माहौल बिगाड़ने की साजिश
पुलिस के सामने कानपुर बवाल के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती है कि उसकी कार्रवाई निष्पक्ष और न्यायपूर्ण है

कानपुर देहात में 3 जून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रोटोकाल तोड़कर अपने पैतृक गांव परौंख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. आजादी का अमृत महोत्सव की शृंखला में मेरा गांव-मेरा अभियान के तहत परौंख में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे. कार्यक्रम के शुरू होने से कुछ समय पहले यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर कानपुर शहर में ग्रीन पार्क स्टेडियम के पास नई सड़क का इलाका भारी बवाल की जद में आ गया. भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादास्पद बयान के विरोध में एक समुदाय के लोग जुमे की नमाज के बाद दोपहर करीब ढाई बजे नई सड़क इलाके में जबरन दुकानें बंद कराते हुए दूसरे समुदाय के चंद्रशेखर हाते में दाखिल हो गए. दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए और दोनों ओर से पत्थरबाजी होने लगी. बवाल बढ़ता हुआ दादामियां चौराहे तक पहुंच गया.
एक ओर से फायरिंग हुई और पेट्रोल बम भी फेंके गए. पुलिस को बवाल थामने में पांच घंटे से अधिक लग गए. इसमें 30 से अधिक लोग घायल हो गए. स्थिति को संभालने के लिए शासन को 12 कंपनी पीएसी तैनात करनी पड़ी और आइपीएस अफसर अजय पाल शर्मा को विशेष रूप से कानपुर भेजा गया. इसमें 40 नामजद समेत एक हजार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई. अब तक 70 उपद्रवी गिरफ्तार किए गए हैं. कानपुर पुलिस ने 40 उपद्रवियों के पोस्टर जगह-जगह चस्पां किए हैं.
इस बवाल में पुलिस और खुफिया एजेंसियां बुरी तरह गच्चा खा गईं. कानपुर में सवा साल पहले पुलिस कमिशनरी सिस्टम लागू होने के बाद यहां पर 10 आइपीएस अफसर, छह एएसपी और नौ डीएसपी की तैनाती की गई थी. अफसरों की इतनी बड़ी फौज को भी बवाल की पहले से भनक न लगी. नई सड़क पर रहने वाले व्यवसायी रतन शर्मा बताते हैं, ''तीन दिन नई सड़क पर पहले बाजार बंदी को लेकर पर्चे बांटे जा रहे थे. पर खुफिया एजेंसी इस बात को भांपने में विफल रही कि इसकी आड़ में बवाल की योजना बनाई जा रही है.'' नई सड़क पर जब बवाल की शुरुआत हुई तो पास की सद्भावना चौकी पर महज आठ से 10 सिपाही, तीन दारोगा और एक एसीपी ही मौजूद थे. उपद्रवियों का हुजूम आते ही पथराव शुरू हुआ तो कई पुलिसकर्मी भी भाग खड़े हुए. दोपहर ढाई बजे के बाद पर्याप्त फोर्स पहुंचने के बाद पुलिस ने जवाब देना शुरू किया. कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री को विदा करने के बाद योगी ने पुलिस अधिकारियों को सख्ती से निबटने का आदेश दिया. कानपुर पुलिस कमिशनर विजय सिंह मीणा ने मामले की जांच के लिए चार स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) का गठन किया, वहीं ऐंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने भी मामले की पड़ताल शुरू की.
कानपुर पुलिस ने 350 सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की और हिरासत में लिए गए उपद्रवियों से पूछताछ की तो हिंसा की साजिश रचने में हयात जफर हाशमी का नाम सामने आया. सोशल मीडिया पर हाशमी के कई वीडियो की जांच की गई जिनमें वह भड़काऊ भाषण देता नजर आ रहा है. इसी तरह पुलिस को उसके नाम से कई बैनर, पोस्टर और पर्चे भी मिले जिसका वह बाजार बंद के प्रचार-प्रसार में उपयोग कर रहा था. नई सड़क पर बवाल के बाद 3 जून की देर शाम हाशमी अपने कुछ साथियों के साथ लखनऊ आ गया. लखनऊ के हजरतगंज में पांडेय भवन में जावेद अहमद खान एशियन वाइस न्यूज नाम से यूट्यूब चैनल चलाता है. सभी आरोपी इसी चैनल के दफ्तर में आकर छिप गए.
