मायावी संजय
गाजीपुर जिले के मूल निवासी संजय राय शेरपुरिया ने नेताओं और अधिकारियों से करीबी दिखाकर जालसाजी का नेटवर्क तैयार किया. उद्योगपति से रकम ऐंठने के बाद खुला मामला

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा ब्रांच ने 18 अप्रैल को जब नोएडा के सेक्टर 107 निवासी मोहम्मद कासिफ नाम के एक ठग को पकड़ा तो उसे अंदाजा नहीं था कि यह गिरफ्तारी उसे एक महाठग तक पहुंचा देगी. कासिफ ने फोटो एडिट के जरिए अपने साथ पीएम नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं की फोटो लगाकर ठगी का जाल बिछा रखा था. वह कथित तौर पर संजय प्रकाश बालेश्वर राय उर्फ संजय राय शेरपुरिया के एजेंट के तौर पर काम करता था. उससे संजय के बारे में जानकारी मिलते ही एसटीएफ सतर्क हो गई.
एसटीएफ ने संजय के बारे में चुपचाप गहन जांच शुरू की तो पता चला कि वह सत्ताधारी शीर्ष नेताओं के साथ अपनी फोटो का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लेकर उगाही करता है. इसी मंशा से कासिफ लोगों को ठेका दिलाने, ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने और जांच वगैरह रफा-दफा कराने का झांसा देकर संजय से मिलवाता था और वह उन लोगों से डील फाइनल करता था. दिल्ली के उद्योगपति गौरव डालमिया से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच निबटवाने के लिए संजय ने छह करोड़ रुपए लिए थे. संजय की संस्था 'यूथ रूरल आंत्रेप्रेन्योर फाउंडेशन' (वाइआरईएफ) के खाते में पहली बार 21 जनवरी, 2023 को पांच करोड़ रुपए और दूसरी बार 23 जनवरी, 2023 को डालमिया फैमिली ऑफिस ट्रस्ट के खाते से एक करोड़ रुपए ऑनलाइन भेजे गए थे.
पर छह करोड़ रुपए एकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर कराने की चूक ने संजय का सारा राज खोल दिया. उसके एनजीओ के खाते में ऑनलाइन बड़ी रकम पहुंचने की जांच ईडी और दूसरी केंद्रीय जांच एजेंसियां तो कर ही रहीं थीं, वहीं एसटीएफ ने कासिफ से मिली जानकारी के बाद महाठग संजय की कई लोगों से धोखाधड़ी कर धन उगाही के सिरे जोड़ लिए थे. कासिफ की गिरफ्तारी के एक हफ्ते बाद एसटीएफ ने 25 अप्रैल को सुहेलदेव एक्सप्रेस से दिल्ली से गाजीपुर जाते वक्त कानपुर रेलवे स्टेशन से संजय को गिरफ्तार किया. उसी दिन शाम को एसटीएफ के इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने लखनऊ के विभूतिखंड थाने में संजय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें प्रधानमंत्री समेत कई बड़ी हस्तियों के साथ अपनी फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों से ठगी, सरकार और बड़े अधिकारियों तक अपनी पहुंच बताकर धन उगाही करने, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया गया.
महाठग संजय का असली नाम संजय प्रकाश बालेश्वर राय है. उसके पिता मूल रूप से गाजीपुर की मुहम्मदाबाद तहसील के शेरपुर गांव के रहने वाले थे जो बाद में असम में बस गए थे. पिता परचून की दुकान चलाते थे. परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण संजय ने केवल दसवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की. इसके बाद कुछ वर्ष मुंबई में नौकरी की तलाश में बिताने के बाद वह गुजरात चला गया. वहां एक रिफाइनरी में 15,500 रुपए महीने की तनख्वाह पर सिक्युरिटी सुपरवाइजर की नौकरी की. गाजीपुर में संजय के परिवार को जानने वाले एक वकील अमन राय बताते हैं, ''संजय ने पहले बैंक से लोन लेकर फुटपाथ पर सामान बेचना शुरू किया. इसके बाद किराए की दुकान लेकर थोक व्यापार शुरू किया और यहां से वह पेट्रोलियम के धंधे से जुड़ा, जहां उसकी पहचान कई प्रभावशाली लोगों से हुई.''
संजय ने प्रभावशाली लोगों तक अपनी पहुंच बनाई और लोगों के काम करवाने के एवज में मोटी रकम ऐंठनी शुरू की. देखते-देखते संजय अरबों की संपत्ति का मालिक बन बैठा. अपने धंधे को आगे बढ़ाने के लिए उसने भारतीय स्टेट बैंक से 349 करोड़ रुपए का ऋण भी लिया और शुरुआती कुछ किस्तें जमा करने के बाद शांत बैठ गया. इसके बाद बैंक ने संजय को डिफॉल्टर घोषित कर दिया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में संजय ने गाजीपुर के तत्कालीन सांसद और अभी जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का चुनाव प्रचार किया. चुनाव में सिन्हा की हार के बाद संजय गाजीपुर जिले में सक्रिय हुआ. यहां पर उसने अपने एनजीओ वाइआरईएफ का दफ्तर खोल कर युवाओं को जोड़ना शुरू किया. संजय ने गाजीपुर में इस एनजीओ के नाम से 20 बीघे में फार्म हाउस बना रखा है.
