मेक इन इंडियाः मददगार जूतों की कहानी
दिव्यांगों और अन्य लोगों के लिए तकनीक की मदद से इंटरऐक्टिव फुटवियर तैयार किया

ड्यूसेर टेक्नोलॉजीज के संस्थापक 34 वर्षीय क्रिस्पियन लॉरेंस हैं.
विदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके 34 वर्षीय क्रिस्पियन लॉरेंस और 31 वर्षीय अनिरुद्ध शर्मा के लिए एक ऐसा स्टार्ट-अप शुरू करना बहुत बड़ी चुनौती थी जिसमें सहज यूजर-फ्रेंड्ली वियरेबल (पहनने लायक) टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया हो.
आखिर उन्होंने 2011 में ड्यूसेयर टेक्नोलॉजीज़ की स्थापना की जिसमें लेचल नाम से दुनिया के पहले सेंसर वाले इंटरऐक्टिव जूते बनते हैं. जूते में ऐसे सोल का इस्तेमाल किया गया है जो ब्लूटूथ के जरिए फोन और लेचल ऐप से जुड़ सकता है. यह ऐप दिशा जानने के लिए गूगलमैप का इस्तेमाल करता है.
अलग किए जा सकने वाले ये सेंसर, जिनमें चार्ज होने वाली दो लीथियम बैटरियां लगी हैं, भीड़भाड़ और शोरगुल से भरी सड़कों पर वाइब्रेशन और सनसनाहट के जरिए रास्ता बताने में मदद करते हैं. एक बार चार्ज होने पर यह बैटरी महीने भर चलती है.
ड्यूसेयर के 75 देशों में अब तक ऐसे 12,000 फुटवियर बिक चुके हैं. कंपनी ने 6,999 रु. की कीमत वाले इस फुटवियर को भारत में बेचने के लिए अमेजन का सहयोग लिया है.
एक छोटे-से कमरे में एकेडमिक प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होकर यह कंपनी अब सिकंदराबाद के अपने कारखाने में हर महीने 20,000 जोड़ी जूते बनाने की क्षमता रखती है और सालाना दस लाख जोड़ी जूते बनाने का लक्ष्य है.
कंपनी में दिव्यांग कर्मचारी भी हैं और उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. ड्यूसेयर नेत्र संस्थानों से मिलकर नेत्रहीनों को भी इन जूतों के उत्पादन में जोडऩे का काम कर रही है.
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