कोई ध्रुवीकरण नहीं है, बात बस इतनी है कि कोई राष्ट्रवादी है या नहीं

कभी आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर की हरियाणा के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में अहम भूमिका थी. साढ़े चार साल मुख्यमंत्री रहने के बाद वे वही कामयाबी दोहराने की आस लगाए हैं. असित जॉली के साथ इंटरव्यू के अंशः

मनोहर लाल खट्टर
मनोहर लाल खट्टर

2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों का श्रेय मोदी लहर को दिया गया था. इस बार आप किस चीज पर भरोसा कर रहे हैं?

नरेंद्र मोदी और हमारी सरकार के काम दोनों पर. प्रधानमंत्री मोदी ने दिखा दिया है कि उनमें काम करने की काबिलियत है. लोग उनके काम की तुलना फौरन कांग्रेस की पिछली सरकारों के काम से करते हैं. आज दुनिया में हिंदुस्तान की जो इज्जत है, वह मोदी की बदौलत है.

मगर बीते पांच साल में ध्रुवीकरण तेज हुआ है.

धार्मिक आधार पर कोई ध्रुवीकरण नहीं है. बात बस इतनी है कि कोई राष्ट्रवादी है या नहीं. यह जनसंघ के दिनों में भी था और अब और भी तीव्र होगा.

मुसलमान आम तौर पर भाजपा के साथ नहीं जाते.

मुसलमानों को राष्ट्रवादी होना होगा. जब वे राष्ट्रवादी हो जाएंगे तो हमारे साथ और देश के साथ खड़े होंगे. जब तक वे कहते रहेंगे कि 'हम पहले मुसलमान हैं और फिर भारतीय हैं', तब तक वे कभी हमारे साथ (भारतीय) नहीं आ सकते. मैं राष्ट्रवादी हूं और देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दूंगा. मैं किसकी पूजा-उपासना करता हूं, यह मेरा निजी मामला है.

2014 के मुकाबले आपकी रणनीति में क्या बदलाव आया है?

आप जब सरकार में हैं तो यह स्वाभाविक है कि ज्यादा लोग आपमें निवेश करें. अब यह हमारे ऊपर है कि हम इस तरह की रणनीति बनाएं कि वे हमारी नीतियों और विचारधारा में निवेश करते रहें. हम बहुत बारीक स्तर पर चुनावों का बंदोबस्त कर रहे हैं. कोई 1,75,000 पन्ना प्रमुख नियुक्त किए गए हैं, हरेक को 60 वोटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

कृषि संकट लगातार बढ़ रहा है. स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं करने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

एम.एस. स्वामीनाथन ने करीब 30 सिफारिशें की थीं. उनमें से हमने हजारों मृदा हेल्थ कार्ड जारी किए हैं और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की है, जो 35 वर्षों से लटकी हुई थी. हरियाणा के किसानों को फसल के बर्बाद होने पर प्रति एकड़ 25,000 रुपए मिल रहे हैं. हमने देश में बेहतरीन एग्री मार्केटिंग सिस्टम कायम किया है और भावंतर भरपाई योजना शुरू की है, जिसमें बाजार की दरें उत्पादन लागत से कम होने पर किसानों की हर्जाना दिया जाता है. प्रधानमंत्री ने 17 फसलों के लिए लाभदायक कीमतों (उत्पादन लागत के ऊपर 50 फीसदी और) का ऐलान किया है. हम तो स्वामीनाथन (आयोग की सिफारिशों) से ज्यादा देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं.

रॉबर्ट वाड्रा के कथित संदिग्ध जमीन सौदों के खिलाफ आपने एस.एन. ढींगरा आयोग बनाया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ मामले दर्ज किए. लेकिन फिर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

वाड्रा या हुड्डा को पकडऩा कभी प्राथमिकता नहीं थी. हमने सबूत इकट्ठे करके जांच एजेंसियों को सौंप दिए. कांग्रेस ने आयोग के गठन के लिए अपनाई गई प्रकिया को चुनौती देकर जस्टिस ढींगरा की सिफारिशों पर आगे काम नहीं होने दिया. मगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआइ की जांच अभी चल रही है.

आपकी सरकार पर जाट आंदोलन और डेरा सच्चा सौदा की हिंसा को बेकाबू होने देने का आरोप लगा.

हमने 2016 के जाट आंदोलन पर तीन दिन से भी कम वक्त में काबू पा लिया था. डेरा (सच्चा सौदा) प्रमुख के मामले में कोर्ट के आदेश के मुताबिक हमने उन्हें पंचकुला (कोर्ट) में पेश किया. बड़ी समस्याओं को टालने के लिए छोटे-छोटे नुक्सान हुआ करते हैं (2017 में डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने के बाद हुई हिंसा के संदर्भ में).

कई लोगों का कहना है कि निगम चुनावों और जींद के उपचुनाव में आपकी कामयाबी जाट वोटों के बंटने का नतीजा थी.

किसी को भी जाति के आधार पर वोट क्यों देना चाहिए? असली मुद्दे विकास और पारदर्शिता हैं. हमें राष्ट्र हित की खातिर जातिवाद से ऊपर उठना होगा.

लोकसभा चुनाव के लिए आपकी भविष्यवाणी क्या है?

पिछली बार हमने हरियाणा में आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था और उनमें से सात जीती थीं. हम रोहतक में हारे थे. इस बार मुझे यकीन है कि भाजपा रोहतक भी जीतेगी. जाति के जोड़-तोड़ के बावजूद हम दसों निर्वाचन क्षेत्र में बहुत आरामदायक हालत में हैं. पूरे देश में एनडीए 350 के आसपास रहेगा.

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