"हर चोट से कुछ न कुछ सबक मिलता है"
अपनी नई किताब 'द लॉन्जेविटी कोड' में राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद बेहतर और लंबा जीवन जीने का राज खोल रहे हैं

सवाल+जवाब
● स्वास्थ्य और लंबी उम्र के पहलू को यह किताब किस तरह से आसान बनाती है?
यह वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को खोलते हुए बताती है कि लंबी उम्र के लिए आखिर किया क्या जाए. नींद, भोजन, शारीरिक गतिविधि में छोटे-छोटे जोड़-घटाव कहीं ज्यादा अहमियत रखते हैं. बहुत-सी चीजें वैसे एक चक्र में चलती रहती हैं पर मुझे लगता है थोड़ा और चलते रहना और थोड़ा बेहतर खाना निर्णायक पहलू है.
● आपकी सह-लेखिका, फिजिशियन-साइंटिस्ट डॉ. सोफिया पाथई के साथ इस उपक्रम के लिए आपका तालमेल कैसे बना?
आप गौर करें तो पाएंगे कि आम आदमी की सेहत तेजी से बिगड़ी है. मैं सोफिया से मिला तो बढ़ती और लंबी उम्र से जुड़ी उनकी समझ को देखकर हैरान रह गया. उन्हें मेरे शरीर पर हो रहे प्रयोग पसंद आए. यह बेहद सहज किस्म का तालमेल था और किताब ने स्वाभाविक ढंग से आकार लिया.
● अपने करियर के कुछ सबसे बड़े खिताब जीतने के लिए चोटों और सर्जरी से वापसी करने का अनुभव कैसा था?
मेरा मानना है कि हर चोट से कुछ न कुछ सबक मिलता है. चोटों की वजह से ही मैं आज ऐसा इंसान हूं. मैं अपनी पूरी सपोर्ट टीम का आभारी हूं जिन्होंने रिकवरी के दौरान मेरी मदद की. साथ ही मुझे लगता है कि सब इसी तरह होना तय था और यह ईश्वर की कृपा है कि मैं वापसी करके कुछ टूर्नामेंट जीत सका.
● स्पोर्ट्स साइंस एथलीटों के करियर को लंबा करने में किस तरह से मददगार साबित हुई है?
इस पीढ़ी के पास बेहतर विज्ञान और टेक्नीक है. बहुतेरी बुनियादी चीजें जैसे जिंदगी के प्रति तर्कसंगत दृष्टिकोण रखना, प्रकृति के बीच रहना, शुद्ध आबोहवा, शुद्ध विचार और कम भटकाव, ये कुछ ऐसे बड़े फैक्टर हो सकते हैं जो रिकवरी में मदद कर सकते हैं.
—शैल देसाई.