इतिहास की ‌मुसाफिर

ऐक्टर-प्रोड्यूसर ॠचा चड्ढा के जल्द ही आने वाले यूट्यूब ट्रैवल शो मुसाफिरी में शहरों का शिद्दत से जायजा

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ॠचा चड्ढा

ऐक्टर-प्रोड्यूसर ॠचा चड्ढा के जल्द ही आने वाले यूट्यूब ट्रैवल शो मुसाफिरी के बारे में करिश्मा उपाध्याय ने उनसे बात की

इसका ख्याल आपके जेहन में काफी अरसे से चल रहा था. है ना !

पूरे आठ साल से. गर्भ वाले दिनों में ऐ‌क्टिंग की मेरी खुजली शांत हो नहीं पा रही थी, तो मैंने इस पर काम शुरू कर दिया. मैं सोचने लगी मेरी बेटी के बड़ी होने पर यह दुनिया और मुंबई किस तरह से दिखेगी भला.

शो में मेरा नजरिया समानुभूति और उम्मीद भरा है. पर थोड़ा गम भी है क्योंकि हमारे शहर बड़े पैमाने पर और बहुत तेजी से बदल रहे हैं. मुसाफिर आगे की पीढ़ियों के लिए एक तरह की धरोहर रचने का प्रयास है.

इसको किस तरह से बयां करेंगी आप?

इसमें लोगों की और जगहों के बारे में बातें हैं और बहुत सारा प्यार भी. शो का हर सीजन एक शहर पर होगा. आठ एपिसोड वाला पहला सीजन मुंबई पर केंद्रित है. मेरी कोशिश शहर को जीते-जागते और लगातार नई शक्ल लेते स्थान के रूप में देखने की थी, वह भी उत्तर औपनिवेशिक नजरिए से.

कॉलेज में मैंने इतिहास में मास्टर्स किया लेकिन इससे पहले उस ज्ञान का उपयोग करने का मुझे मौका नहीं मिला. सूत्रधार और निर्माता के पटकथाकार भी मैं ही हूं.

जिस शहर को आप घर कहती हैं, उसे अपने अंदाज में खोजने का अनुभव कैसा रहा?

शुरू में सोच-विचार के दौरान लगा कि पहला सीजन दिल्ली पर रखूं, जहां मैं बड़ी हुई, या शायद अमृतसर जहां पैदा हुई थी. अंत में मुंबई को चुना क्योंकि अब किसी भी शहर से ज्यादा यहां रह चुकी हूं.

यह जानना खासा दिलचस्प था कि 1566 के किसी घटनाक्रम ने 2026 में हमारी कॉस्मोपॉलिटन डेमोग्राफी पर किस से असर डाला है; या यह कि कोली स्त्रियों और लोकल ट्रेनों ने किस तरह से मुंबई की महिलाओं का जीवन बदला है.

मुसाफिरी का आपका स्टाइल क्या है?

यह इस पर निर्भर करता है कि मैं अकेले निकली हूं या अली (फजल, पति) या फिर परिवार के साथ. अकेले तो मैं कजाखस्तान सरीखे थोड़े अनजान ठिकानों को निकल जाती हूं और बस घूमती-भटकती हूं.

अगर किसी शहरी ठिकाने में और दूसरों के साथ हूं तो फिर म्य‌ूजियम की लिस्ट होती है. पहाड़ों पर या जंगलों में जा रहे हैं तो थोड़ा आराम से और टिक कर घुमाई करते हैं.

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