हुए प्रदर्शन किए हैं. क्या आप मानते हैं कि मतदता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया राजनैतिक पूर्वाग्रह से मुक्त है?

ज्यादातर लोगों की राय में यह सही है लेकिन इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानने वालों की संख्या भी कम नहीं. इसके चलते मतदाता सूची लोकतांत्रिक टकराव की वजह बन गई है.

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