मध्यम वजन का दावेदार
4.5 जेनरेशन एलसीए-एमके2 का बेहतरीन इंजन हवा में ज्यादा देर तक उड़ने की क्षमता देगा और गहरी पैठ करने वाले आक्रामक अभियानों के लिए अधिक भारी हथियार—स्पाइस-2000 बम और स्कैल्प, क्रिस्टल मेज और ब्रह्मोस मिसाइल—ढोने की क्षमता प्रदान करेगा

तेजस एमके2 फाइटर जेट
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टकराव बिंदुओं के करीब चीन की पीएलए के लड़ाकू जहाजों के उड़ान भरने के बमुश्किल एक महीने बाद, सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस के एक उन्नत संस्करण के विकास को तेज गति देने के लिए 6,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड मंजूर किया.
तेजस एमके-2 अधिक शक्तिशाली जीई-414 इंजनों का उपयोग करेगा जो लड़ाकू विमान को भारी 'मिसाइलों और बमों जैसे हथियारों' के वजन के साथ हवा में ज्यादा वक्त तक उड़ने की ताकत देंगे. एमके-1 संस्करण के 13,500 किलो की तुलना में एमके-2 मध्यम-वजन वाला लड़ाकू जहाज होगा जो 17,500 किलो के अधिकतम वजन के साथ टेक ऑफ कर सकता है. एमके-2 को एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) विकसित कर रही है जिसका कहना है कि जहाज के अहम डिजाइन और ड्रॉइंग तैयार हैं.
पहला प्रोटोटाइप डिजाइन अगस्त 2022 में शुरू होना था, पर नई कट-ऑफ तारीख साल के अंत की है. एडीए के अनुसार, पहला प्रोटोटाइप 2024 तक उड़ान भरेगा और उत्पादन 2027 तक शुरू होगा. हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारतीय वायु सेना के लिए जहाजों का निर्माण करेगा. सब तय योजना के मुताबिक हुआ तो एमके-2 वायु सेना के पुराने हो रहे 16 लड़ाकू जेट स्क्वाड्रनों की जगह लेगा और भविष्य में सुखोई तथा राफेल जेट का पूरक बनेगा.
सीसीएस ने 2008 में जब इस परियोजना को मंजूरी दी थी, तब एलसीए एमके-2 को हल्के श्रेणी के जहाज के रूप में ही विकसित किया जाना था. इसके बाद, इसके डेवलपर्स और वायु सेना ने अपनी कई अन्य जरूरतें बताया और 2017 तक यह मध्यम वजन का लड़ाकू जहाज बन गया. 2,800 करोड़ रुपए का प्रारंभिक स्वीकृत बजट अपर्याप्त हो गया और चार प्रोटोटाइप बनाने तथा एवियोनिक्स, रडार और एक प्रारंभिक चेतावनी इकाई जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम के विकास के लिए 6,500 करोड़ रुपए का नया फंड डाला गया है. हथियारों से लैस होने के बाद, उड़ान परीक्षण और नई प्रणालियों को अंतिम रूप दिया गया. सूत्रों के मुताबिक, तेजस एलसीए एमके-1 में 60 फीसद से भी कम स्वदेशी पुर्जे लगे हैं, जबकि एमके-2 में करीब 75 फीसद पुर्जे स्वदेशी हो सकते हैं.
केंद्र 15,000 करोड़ रुपए के अनुमानित बजट के साथ पांचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम को भी हरी झंडी देने की सोच रहा है. एमएमसीए में रडार को चकमा देने की क्षमता और सुपरक्रूज जैसी खूबियां होंगी. यह भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह (अमेरिका, रूस और चीन) में शामिल कर सकता है जिनके पास ऐसी क्षमताएं हैं.
वायु सेना ने एचएएल को 83 एमके-1ए के लिए 48,000 करोड़ रु. का ऑर्डर दिया है और भविष्य में एमके-2 के छह स्क्वाड्रन को शामिल करने की उम्मीद कर रही है. एचएएल का कहना है कि वह 2024 तक पहले एमके-1ए जहाजों की डिलिवरी और 2029 तक सभी 83 जहाजों का ऑर्डर पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
-प्रदीप आर. सागर