कशमकश में कैमरे
काम शुरू होने से पहले ही एलजी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया जो कैमरे लगाने के काम में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), लोगों की निजता, सुरक्षा जैसे विषयों पर नियम बनाएगी. कमेटी में दिल्ली की चुनी हुई सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं रखा गया.

राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरी कैबिनेट और अनेक विधायकों के साथ 14 मई को उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल के आवास के बाहर धरने पर बैठे तो मौसम के साथ राजनीति का पारा भी एक बार फिर चढ़ गया. इस बार झगड़े का विषय था आम आदमी पार्टी सरकार की राजधानी में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना.
दरअसल, आप सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए राजधानी में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने का चुनावी वादा किया था. उसे पूरा करने के लिए उसने सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) को 1.40 लाख कैमरे लगाने का ठेका दे दिया.
काम शुरू होने से पहले ही एलजी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया जो कैमरे लगाने के काम में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), लोगों की निजता, सुरक्षा जैसे विषयों पर नियम बनाएगी.
कमेटी में दिल्ली की चुनी हुई सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं रखा गया. आप सरकार ने इस कदम को कैमरे लगाने के काम में केंद्र सरकार के इशारे पर एलजी का अड़ंगा माना और मुख्यमंत्री केजरीवाल एलजी आवास पर मार्च करते हुए पहुंच गए.
तीन घंटे धरना देने के बाद वहां उन्होंने कहा कि जनता खुद ही एसओपी तय कर लेगी. इसके लिए कमेटी की जरूरत नहीं है. उधर कांग्रेस ने कैमरे लगाने का ठेका देने में भष्टाचार की बात कही.
इस पर आप का कहना है कि कैमरे लगाने वाली कंपनी केंद्र सरकार के अधीन है ऐसे में दिल्ली सरकार को फायदा कैसे हो सकता है. आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, ''एलजी के आदेश के बाद अब राजधानी का कोई भी व्यक्ति अपने घर के बाहर भी मंजूरी के बगैर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवा सकेगा. पहले भी एलजी इस योजना को एक अफसर अश्विनी कुमार के जरिये महीनों लटका चुके हैं.''
एलजी का कहना है कि सीसीटीवी की योजना उन्हें भेजी नहीं गई. इस पर आप कहती है कि योजना नहीं भेजी गई तो कमेटी कैसे बना दी. आप का सवाल है कि एलजी आवास समेत दिल्ली के हजारों स्थानों पर कैमरे किस कमेटी से पूछकर लगे.
फिलहाल एनडीएमसी एरिया में भी कैमरे लगाने का काम रुक गया है. जब तक कमेटी नियम नहीं बनाती तब तक आरडब्लूए समेत कोई संस्था या व्यक्ति भी घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवा सकेगा. नियम बनने के बाद अफसर से मंजूरी लेनी होगी.
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