केरलः चांडी आए हवा फिरी

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के मैदान में आने से कांग्रेस के चुनाव प्रचार में आई नई ऊर्जा.

दमदार मौजूदगी जनवरी 2020 में कांग्रेस नेताओं के साथ जेएनयू छात्रों के बीच पहुंचे उम्मन चांडी की फाइल फोटो
दमदार मौजूदगी जनवरी 2020 में कांग्रेस नेताओं के साथ जेएनयू छात्रों के बीच पहुंचे उम्मन चांडी की फाइल फोटो

आखिरकार 18 जनवरी को कांग्रेस आलाकमान ने 6 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव प्रचार की कमान पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस महासचिव उम्मन चांडी को सौंप दी. इस 77 वर्षीय नेता के कदम पड़ते ही मानो पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आ गई और माकपा के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए चुनाव प्रचार में तेजी दिखने लगी.

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के कहने पर ही चांडी को कमान दी गई है. जिस तरह से विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख मुलप्पल्ली रामचंद्रन के बीच जोर आजमाइश चल रही थी, उसके मद्देनजर पार्टी के लिए कुछ बड़ा कदम उठाना जरूरी हो गया था. सूत्रों का कहना है कि मिलनसार और मधुरभाषी चांडी ने पार्टी और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) गठबंधन के भीतर विवाद के मुद्दों को हल करने में मदद की है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को अगर राज्य की सत्ता में वापसी करनी है तो उसे कम से कम 42 फीसद वोटों की जरूरत होगी. लेकिन पिछले साल दिसंबर में हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में 37.9 फीसद वोटों के साथ वह इस लक्ष्य से काफी पीछे है. गठबंधन के प्रमुख सहयोगी केरल कांग्रेस (मणि) या केसी (एम) गुट के एलडीएफ में शामिल हो जाने से उसे मध्य केरल में 2.5 प्रतिशत वोटों का नुक्सान हो सकता है.

मध्य केरल अतीत में कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था. उत्तर में मुस्लिम और मध्य केरल में ईसाई और नायर अतीत में कांग्रेस की हर जीत की रीढ़ हुआ करते थे. 2016 में पिनराई विजयन के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के इस जनाधार में साफ कमी देखी जा सकती है. मुस्लिम और ईसाई वोटों के एक हिस्से का झुकाव एलडीएफ की तरफ हो गया है.

इस तरह मौजूदा परिदृश्य में पारंपरिक तरीके का चुनाव प्रचार कांग्रेस के लिए शायद कारगर न हो. राजनैतिक विश्लेषक सन्नीकुट्टी अब्राहम कहते हैं, ''चांडी के वापस आने से कांग्रेस और यूडीएफ में कुछ जान आ गई है. वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो पूरे केरल में विभिन्न समुदायों को जोड़ सकते हैं. सभी समुदायों में उनकी अच्छी साख है. पार्टी के साधारण कार्यकर्ता भी उनसे मिल सकते हैं.’’ चांडी पिछले 51 वर्षों से लगातार कोट्टायम जिले के अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र पुथुपल्ली से जीतते आ रहे हैं.

इस बीच पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती चुनाव प्रचार के लिए पैसों का इंतजाम करना है. सूत्रों का कहना है कि केरल इकाई को चुनाव प्रचार के लिए राज्य से ही पैसे जुटाना होगा. उसे आलाकमान की ओर से कोई वित्तीय मदद शायद नहीं मिलने वाली है.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताते हैं, ‘‘एलडीएफ और एनडीए के पास असीमित संसाधन हैं. हमारे कुछ नेताओं के पास पैसा है. हमें इस वक्त पैसों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, पीसीसी के दक्रतर के कर्मचारियों तक को वेतन नहीं मिल पाया है.’’

कांग्रेस का कहना है कि वह युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता देकर ''चौंकाने वाले उक्वमीदवार’’ मैदान में उतारेगी. कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल कहते हैं, ''मुझे पूरी उक्वमीद है कि हम पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेंगे.’’ इस बार पार्टी 91 सीटों पर चुनाव लडऩे की योजना बना रही है.

यूडीएफ के घटक कक्वयुनिस्ट मार्किसस्ट पार्टी (सीएमपी) के महासचिव सी.पी. जॉन कहते हैं, ‘‘मुख्यमंत्री पिनराई और एलडीएफ की गलतियां हमारी जीत की संभावनाएं अच्छी कर रही हैं.’’ कांग्रेस को उम्मीद है कि जॉन की बात सही साबित हो, ताकि दक्षिण कांग्रेस-मुक्त न हो जाए.

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