‘पांच साल पहले के मुकाबले भारत-अमेरिका संबंध आज ज्यादा मजबूत’

क्वाड से लेकर लगातार बढ़ते कारोबार, मजबूत होते रक्षा संबंधों और व्यापार समझौते आदि पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

exclusive interview
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे के रोहित शर्मा के साथ क्वाड से लेकर लगातार बढ़ते कारोबार, मजबूत होते रक्षा संबंधों और व्यापार समझौते तक भारत और अमेरिका से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खास बातचीत की. पेश हैं उसी के प्रमुख अंश :

सबसे पहले तीन सितंबर को नई दिल्ली में हुई क्वाड शेरपा बैठक पर बात करते हैं, जिसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक और इसके संभावित नतीजों के बारे में आपका क्या कहना है?

क्वाड हम सभी के लिए बेहद अहम है और यह बैठक उस मुलाकात की तैयारी के लिहाज से जरूरी थी जो अगले महीने सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में होने जा रही है. वहां अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अपने समकक्षों से मिलेंगे. आखिर क्वाड का मतलब क्या है?

यह ऐसे साझीदारों का समूह है जो एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं. क्वाड कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहा है, जिनमें मानवीय सहायता, आपदा राहत, साझा सैन्य अभ्यास और चारों देशों के बीच आपसी तालमेल शामिल है.

क्वाड का एक हिस्सा नई और उभरती टेक्नोलॉजी से भी जुड़ा है. हमने एआइ से लेकर डेटा सेंटर और निश्चित तौर पर क्रिटिकल मिनरल्स तक हर विषय पर चर्चा की. क्वाड के पास मिलकर काम करने के तमाम अवसर हैं और हमने इसमें नई जान फूंकी है.

राजदूत सर्जियो गोर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को‌ रूबियो

● क्या क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन बाद में फ्लोरिडा में होने वाले जी20 के दौरान हो सकता है?

मैं अभी कोई वादा नहीं करना चाहता लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि अमेरिका लीडर्स समिट को लेकर बेहद गंभीर और उत्सुक है. चारों देशों के नेता आपस में नियमित तौर पर बात करते हैं, इसलिए अगला स्वाभाविक कदम यही है कि सभी एक मेज पर साथ बैठें और साझा लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएं.

भारत भर में आपका दौरों का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहता है, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें शामिल हैं. इन मुलाकातों के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

मेरे और हमारी दूतावास की टीम के लिए दिल्ली से बाहर निकलना बहुत जरूरी है. जब मैं मुंबई, बेंगलूरू या हैदराबाद जाता हूं, तो मुझे वहां व्यापार, अंतरिक्ष और सैन्य क्षेत्र में अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं.

आप कोई भी सेक्टर चुन लीजिए, भारत और अमेरिका उसमें मिलकर काम कर रहे हैं. पांच वर्ष पहले की तुलना में आज यह रिश्ता कहीं अधिक मजबूत है—चाहे फार्मा हो, आइटी और टेक्नोलॉजी हो या फिर साझा सैन्य अभ्यास.

भारत किसी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ सबसे ज्यादा सैन्य अभ्यास करता है. व्यापार के क्षेत्र में हमारा द्विपक्षीय कारोबार आज 240 अरब डॉलर (करीब 22.6 लाख करोड़ रुपए) का है और दोनों नेताओं ने आने वाले कुछ वर्षों में इसे 500 अरब डॉलर (करीब 47.2 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.

अमेरिका और भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. मंत्री पीयूष गोयल कमाल के आदमी हैं. मेरी तरह वे भी खूब यात्राएं करते हैं. लेकिन दिल्ली में होने पर हम मिल बैठना पसंद करते हैं.

भारत ने हाल ही 7.8 फीसद की जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है. आप अमेरिकी कंपनियों और उनके सीईओ को भारत के साथ काम करने के संबंध में क्या कहते हैं?

