‘‘विपक्ष की एकता छलावा है. हम इससे नहीं डरते’’
इस साल के आखिर में चार बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव और एक साल से भी कम समय में 2024 का लोकसभा चुनाव तय है. ऐसे में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा पार्टी की एक के बाद दूसरी बैठक में मसरूफ रहते हैं. इसके बावजूद मिलनसार नड्डा ने ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और डिप्टी एडिटर अनिलेश एस. महाजन से आम चुनाव के संबंध में पार्टी की रणनीति के बारे में बातचीत करने के लिए वक्त काल लिया. उन्होंने विभिन्न चुनावी मुद्दों पर पूछे गए किसी भी सवाल से कन्नी नहीं काटी. सभी सवालों के जवाब पूरे आत्मविश्वास और आराम से दिए. पेश हैं इस खास बातचीत के कुछ अंश:

- 2024 के आम चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है, 2014 और 2019 की तरह अपने दम पर अधिकांश सीटें जीतने की भाजपा की क्या योजना है?
अगर आप 2014 को देखें तो मुद्दा भ्रष्टाचार, नीतिगत पंगुता, शासन की कमी और अर्थव्यवस्था का खस्ताहाल होना था. 2014 से 2019 तक, प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों के सभी वर्गों, खासकर गरीबों और पिछड़ों के सशक्तिकरण के लिए सभी मोर्चों पर काम किया. आर्थिक मोर्चे पर, बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रतिरक्षा को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए साहसिक निर्णय लिए गए. हम 2019 तक हालात को पटरी पर लाने और इनसे भी बड़े बदलावों के लिए रक्रतार तय करने में सक्षम थे.
- फिर मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही महामारी आ गई...
हां. हालांकि इन पिछले चार वर्षों में दुनिया को सदी की सबसे भीषण महामारी का सामना करना पड़ा, लेकिन पीएम मोदी ने संकट और क्षमता को अवसर में बदल दिया. उन्होंने साहसिक निर्णय लिए और देश को साथ लेकर चले. स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की स्थापना की गई और सरकार ने देश के आत्मविश्वास को बढ़ाने और आत्मानिर्भरता की दिशा में काम किया. यूक्रेन युद्ध और उसकी वजह से पैदा हुई अन्य समस्याओं के कारण आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर रही—यहां तक कि आइएमएफ ने भी इसे माना है. अब मॉर्गन स्टेनली जैसी एजेंसी भी कहती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एशिया में एक उज्ज्वल स्थान है.
- लिहाजा, तीसरी बार जनादेश हासिल करने के लिए आप 2024 में कौन सा बड़ा संदेश लेकर जाएंगे?
अब देश प्रधानमंत्री मोदी के हाथों में सुरक्षित महसूस करता है. अर्थव्यवस्था उस 5 ट्रिलियन डॉलर के आकार की ओर बढ़ रही है जिसके बारे में हमने बात की थी. अब हम भारत को अमृत काल में एक विकसित देश बनते हुए देख रहे हैं. सभी मोर्चों पर गति बढ़नी चाहिए, चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, रक्षा हो या भारत के अंतरराष्ट्रीय हित हों. यह समाज के सीमांत वर्गों के सशक्तिकरण के बारे में भी है. हमारा लक्ष्य विकसित भारत का है. इसके लिए जनादेश की जरूरत है और हमारा मानना है कि लोग हमें वह देने को तैयार हैं.
- जनादेश हासिल करने के लिए आप पार्टियों को तोड़ते दिख रहे हैं जैसा कि हमने महाराष्ट्र में देखा है. लोगों ने सोचा कि भाजपा अलग तरह की पार्टी है, तो यह पार्टी ऐसा क्यों कर रही है?
इसमें एक अंतर है. भाजपा में, जनसंघ के दिनों से ही, हमारी विचारधारा रत्ती भर भी कमजोर नहीं हुई है. हम तब भी राष्ट्र और राष्ट्रवाद के बारे में बात करते थे और अब भी करते हैं. अनुच्छेद 370, राम जन्मभूमि या तीन तलाक के साथ भी ऐसा ही है. हम अपनी मान्यताओं पर कायम हैं और उन पर अमल करते हैं. हम एकमात्र ऐसी पार्टी हैं जो लगातार एक जैसी रही है, एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने अपनी विचारधारा को कमजोर नहीं किया है.