एसटीएफ को जांच में फाउंडेशन के सलाहकार बोर्ड के सदस्यों के नाम भी पता चले हैं जिसमें आइएएस, आइपीएस और सेना के कई रिटायर्ड अफसर शामिल हैं. इस एनजीओ के जरिए करीब 50,000 युवाओं से ठगी करने की बात सामने आई है. एसटीएफ के इंस्पेक्टर सचिन कुमार के मुताबिक, संजय ने अपने एनजीओ में डमी डायरेक्टर दिखाया और खुद कोई पद नहीं लिया जबकि सोशल मीडिया पर वह खुद को इस एनजीओ का मुख्य कर्ताधर्ता बताता था. ऐसा इसलिए कि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर एनजीओ से पल्ला झाड़ कर बचा जा सके.
युवाओं में भोजपुरी गायक बालेश्वर यादव के क्रेज को देखते हुए संजय ने अपने नाम में बालेश्वर भी जोड़ा और संजय प्रकाश बालेश्वर राय कहलाने लगा. बाद में अपने पैतृक गांव शेरपुर से नाता जाहिर करने के लिए नाम के आगे 'शेरपुरिया' उपनाम लगाने लगा. गाजीपुर की भूमिहार जाति से ताल्लुक रखने वाला संजय सत्तारूढ़ भाजपा से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था. इसीलिए उसने अपनी संस्था का स्लोगन 'स्वरोजगार से आत्मनिर्भर गाजीपुर बनाने का लक्ष्य' रखा था. बड़ी आबादी के गांवों में शुमार अपने पैतृक गांव शेरपुर कलां में गंगा का कटान रोकने के लिए उसने गांव से लेकर तहसील तक तिरंगा यात्रा निकाली थी. गांव में वॉलीबाल का टूर्नामेंट भी कराया था, जिसमें कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे.
मुहम्मदाबाद तहसील में लंबे समय से स्टांप बेचने वाले शेरपुर कलां निवासी राजेश सिंह बताते हैं, ''संजय राय ने ठगी की कमाई से गाजीपुर में पानी की तरह पैसा बहाया. कोरोना काल में वह अचानक प्रकट हुआ और ऑक्सीजन सिलेंडर, कंसंट्रेटर और एम्बुलेंस से लेकर बिना अंतिम संस्कार के गंगा में प्रवाहित किए जा रहे शवों के लिए लकड़ी बैंक का इंतजाम किया. ऐसे कार्यों से उसने लोगों का भरोसा जीता.''
जालसाज संजय ने दिल्ली में पीएम आवास के पास स्थित राइडिंग क्लब पर कब्जा करके आलीशान ऑफिस बनवाया था. संजय के फोटो एल्बम में देश के बड़े नेताओं और अधिकारियों के साथ उसकी फोटो है. जांच एजेंसियों ने दफ्तर को खाली कराकर वहां मौजूद सारा सामान और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को अपने कब्जे में ले लिया है. वाइआरईएफ के अलावा पांच ऐसी कंपनियों का ब्योरा जांच एजेंसियों के हाथ लगा है जिसमें संजय के अलावा उसकी पत्नी कंचन निदेशक है (देखें बॉक्स). इनमें से चार कंपनियां गुजरात तो एक कंपनी महाराष्ट्र में रजिस्टर कराई गई है. जांच एजेंसियों को इन कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपए इधर-उधर किए जाने की जानकारी मिली है. इसके अलावा, संजय की बहुत सारी फर्जी कंपनियों के बारे में भी पता चला है जिनके अधिकारियों का कोई अता-पता नहीं है.
जालसाजी के सिरे तलाशने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने 1 मई को संजय के दिल्ली स्थित आवास और दफ्तर के अलावा लखनऊ, गाजीपुर और वाराणसी स्थित ठिकानों पर छापा मारा. गोपनीय ढंग से मारे गए छापे के जरिए जांच एजेंसी महाठग के पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की जुगत में है.
कंपनियों के जरिए हेराफेरी
कांडला एनर्जी ऐंड केमिकल लिमिटेड: 7 मार्च, 2005 को गुजरात में रजिस्टर्ड कराई गई. संजय प्रकाश बालेश्वर राय उर्फ संजय शेरपुरिया और उसकी पत्नी कंचन संजय प्रकाश राय निदेशक हैं. इस कंपनी के जरिए केमिकल उत्पाद बनाकर बेचे जाते थे
कच्छ इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी का पंजीकरण 5 मई, 2009 को कराया गया. इसमें संजय और उसकी पत्नी कंचन संजय प्रकाश राय निदेशक हैं. यह कमीशन एजेंट और कमोडिटी ब्रोकर के जरिए व्यापार कर रही है
काशी फार्म फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड: अहमदाबाद में 28 सितंबर, 2010 को रजिस्टर्ड कराई गई. खाद्य उत्पादों के व्यापार से जुड़ी इस कंपनी में संजय और उसकी पत्नी कंचन के अलावा दो अन्य डायरेक्टर सुनील धर्मदास और राजेश राय भी हैं
कांडला इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड: गोरेगांव, ईस्ट मुंबई में स्थापित यह कंपनी 14 जून, 2011 को रजिस्टर्ड कराई गई. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़े व्यापार में शामिल इस कंपनी में संजय राय के साथ प्रकाश खंडेलवाल निदेशक हैं
राय कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड: अहमदाबाद में 25 सितंबर, 2012 को रजिस्टर्ड कराई गई. यह वित्तीय मध्यस्थता से जुड़े व्यापार को संचालित करती है. संजय और उसकी पत्नी कंचन संजय प्रकाश राय इस कंपनी के डायरेक्टर हैं