पड़ताल में जुटी पुलिस को कानपुर-लखनऊ नेशनल हाइवे पर स्थित टोल प्लाजा से आरोपियों के लखनऊ जाने का पता चला. आरोपी ने अपने मोबाइल तो बंद कर लिए थे, पर वे एक अन्य नंबर से एक शख्स से संपर्क कर बचने की रणनीति बना रहे थे. सर्विलांस के जरिए पुलिस टीम पांडेय भवन पर पहुंची और हाशमी के साथ जावेद खान, मोहम्मद साहिल और मोहम्मद सूफियान को गिरफ्तार किया. पुलिस का दावा है कि कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हाशमी के पास से 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' (पीएफआइ) समेत चार संस्थाओं के कई दस्तावेज मिले हैं. पुलिस कमिशनर मीणा बताते हैं, ''मुख्य साजिशकर्ता हयात जफर हाशमी एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन का अध्यक्ष है. इसी तरह बाजार बंदी का आह्वान कर बंगाल और मणिपुर में भी बवाल किया गया था जिसमें पीएफआइ का हाथ सामने आया था.
कानपुर की घटना को भी उसी तर्ज पर जोड़कर देखा जा रहा है.'' हाशमी की पत्नी जारा हयात पुलिस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती हैं. वे कहती हैं, ''जुमे के दिन बंदी का आह्वान अगर एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन ने किया था तो पुलिस प्रशासन के कहने पर इसे वापस भी ले लिया था. हयात को जानने वालों को मालूम है कि उनकी मुसलमानों से ज्यादा हिंदू समाज में पहचान है. इसके बावजूद उन्हें नकारात्मक रूप में पेश किया जा रहा है.'' हाशमी और उसके साथियों ने कानपुर के ब्रह्मनगर स्थित रोमा ग्राफिक्स प्रिंटिंग प्रेस से बंदी के आह्वान के पर्चे और पोस्टर छपवाए थे. पुलिस ने प्रेस मालिक शंकर कुमार को नियमविरुद्ध पर्चे छापने के आरोप में हिरासत में लिया है.
हाशमी के मोबाइल की जांच करने पर पुलिस को कुल 141 व्हाट्सऐप ग्रुप मिले हैं. सभी ग्रुप में नई सड़क पर बवाल की बातचीत और वीडियो हैं. इनमें हिंसा के दिन का पल-पल का अपडेट दिया जा रहा था. कई ग्रुप में जारा हयात भी खासा सक्रिय थीं. साजिशकर्ता हाशमी का आपराधिक इतिहास है. दिसंबर, 2019 में कानपुर में सीएए के विरोध में हिंसा हुई थी जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और पुलिसकर्मियों समेत 50 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस हिंसा में भी हाशमी का नाम साजिशकर्ता के तौर पर सामने आया था. पुलिस ने उसको आरोपी बनाया, पर कोई कार्रवाई नहीं की. पिछले वर्ष प्रतिबंध के बावजूद जुलूस निकाल कर उसने पुलिस को खुली चुनौती दी थी. उस पर कानपुर के चमनगंज, बेकनगंज और कर्नलगंज थानों की पुलिस मेहरबान रही. यही वजह है कि वह मुकदमा दर्ज होने के बाद भी हर बार बच निकलता था. कानपुर के जॉइंट पुलिस कमिशनर आनंद प्रकाश तिवारी कहते हैं, ''अभी तक हयात जफर हाशमी पर पुलिस ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? इसकी जांच कराई जाएगी.''
नई सड़़क पर बवाल के आरोपी तीन पीएफआइ सदस्य—मोहम्मद नसीम, मोहम्मद उमर और सैफुल्ला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस कमिशनर मीणा बताते हैं, ''तीनों पीएफआइ सदस्य हयात जफर के संपर्क में थे. बाजार बंदी और बवाल को लेकर आपस में बातचीत कर रहे थे जिसके इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं.'' पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस नेटवर्क को पकड़ने की है जिसके जरिए हाशमी के संगठन को फंडिंग हो रही थी. कानपुर में मौजूद एटीएस की टीम एबीटी (अंसारउल्ला बांग्ला टीम) कनेक्शन को भी खंगाल रही है.
लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं. कानपुर शहर काजी हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी कहते हैं, ''पुलिस एक ही पक्ष के लोगों को गिरफ्तार कर रही है. मुसलमानों ने जुलूस निकाल कर गलती की है लेकिन पत्थर किसी दूसरे ने चलाए थे. गलती दोनों पक्षों की है. अब मुस्लिम पक्षों के घरों पर बुलडोजर चलाने की बात कही जा रही है. अगर ऐसा हुआ तो कफन बांध कर सड़क पर उतरेंगे लेकिन कानून नहीं तोड़ेंगे.'' शहर काजी के बयान पर पुलिस कमिशनर अपना पक्ष रखते हैं. वे कहते हैं, ''साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं. किसी भी निर्दोष को जेल भेजा नहीं जाएगा. अगर किसी निर्दोष पर कार्रवाई हुई है तो तत्काल शिकायत करें, कार्रवाई वापस ली जाएगी.'' जाहिर है,पुलिस के सामने कानपुर बवाल के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती है कि उसकी कार्रवाई निष्पक्ष और न्यायपूर्ण है.