जहां तक दूसरी पार्टियों का सवाल है तो हमने उन्हें कैसे तोड़ा? शिवसेना सुप्रीमो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने कहा था कि वे कांग्रेस से नाता जोड़ने के बजाए अपनी दुकान बंद करना पसंद करेंगे. तो, अगर उनके बेटे ने दुकान बंद करने का फैसला किया है, तो मैं क्या कर सकता हूं? हम अपनी विचारधारा को कमजोर नहीं कर रहे हैं, जो भी हमसे जुड़ना चाहता है वह जुड़ सकता है.
- भले ही वे सभी एनसीपी दलबदलुओं के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपी हों?
कानून अपना काम करेगा; हम इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करते. लेकिन अगर ये लोग अपनी पार्टियों में वैचारिक भ्रम के कारण हमसे जुड़ना चाहते हैं तो हमें कैसे दोषी ठहराया जाए? वे हमारे पास आए हैं, हमने उनसे संपर्क नहीं किया.
- आप उन्हें अच्छे पदों से नवाज रहे हैं. ऐसे में क्या आपकी अपनी पार्टी के वफादार कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करेंगे?
कोई भी खुद को उपेक्षित महसूस नहीं कर रहा है. भाजपा बहुत साइंटिफिक तरीके से काम करती है. जो लोग बाहर से आते हैं वे हमारे तौर-तरीकों से तालमेल बिठा लेते हैं और जो हमेशा हमारे साथ रहे हैं वे वैसे भी मुख्यधारा का हिस्सा हैं. हममें सबको साथ लेकर चलने की क्षमता है.
- लेकिन ऐसा लगता है कि आपके पास सभी महत्वपूर्ण राज्यों में विपक्ष को खत्म करने और उन्हें भाजपा से मुकाबला करने के लिए आपस में एकजुट होने से रोकने की योजना है.
विपक्षी एकता की यह बात फोटो-ऑप के लिए अच्छी है, लेकिन ये पार्टियां एक-दूसरे को क्या दे सकती हैं? यह सब छलावा है और हम इससे नहीं डरते. जब 2019 के लोकसभा चुनावों में जब सपा और बसपा एक साथ लड़ रहे थे तब मैंने उत्तर प्रदेश का निरीक्षण किया. हर कोई कह रहा था, यह एक घातक संयोजन है.
लेकिन मैंने उनसे कहा, 'इसका सरोकार मैथमेटिन्न्स से नहीं बल्कि केमिस्ट्री से है.’ और लोगों के साथ हमारी बेहतर केमिस्ट्री है. हमारी केमिस्ट्री जीत गई और हमें 64 लोकसभा सीटें मिल गईं. अगली बार, हमें और मिलेगा. विपक्ष को मिलने दीजिए, उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है. जहां तक नतीजों की बात है, अगर आपने गलत मार्ग अपनाया है, तो आप सही मंजिल तक कैसे पहुंचेंगे?
- जब आप 'गलत रास्ता’ कहते हैं, तो आपका क्या मतलब है?
आप ही बताइए कि यह कैसी एकता है? केवल एक ही एकता है—अपने पारिवारिक हितों का ख्याल रखना. महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी के नेता अपने पारिवारिक हितों का ध्यान रखने के अलावा क्या कर रहे थे? अखिलेश यादव अपने पारिवारिक हितों का ख्याल रख रहे हैं, उमर (अब्दुल्ला) अपने हितों का ख्याल रख रहे हैं, (महबूबा) मुफ्ती भी यही कर रही हैं, उद्धव (ठाकरे) अपने बेटे आदित्य की रक्षा कर रहे हैं, स्टालिन अपने बेटे उदयनिधि की रक्षा कर रहे हैं—ये सभी अपने-अपने परिवारों के हितों की रक्षा कर रहे हैं. यहां तक कि (शरद) पवार साहब भी... वे अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. और कांग्रेस... राहुल गांधी. मैं आमतौर पर यही कहता रहा हूं कि यह मां, बेटे और बेटी की पार्टी है; बाकी सभी लोग कॉन्ट्रैक्ट या अनुबंध पर हैं.
