बातचीतः सिनेमा तो संगीत का बहाना है

लता मंगेशकर ने 1981 में इंडिया टुडे के संवाददाता सुमित मित्रा से खास बातचीत की थी. यह बातचीत आज भी उतनी ही दिलचस्प लगती है

लता मंगेशकर
लता मंगेशकर

लता मंगेशकर ने 1981 में इंडिया टुडे के संवाददाता सुमित मित्रा से खास बातचीत की थी. यह बातचीत आज भी उतनी ही दिलचस्प लगती है

 आपके 10 सबसे अच्छे गाने कौन-से हैं?

मैं एकदम से तो याद नहीं कर सकती. फिर भी, कोशिश करती हूं. महल के 'आएगा आएगा’ से शुरू करें. फिर अनारकली का 'ये जिंदगी उसी की है’; 'आजा रे परदेसी’; 'ऐ दिलरुबा’; 'कहीं दीप जले कहीं दिल’; 'लग जा गले’; कितने हुए?

 छह.

ठीक है. फिर 'नैना बरसे’; 'वो चुप रहें तो मेरे दिल के’; 'तुम न जाने’; 'जीवन डोर तुम्हीं संग बांधी’; 'बीती ना बिताए’...

 आपके पहले 10 हमें मिल गए, पर इनमें एक भी ऐसा दिखाई नहीं देता जो पिछले आठ सालों में गाया हो. क्यों?

ओह, वाकई? लेकिन कुछ नए गाने काफी अच्छे हैं.

 तो भी आपको याद नहीं. क्यों?

इसमें मेरी गलती नहीं है. आजकल फिल्मों में आप जो सुनते हैं... क्या आप उसे संगीत कहेंगे? और क्या ये फिल्में हैं? आंय, धांय, धूम, धड़ाक—और हो गई फिल्म. मुझे यह सब बिल्कुल समझ नहीं आता.

 फिर भी आप इन फिल्मों के लिए गाती हैं? आप कैसे कर लेती हैं?

आप सीधा उत्तर चाहते हैं? तो लीजिए. मैं खाली दिमाग लेकर स्टुडियो में दाखिल होती हूं, सफेद कागज की तरह खाली. मैं केवल सिचुएशन के बारे पूछती हूं. क्या यह लड़की जंगल में गा रही है? क्या वह खुश है? क्या वह उदास है?

क्या वह अपने प्रेमी को छेड़ रही है? या क्या? फिर मैं गा देती हूं. ओके? ओके. मैं उतना ही खाली दिमाग लेकर चली आती हूं जितना वह शुरू में था. इसे आप पेशेवर हुनर कह सकते हैं, या प्रतिभा... या इसे कोई नाम दें. लेकिन मेरा जुड़ाव शून्य होता है.

 पहले कितना अलग था?

हर तरीके से अलग होता था. संगीत निर्देशक अलग होते थे. वह वक्त ही अलग था. श्रोता अलग होते थे. वे फिल्म में संगीत की उम्मीद करते थे, शोर-शराबे की नहीं. हर देश की फिल्मों की अपनी शैली है. हमारे देश में संगीत अच्छे सिनेमा का पारंपरिक हिस्सा रहा है.

 क्या आप संगीत से सजी-धजी फिल्मों के लौटने की उम्मीद करती हैं?

इसका लौटना तय है. शुरुआती संकेत तो हैं ही. धूम-धड़ाके का यह पागलपन टिक नहीं सकता.

 वह क्या है जो आपकी पीढ़ी के गायकों को मौजूदा गायकों से अलग करता है?

मैं विवाद पैदा करना नहीं चाहती.

 विवाद पैदा किए बिना क्या आप इस सवाल का जवाब दे सकती हैं?

हममें से हरेक... मुकेश भैया, रफी, आशा, मैं... हमने संघर्ष किया. आज हर कोई तुरत-फुरत शोहरत चाहता है. अब मुकेश तो गुजर गए, इन नौजवानों में छह ऐसे हैं जो मुकेश की ''तरह’’ गाने पर अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं. और हरेक गायिका को लता की ''तरह’’ गाना है.

 क्या ऐसा वक्त नहीं था जब आप नूरजहां की तरह गाती थीं?

मैं इसकी उम्मीद ही कर रही थी. नहीं, यह सच नहीं है. शुरुआती जिंदगी में मुझे हिंदी या उर्दू सीखने का मौका नहीं मिला. मेरे पिता के एक मराठी दोस्त थे, संगीतकार, जो मुझे नूरजहां को गौर से सुनने के लिए कहा करते थे, यह देखने के लिए कि उन्होंने 'बेकरार’ या 'पैगाम’ शब्द का उच्चारण कैसे किया है. मगर गायकी का मामला बिल्कुल अलग था.

 आपके पसंदीदा भारतीय गायक कौन-से हैं?

सहगल, के.एल. सहगल. मैं हमेशा अपनी उंगली में नवरत्न की अंगूठी पहनती हूं, जो सहगल की है, जो उनके बेटे ने मुझे दी थी. मैं उनसे कभी मिली नहीं. लेकिन मुझे लगता है वे पहले व्यक्ति थे जो गायन में अभिव्यक्ति लाए.

 क्या आप बता सकती हैं कि फिल्म संगीत आने वाले 10 सालों में किस रास्ते जाएगा?

नहीं. लेकिन यह निश्चित है कि संगीत भारतीय फिल्मों की सर्वोच्च खूबी बना रहेगा. भारत में सिनेमा तो संगीत का बहाना है.

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