रजा के जिले में रंग

विश्वप्रसिद्ध आधुनिक चित्रकार एस.एच. रजा की तीसरी बरसी पर मध्य प्रदेश में उनके गृह जिले मंडला में फिर चित्रकला, कविता और लोकनृत्यों का सांस्कृतिक जलसा

मंडला में नर्मदा जी के किनारे चित्रकला की कार्यशाला
मंडला में नर्मदा जी के किनारे चित्रकला की कार्यशाला

दुनिया में मशहूर हुए चित्रकार एस.एच. रजा को गुजरे दो बरस हो गए. उनकी तीसरी बरसी पर इसी हफ्ते उनके जन्मस्थान मध्य प्रदेश के मंडला जिले में फिर पांच दिन का सांस्कृतिक जलसा सज रहा है. आयोजन रजा फाउंडेशन का है. 19 से 23 जुलाई तक मंडला में नर्मदा जी के किनारे चित्रकला की कार्यशाला, कवि सम्मेलन और आदिवासी नृत्य वगैरह के कार्यक्रम होने हैं. स्थानीय सांसद और केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की मौजूदगी की भी संभावना है.

20 जुलाई की सांस्कृतिक संध्या में जबलपुर से कवि मलय, बाबुषा कोहली, बस्ती से अष्टभुजा शुक्ल, भोपाल से तेजी ग्रोवर और अंबिकापुर से महेश वर्मा शामिल होंगे. 21 जुलाई को दलदली के लपटूसिंह बैगा का दल कई तरह के आदिवासी नृत्य पेश करेगा. इसी तरह 22 और 23 जुलाई को मंडला और डिंडोरी के सोनसाय बैगा और अर्जुन धुरवे के दल बाघिन कर्मा नृत्य पेश करेंगे. इसके अलावा खैरागढ़ के वरिष्ठ चित्रकार योगेंद्र त्रिपाठी के संयोजन में छात्रों के लिए एक क्ले वर्कशॉप तथा स्थानीय नागरिकों के लिए 'छाते पर रंग' कार्यक्रम आयोजित है.

रजा फाउंडेशन के प्रमुख अशोक वाजपेयी के शब्दों में, ''फाउंडेशन का प्रयत्न यह है कि मंडला के नागरिक इस उत्सव के माध्यम से स्वयं मंडला की कला-संपदा को पहचानें और उस विभूति को भी जिसकी आज विश्व उपस्थिति है. फाउंडेशन की कोशिश है कि जल्दी ही मंडला में ऐसा कुछ बन जाए जहां गोष्ठियां, सर्जनात्मक अड्डेबाजी, प्रदर्शनियां आदि नियमित रूप से हो सकें.''

मंडला के बाबरिया वनग्राम में 1922 में जन्मे कालजयी आधुनिक कलाकार रजा के बारे में याद करते हुए वाजपेयी बताते हैं कि यहां आने पर जिले की सीमा पर ही कार रुकवाकर वे ''सिर धरती पर टेककर अपनी मातृभूमि को प्रणाम करते थे और थोड़ी-सी धूल अपने माथे पर तिलक की तरह लगा लेते थे. नर्मदा जी के किनारे मंडला में नदी को इसी तरह प्रणाम करते थे. उनके लिए मंडला और नर्मदा जी हमेशा प्रणम्य रहे.''

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