व्यापार दोनों तरफ से होता है और हर अमेरिकी दूतावास अमेरिका में नया निवेश लाने का काम करता है. हमें इसकी बहुत खुशी है कि भारत स्थित हमारा दूतावास 24 अरब डॉलर का निवेश लाने के साथ पहले स्थान पर रहा.

दूसरी तरफ आप अमेरिकी कंपनियों को भारत आते और यहां अपना कारोबार शुरू करते देख रहे हैं—चाहे माइक्रोसॉफ्ट हो, गूगल हो, डेटा सेंटर हों, एआइ सेंटर हों या फार्मा कंपनियां. यह सब भरोसे और स्थिरता की वजह से है.

भारत का अच्छा प्रदर्शन हमारे लिए भी बहुत बढ़िया बात है. हम एक स्थिर भारत चाहते हैं और उसके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. इसका श्रेय काफी हद तक आपके प्रधानमंत्री को जाता है.

वे भारत में ऐसी स्थिरता लाए हैं जो दुनिया के बाकी हिस्सों में देखने को नहीं मिलती. इतने जीवंत लोकतंत्र में आपके प्रधानमंत्री का 12 वर्षों से पद पर बने रहना एक अद्भुत उपलब्धि है.

हाल ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ जैवलिन मिसाइल के लिए साझा उद्यम की घोषणा की गई है. क्या भविष्य में हमें ऐसे और सौदे होते देखने को मिलेंगे?

हमारा रक्षा संबंध केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं. यह भरोसे पर भी टिका है. भारत ऐसे समूह का हिस्सा है जिसमें अमेरिका के भरोसेमंद साझीदार शामिल हैं. हमारा मानना है कि हमारे पास सबसे बेहतरीन और उन्नत तकनीक है और भारत जैसे विश्वसनीय साझीदार के साथ काम करना एक शानदार मौका है.

जैसा आपने जिक्र किया, चाहे वह जैवलिन मिसाइल हो या इस वर्ष के शुरू में डिलिवर किए गए अपाचे हेलिकॉप्टर. अथवा पाइपलाइन में मौजूद दूसरी चीजें, जाहिर है रक्षा बिक्री के मामले में बहुत कुछ हो रहा है.

लेकिन यह रिश्ता बेहतरीन सैन्य अभ्यासों पर भी टिका है. कुछ हफ्तों बाद भारत में सबसे बड़ा युद्धाभ्यास राजस्थान में होने जा रहा है. भारत अमेरिका के साथ सबसे ज्यादा सैन्य अभ्यास करता है. यह सब हमारे राष्ट्रपति और आपके प्रधानमंत्री के बीच दोस्ती का भी नतीजा है.

जैसा, आपने कुछ महीनों पहले फ्रांस में जी-7 के दौरान देखा भी था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत साफ शब्दों में कहा था-जब तक मेरे मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां हैं, भारत अमेरिका पर पूरा भरोसा रख सकता है.

अक्तूबर में विदेश मंत्री मार्को रूबियो की यात्रा से हम किस तरह के ठोस नतीजों की उम्मीद कर सकते हैं?

मेरा लक्ष्य यह तय करना है कि न केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, बल्कि हमारे मंत्री भी आपस में लगातार जुड़े रहें. आप देख रहे हैं कि मंत्रियों और कैबिनेट अधिकारियों के भारत आने और अमेरिका जाने के मामले में ऐसा जुड़ाव दिख भी रहा है जो पिछले सालों में कभी नहीं रहा.

अपनी पिछली यात्रा पर विदेश मंत्री रूबियो चार दिनों के लिए आए थे, जो राष्ट्रपति के बिना अमेरिका से बाहर उनका सबसे लंबा दौरा था, और वे अक्तूबर में फिर आने वाले हैं. यहां एक मंत्री ने मुझसे पूछा था, “विदेश मंत्री का इतने कम समय में दो बार भारत आना बहुत दुर्लभ है.”

