भौकाल वाले भैय्या
पंकज त्रिपाठी कालीन भैय्या के किरदार में फिर लौटे पर इस बार मिर्जापुर : द मूवी में

• ऐसा कम ही होता है कि किसी वेब सीरीज पर सिनेमाघरों के लिए फिल्म बने. क्या यह मिर्जापुर के इतनी बड़ी बन जाने का प्रमाण है?
बिल्कुल. कोई कंटेंट लंबे फॉर्मेट में ओटीटी पर, खासकर उसके कैरेक्टर दुनिया भर में इतने पॉपुलर हो जाएं, जिसका कैनवस इतना बड़ा हो, तो वह बड़े पर्दे के लायक हो ही जाता है.
निर्माताओं ने सोचा कि लोग इससे निजी स्तर पर जुड़ा महसूस कर रहे हैं तो क्यों न इसे सिनेमाघरों में दिखाया जाए.
• ओटीटी पर क्रिमिनल जस्टिस के माधव मिश्र के रूप में आपका एक और जो पॉपुलर किरदार है, क्या आपको लगता है कि उसमें भी बड़े पर्दे पर उतारने लायक दम है?
बिल्कुल है. माधव मिश्र के भीतर कमाल का सरवाइवल इंस्टिंक्ट है. कालीन भैय्या को आप हजारों की भीड़ में भी आराम से पहचान लेंगे लेकिन माधव मिश्र को ऐसी ही भीड़ में खोजते रह जाएंगे.
हर हाल में वह रास्ता निकाल लेगा. दोनों किरदारों में एक तरह का सेंस ऑफ ह्यूमर है जो उन्हें एक तल पर लाता है. चेहरे-मोहरे में भी वे एक-से हैं. फर्क है तो संवादों की अदायगी में.
•मिर्जापुर, क्रिमिनल जस्टिस, स्त्री...आप कुछ सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी प्रस्तुतियों का हिस्सा बने हैं...
इसके लिए मैं बहुत कृतज्ञ हूं. मैं तो आया था सिनेमा में करिअर बनाने, लेकिन ईश्वर ने फ्रेंचाइजी ही बना दिया. मैं तो छोटा-मोटा काम चाहता था जिससे रोजी-रोटी चल सके और परिवार पल जाए.
अपने कड़े परिश्रम और निर्माताओं तथा दर्शकों के भरोसे के बूते इस मुकाम तक आ पाया.
• आगे क्या कुछ आने को है?
पारिवारिक मनोरंजन नाम की एक फिल्म है जो ओटीटी पर आएगी. इत्मीनान से काम कर रहा हूं. एक समय पर एक प्रोजेक्ट. मेरे भीतर का कलाकार हरेक रोल मन, शरीर और बुद्धि...पूरे मनोयोग से करना चाहता है.
अभी तक नहीं कर पाया था. एक से दूसरे सेट पर भागता रहा. यह एकाग्र रवैया संभव हो रहा है क्योंकि दर्शकों का भरोसा जीता है और अब ईएमआइ का कोई प्रेशर नहीं है. इस तरह के दबाव न होने पर कलाकार बेफिक्री से काम कर पाता है.