छूट गए अधूरे सवाल

सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर को न्यायमूर्ति जे.जे. चेलमेश्वर की खंडपीठ के समक्ष एक याचिका लगाई गई. याचिकाकर्ता सीजेएआर (कैंपेन फॉर जुडिशियल अकाउंटेबिलिटी ऐंड रिफॉम्र्स) सीबीआइ जांच के एक मामले में एसआइटी से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा था.

फिलहाल निबटा मामला  सुप्रीम कोर्ट पर शक की उंगली उठने से चिंतित मिश्र
फिलहाल निबटा मामला सुप्रीम कोर्ट पर शक की उंगली उठने से चिंतित मिश्र

आप अवमानना के लायक भी नहीं हैं''—सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र ने ऐसा कह कर बीते पूरे हफ्ते चले जज रिश्वतखोरी कांड पर अप्रत्याशित विवाद की पूर्णाहुति कर दी. जिन वकीलों ने न्यायिक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, वे अदालत की अवमानना से बाल-बाल बच गए, लेकिन यह कसैला अध्याय अपने पीछे संदेह और अधूरे सवालों के काले बादल छोड़ गया है.

सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर को न्यायमूर्ति जे.जे. चेलमेश्वर की खंडपीठ के समक्ष एक याचिका लगाई गई. याचिकाकर्ता सीजेएआर (कैंपेन फॉर जुडिशियल अकाउंटेबिलिटी ऐंड रिफॉम्र्स) सीबीआइ जांच के एक मामले में एसआइटी से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा था. मामला हवाला की एक साजिश का था जहां काली सूची में डाले गए एक मेडिकल कॉलेज को नियमित कराने के लिए शीर्ष जजों को नकद से प्रभावित करने की बात शामिल थी.

अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलील थी कि मुख्य न्यायाधीश मिश्र को इस मामले से खुद को हितों के टकराव के मद्देनजर दूर रखना चाहिए क्योंकि वे खुद उस खंडपीठ का हिस्सा थे, जिसने इस संस्थान से जुड़े एक पूर्ववर्ती मामले में अनुकूल फैसला सुनाया था. खंडपीठ में यह केस 10 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ. उस दोपहर भूषण के पास मुख्य न्यायाधीश की रजिस्ट्री से फोन आयारू मुकदमा सीजेआइ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ है.

ऐसी ही एक याचिका न्यायमूर्ति चेलमेश्वर की अदालत में 9 नवंबर को लगी. याचिकाकर्ता सीजेएआर की वकील कामिनी जायसवाल थीं. पीठ ने पांच जजों की एक संविधानपीठ के पास इसे 13 नवंबर को सुनवाई के लिए भेजा. न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और ए. भूषण ने 10 नवंबर को सवाल उठाया कि आखिर दूसरी याचिका क्यों लगाई गई? इसी दिन दोपहर पांच न्यायाधीशों की एक खंडपीठ ने भूषण को कड़ी फटकार लगाई और सुप्रीम कोर्ट बार का एक तबका भूषण के खिलाफ  खड़ा हो गया.

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रुपिंदर एस. सूरी ने भूषण, सीजेएआर और जायसवाल पर 'फोरम शॉपिंग' का आरोप लगाया—यह अपमानजनक शब्द तब प्रयोग में लाया जाता है जब वकील किसी मामले में अनुकूल फैसले की आस में उसे पीठ विशेष के समक्ष सूचीबद्ध करवाने की कोशिश करते हैं. पांच जजों की पीठ ने जस्टिस चेलमेश्वर के फैसले को रद्द करते हुए कहाः ''सीजेआइ रोस्टर के मुखिया हैं, उन्हीं के पास पीठ गठन और मुकदमे आवंटित करने का प्राथमिक अधिकार है.''

इस घटनाक्रम पर न्यायिक हलके में हैरानी है. वरिष्ठ न्यायविद् सोली सोराबजी ने एक साक्षात्कार में कहा, ''यह मांग करना बहुत आसान है कि कोई जज मामले से अपने को अलग रखे, लेकिन ऐसा करने का ठोस आधार होना चाहिए.'' मिश्र ने एक बड़ा सवाल उठाया है, ''आज हर कोई सुप्रीम कोर्ट पर शक कर रहा है, वह भी अफवाहों के आधार पर. इस नुक्सान की भरपाई हम कैसे करेंगे?''

बात पते की

''मैं मानता हूं कि सेकुलर शब्द

स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा झूठ है. जिन्होंने इस झूठ को पैदा किया और जो इसका इस्तेमाल करते हैं, उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए... अगर कोई कहे कि सरकार को एक ही प्रार्थना पद्धति से चलना चाहिए तो यह मुमकिन नहीं है. यूपी में मुझे 22 करोड़ लोगों

को देखना है... मैं यहां किसी एक समुदाय को नष्ट करने के लिए नहीं बैठा हूं... आप पंथनिरपेक्ष हो सकते हैं, सेकुलर नहीं.''

योगी आदित्यनाथ

एक मीडिया आयोजन में ऐसा कहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना सिद्धांत रखा कि सेकुलरवाद एक व्यावहारिक राजनैतिक प्रणाली नहीं है. उन्होंने वैसे तो 'पंथनिरपेक्ष' होने की बात कही लेकिन भाजपा के 'रामराज्य' को लेकर दिए उनके संदर्भ इसे अविश्वसनीय बनाते हैं.

सूचकांक

कांपती तेल की धार

कच्चे तेल की कीमतों का बढऩा हिंदुस्तान के लिए अच्छी खबर नहीं है. सऊदी अरब में सियासी उथल-पुथल और ओपेक की स्वैच्छिक उत्पादन कटौतियों के बाद ये कीमतें प्रति बैरल 64 डॉलर (बेंट क्रूड के लिए) के आसपास मंडरा रही हैं. हिंदुस्तान अपना ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सर्वाधिक फायदा इसी ने उठाया है. मगर अब जब तेल की कीमतें फिर बढऩे लगी हैं, सरकार के लिए पैंतरेबाजी की गुंजाइश भी सिमट रही है.

86

अरब डॉलर

का तेल आयात किया भारत ने 2016-17 में

1.6 अरब डॉलर

बढ़ेगा, भारत का तेल आयात खर्च, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में प्रति एक डॉलर की बढ़ोतरी होने पर

1 अरब डॉलर

वह रकम है, जितना कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में प्रति एक डॉलर की बढ़ोतरी होने से भारत को चालू खाते का घाटा होगा. (निर्यात के मुकाबले आयात सीमा पार करने से होने वाला घाटा)

64 डॉलर

कीमत थी 6 नवंबर, 2017 को ब्रेंट क्रूड ऑयल की (प्रति बैरल). कच्चे तेल के लिए यह अंतरराष्ट्रीय मानक है. जून 2015 के बाद यह सर्वाधिक कीमत थी

21.5

करोड़ टन

मात्रा है उस तेल की, जो 2016-17 में भारत ने आयात किया

8-10

अरब डॉलर

बढ़ जाएगा भारत का आयात खर्च, अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही

145.6 डॉलर

प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड की सर्वाधिक कीमत गई थी 11 जुलाई, 2008 को

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