- तो क्या वे आपके लिए खतरा नहीं हैं?
मैं कहता हूं कि जिसे भी भाजपा से मुकाबला करना है उसे पहले 45 साल तक काम करना होगा. अगर उस रास्ते पर चलेंगे तो हमारे स्तर पर पहुंच जाएंगे.
- पिछले साल बिहार में जद (यू) भाजपा को छोड़कर राजद के साथ महागठबंधन में शामिल हो गया. हाल ही में सीबीआइ ने करीब 15-20 साल पुराने एक मामले में लालू प्रसाद यादव और राजद के तेजस्वी को नोटिस भेजा था. ऐसा लगता है कि भाजपा उन पर निशाना साध रही है.
ऐसा बिल्कुल नहीं है. सबसे पहले, हमारा रुख यह है कि जिस किसी पर भी भ्रष्टाचार का आरोप होगा उसे आसानी से नहीं छोड़ा जाएगा. लिहाजा, कार्रवाई हो रही है. बिहार में हमारी रणनीति है कि हम विकास संबंधी और अच्छे सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे.
- भाजपा पर आरोप यह है कि जहां कहीं विपक्षी दल मजबूत होते हैं, वह उन राज्यों में सीबीआइ और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को उनके पीछे लगा देती है.
यह लोकतांत्रिक देश है. अगर विपक्ष को लगता है कि भाजपा नेता गलत काम कर रहे हैं तो उन्हें ईडी या अन्य एजेंसियों से शिकायत करनी चाहिए. अगर उसके बाद केंद्रीय एजेंसियां कोई कार्रवाई नहीं करतीं तो आपको शिकायत करनी चाहिए कि बेईमानी हो रही है.
- पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अपनी पकड़ बनाती नजर आ रही हैं.
भाजपा 2024 में पश्चिम बंगाल में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाएगी.
- हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में टीएमसी की जीत के बाद भी?
हर चुनाव अलग होता है. यहां तक कि इस निकाय चुनाव ने भी एक बात साबित कर दी—जहां भी पर्याप्त संख्या में पुलिस तैनात थी और कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रही, वहां भाजपा विजेता बनकर उभरी.
- ऐसा लगता है कि भाजपा कई सहयोगी दलों को खोने के बाद एनडीए को फिर से जिंदा करना चाहती है.
पहली बात, हमारे प्रदर्शन की वजह से किसी ने भी एनडीए नहीं छोड़ा. उन्होंने ऐसा अपनी वजहों से किया. उस वक्त हम कभी भी उनके खिलाफ नहीं थे; हम इस समय भी उनके खिलाफ नहीं हैं. हम उनकी ओर हाथ नहीं बढ़ा रहे हैं. लेकिन अगर वे हमारे पास आते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन था, जिसकी बदौलत उनके इतने सांसद हैं. शिवसेना ने गठबंधन तोड़ दिया. फिर अपने ही लोगों ने पार्टी तोड़ दी और अब वे हमारे साथ हैं. इस सब में हमने क्या किया? एनडीए वहीं खड़ा है जहां हमेशा था.
- अब बात करते हैं समान नागरिक संहिता या यूसीसी की. आपकी सरकार इसे पिछले नौ वर्षों के दौरान कभी भी पेश कर सकती थी. आपने इसे अपनी सरकार की दूसरी अवधि के आखिरी साल में लाने का फैसला क्यों किया?
यूसीसी लाना शुरू से ही हमारी प्रतिबद्धता रही है. इसके बारे में बहुत ज्यादा अटकलें लगाई जा रही हैं. हमें पहले इंतजार करना चाहिए और उत्तराखंड ड्राफ्ट को देखना चाहिए. इसे तैयार किया जा रहा है, विधि आयोग से सुझाव मांगे हैं, यह प्रक्रिया चल रही है. हम इस मामले को चुनाव के नजरिए से नहीं बल्कि देश के नजरिए से देखते हैं.
- लेकिन विपक्ष के बीच धारणा यह है कि यूसीसी को विभाजनकारी मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.