तो मेरा उन्हें सीधा जवाब थाः “अब इसकी आदत डाल लीजिए.” हम और गहरे रिश्ते चाहते हैं जिसका मतलब है कि हमें बार-बार एक-दूसरे के यहां आना-जाना होगा. मुझे उम्मीद है कि न केवल मंत्री रूबियो, बल्कि कई अन्य कैबिनेट अधिकारी भी आएंगे.

साल खत्म होने से पहले अमेरिका के तीन राज्यों के गवर्नर भी (हर महीने एक) भारत आने वाले हैं क्योंकि वे अमेरिका और भारत दोनों के लिए इसमें फायदे ही फायदे देख रहे हैं.

व्यापार समझौता कब तक होने की उम्मीद करें?

व्यापार सौदे पर काम आगे बढ़ रहा है. जैसा कि आप जानते हैं, राजदूत के तौर पर मेरे भारत आने के एक महीने के भीतर ही हमने व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया था. बदकिस्मती से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने वहां के एक कानून को रद्द कर दिया इसलिए हमें उस पर फिर से काफी काम करना पड़ा और इसे नए सिरे से तैयार किया जा रहा है.

मुझे पूरा भरोसा है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में हम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे लेंगे. मैं लोगों से यही कहना चाहूंगा कि इसे थोड़ा व्यापक नजरिए से देखें. यूरोपीय संघ पिछले 20 से भी ज्यादा वर्षों से इस तरह के समझौते पर काम कर रहा है और वह अब तक पूरा नहीं हुआ है.

हम कई अन्य साझीदारों से बहुत आगे हैं. दोनों पक्ष समझते हैं कि यहां अपार संभावनाएं हैं और हम निकट भविष्य में इसे आगे बढ़ाएंगे.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं. जब दिसंबर में पीएम मोदी फ्लोरिडा में जी20 बैठक के लिए जाएंगे तो क्या किसी प्रमुख द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद कर सकते हैं?

डॉ. जयशंकर भी मेरे पसंदीदा नेताओं में से एक हैं. जहां तक जी20 से जुड़े आपके सवाल की बात है तो मैं अभी किसी खास घोषणा के बारे में कहने की स्थिति में नहीं हूं.

चूंकि राष्ट्रपति आपके प्रधानमंत्री को अपना मित्र मानते हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि वह दौरा केवल एक समूह बैठक से आगे बढ़कर भी काफी कुछ होगा. अगर आप राष्ट्रपति से पूछें कि “आपके पास 35 लोग आ रहे हैं, आप किससे मिलना चाहते हैं?” तो प्रधानमंत्री उस सूची में सबसे ऊपर होंगे.

भारत-अमेरिका संबंधों की स्थिति को देखते हुए रणनीतिक साझेदारी की दिशा को लेकर आपको सबसे ज्यादा भरोसा किस बात से मिलता है?

जो चीज मुझे सबसे ज्यादा भरोसा देती है, वह है आंकड़े और आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते. साल दर साल हमारा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है, हमारी खरीदारी और सैन्य अभ्यास बढ़ रहे हैं. इस रिश्ते का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है.

ऐसा होने की एक वजह यह है कि हमारे पास दो ऐसे नेता हैं जो नतीजों पर ध्यान देते हैं और तेजी से काम करते हैं. आपके प्रधानमंत्री काम को जल्दी पूरा करना चाहते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप भी इसी पर मजबूती से विश्वास रखते हैं. जब सोच एक साथ मिलती है तो अच्छे नतीजे ही सामने आते हैं.

अगले साल राष्ट्रपति ट्रंप के भारत आने की संभावना है. वे इसके लिए कितने उत्साहित हैं?

भारत को लेकर राष्ट्रपति के पास बेहद खूबसूरत यादें हैं. तो बस, थोड़ा इंतजार कीजिए...अभी मैं केवल इतना ही कह सकता हूं.

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