विपक्ष अपनी ही छाया से डरता है. हम इसके बारे में क्या कर सकते हैं? उन्हें हर चीज में किसी न किसी तरह की भाजपा की चाल नजर आती है...देश दिखता नहीं है, परिवार दिखता है (उन्हें देश की नहीं, सिर्फ 'परिवार’ की परवाह है). वे हमेशा भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने की कोशिश करते रहते हैं. इसीलिए जब ये लोग मुद्दों और विचारधाराओं के बारे में बात करते हैं, तो मुझे उनकी मंशा पर संदेह होता है.
- कर्नाटक की बात करें तो जहां भाजपा अपना प्रमुख मुद्दा जनकल्याण होने के बावजूद चुनाव हार गई; ऐसा लगता है कि कांग्रेस गरीबों के लिए गारंटियों का वादा करके जीत गई है. क्या लाभार्थी अब भाजपा का समर्थन नहीं कर रहे हैं?
मुफ्त में रेवड़ियां बांटने और सशक्तिकरण करने के बीच एक अंतर है. वे मुफ्त में चीजें देते हैं, हम सशक्तिकरण करते हैं. और देर-सबेर लोगों को यह बात समझनी होगी. हमने कर्नाटक में बहुत अच्छा काम किया. लेकिन हम लोगों तक सही संदर्भ में अपनी बात नहीं पहुंचा सके. इसका सबक यह है कि हमें अधिक कारगर ढंग से अपनी बात पहुंचानी होगी.
- कांग्रेस का कहना है कि ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कर्नाटक में बेरोजगारी ज्यादा थी और देशभर में बेरोजगारी है?
सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात, हमारी विकास दर 8.7 फीसद है. जो लोग अर्थशास्त्र को जानते हैं वे समझते हैं कि यह सबसे अच्छी जगह है, सबसे अच्छी स्थिति है, क्योंकि अच्छी विकास दर नौकरियां पैदा करती है. इस साल बुनियादी ढांचे पर 10 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिससे रोजगार पैदा हो सकता है. प्रधानमंत्री नियमित रूप से सरकारी क्षेत्र में रिक्तियों को भर रहे हैं. कांग्रेस और विपक्षी दल सिर्फ लोगों की भावनाओं से खेलने की कोशिश कर रहे हैं.
- राहुल गांधी ने भाजपा पर देश भर में नफरत फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि मोहब्बत की दुकान खोलने की जरूरत है. इस बारे में आपकी क्या राय है?
यह विपक्ष है जो नफरत की दुकान चला रहा है. क्या राहुल गांधी ने इस नारे का समर्थन नहीं किया, 'अफजल हम शर्मिदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’? अगर उनकी जगह मैं होता तो आप मुझसे 20 बार माफी मांग चुके होते. किसी ने राहुल गांधी से माफी मांगने को क्यों नहीं कहा? आप कहते हैं 'मोदी सब चोर हैं’, लेकिन माफी मत मांगिए. आपके अहंकार का स्तर यह है कि आप पूरे समुदाय का अपमान करते हैं और फिर विक्टिम कार्ड खेलते हैं. इसे आप नफरत नहीं तो क्या कहेंगे? आप कहते हैं कि आप मोहब्बत की दुकान खोलना चाहते हैं, लेकिन हमें समझ नहीं आता कि आप किस प्यार की बात कर रहे हैं और किसके प्रति? ये सब लोगों का ध्यान खींचने के तरीके हैं. ठ्ठ
‘‘अगर विपक्ष को लगता है कि भाजपा नेता उनके साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं तो उन्हें ईडी या अन्य एजेंसियों से शिकायत करनी चाहिए. अगर उसके बाद केंद्रीय एजेंसियां कोई कार्रवाई नहीं करतीं तो शिकायत करनी चाहिए कि बेईमानी हो रही है’’
‘‘हमारे प्रदर्शन की वजह से किसी ने भी एनडीए नहीं छोड़ा. उन्होंने ऐसा अपनी वजहों से किया. उस वक्त हम उनके खिलाफ नहीं थे; हम आज भी उनके खिलाफ नहीं हैं. अगर वे हमारे पास आते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है’’
‘‘यूसीसी लाना शुरू से ही हमारी प्रतिबद्धता रही है. इसे तैयार किया जा रहा है, विधि आयोग से सुझाव मांगे हैं, यह प्रक्रिया चल रही है. हम इसे चुनाव के नजरिए से नहीं बल्कि देश के नजरिए से देखते हैं’’

