हमारी नई पालिसी है, फंड दो और भूल जाओ

विश्वविद्यालयों को समय के साथ चलने के लिए हर दो साल में पाठ्यक्रम में सुधार करना चाहिए. यूजीसी और एआइसीटीई अगले साल से मॉडल पाठ्यक्रम प्रकाशित करेंगे.

बदलाव के पैरोकार केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रकाश जावडेकर
बदलाव के पैरोकार केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रकाश जावडेकर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का मानना है कि इंडिया टुडे का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों का सर्वे ठोस कसौटियों पर परखे जाने के कारण अपना विशेष स्थान रखता है. उन्होंने देश में विश्वविद्यालयी शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने की केंद्र की योजनाओं के बारे में सीनियर एसोसिएट एडिटर कौशिक डेका से बात की. बातचीत के मुख्य अंशः

विश्वविद्यालयी शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में पिछले चार वर्ष में कौन-से बड़े सुधार किए गए हैं?

हमने उच्च शिक्षा संस्थानों को पहले से ज्यादा स्वायत्तता दी है, शोध और नवाचारों पर बल दिया है, शिक्षा की क्वालिटी को बेहतर बनाया है और डिजिटल शिक्षा शुरू की है. लेकिन परिणाम दिखने में वक्त लगता है. हम सही दिशा में काम कर रहे हैं, सभी पक्षों को विश्वास में ले रहे हैं.

आलोचक कहते हैं कि सरकार विश्वविद्यालयों में बहुत दखल दे रही है, मसलन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय में.

दखल देने का सवाल ही नहीं. उलटे, हम तो और अधिक स्वायत्तता देने की कोशिश कर रहे हैं. हमने इन संस्थानों को ज्यादा स्वायत्तता देने के लिए आइआइएम बिल पास किया. हमें अपने बेहतरीन संस्थानों पर यकीन रखना चाहिए—अगर हम यकीन नहीं करेंगे तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे. हमारा नया दर्शन है कि फंड दो और भूल जाओ. केवल इसलिए कि सरकार ने इन संस्थानों को पैसे दिए हैं, यह जरूरी नहीं है कि वह इन्हें नियंत्रित करे, खासकर जब वे अच्छा काम कर रहे हैं.

अगर वे अच्छा काम नहीं कर रहे हैं तो उन्हें सुधारने के लिए सरकार के पास अधिकार हैं. दूसरे संस्थानों के लिए मैंने चरणबद्ध स्वायत्तता शुरू की है—अच्छा काम करने वाले संस्थानों को पुरस्कृत करो ताकि दूसरे संस्थान अच्छा काम करने के लिए प्रोत्साहित हों. पंद्रह फीसदी संस्थान, जिन्हें ए-प्लस की श्रेणी में रखा गया है, उन्हें आइआइएम की तरह 75 प्रतिशत स्वायत्तता मिलेगी. हम 20 श्रेष्ठ संस्थानों की सूची तैयार कर रहे हैं.

भारतीय विश्वविद्यालय अनुसंधान और नवाचार में निक्वन स्तर के कारण वैश्विक रैंकिंग में जगह नहीं बना पाते.

अनुसंधान और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इक्विप्रंट (इन्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन ऐंड टेक्नोलॉजी) कार्यक्रम में 10 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें सुरक्षा और प्रतिरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, टिकाऊ प्राकृतिक आवास, स्वास्थ्य, नैनोटेक्नोलॉजी और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं. उच्चतर आविष्कार योजना में उद्योग और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है.

स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के बड़े प्रयास के कारण 400 से ज्यादा उद्यमों ने हॉस्टल के कमरों से जन्म लिया है. प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के लिए 1,000 आवेदन मिले हैं, इसमें आइआइटी और आइएससी में पीएचडी के लिए सीधे प्रवेश की सुविधा है. इसके अलावा हमने छह रिसर्च पार्क भी बनाए हैं: आइआइटी मद्रास रिसर्च पार्क तो मुनाफा भी कमा रहा है.

सबसे क्रांतिकारी कदम हायर एजुकेशन फंडिंग एजेंसी (एचइएफए) को शुरू करना रहा है, जिसका लक्ष्य बाजार से 20,000 करोड़ रु. की रकम जुटाना और उसको सरकारी संस्थानों को ब्याज-मुक्त कर्ज के तौर पर मुहैया कराना है. हम पहले ही 5,000 करोड़ रु. दे चुके हैं.

इससे रिसर्च की सुविधाओं में तेजी से विकास होगा. प्रतिभाशाली छात्र देश में अनुसंधान की अच्छी व्यवस्था, गाइड और छात्रवृत्ति न होने के कारण पढ़ाई के लिए विदेश चले जाते हैं. एचईएफए के माध्यम से हम ये तीनों सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. हमारा मकसद देश में शोध और आविष्कार की संस्कृति तैयार करना है. आविष्कार अकेले ही हमारे देश को स्थायी समृद्धि की तरफ ले जा सकता है.

आम तौर पर विश्वविद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है, खासकर टेक्निकल स्ट्रीम में सुधार है?

हमने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के लिए खर्च को तिगुना कर दिया है, जिसका लक्ष्य उच्च शिक्षण संस्थानों को योजनाबद्ध तरीके से पैसा उपलब्ध कराना है. हमारा लक्ष्य 10 राज्य विश्वविद्यालयों और 70 स्वायत्तशासी महाविद्यालयों में क्वालिटी और उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देना और 50 विश्वविद्यालयों तथा 750 महाविद्यालयों में ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराना है.

विश्व बैंक ने भारत के टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को विश्व के सर्वश्रेष्ठ कार्यक्रमों में से एक बताया है. इस योजना के तहत 15 राज्यों के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में करीब 1,200 रिक्तियां भर दी गई हैं जो कुल रिक्तियों का 80 प्रतिशत हैं.

उच्च शिक्षण संस्थानों को बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में ले जाने के लिए क्या किया जा रहा है?

हमारे यहां 840 विश्वविद्यालय हैं, लेकिन दिल्ली में हम एक ही विश्वविद्यालय के पीछे भागते हैं. हम कुछ जिलों में 70 मॉडल डिग्री कॉलेज और आठ प्रोफेशनल कॉलेज खोल रहे हैं. हम 'स्वयं' (स्टडी वेब्स ऑफ ऐक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स) जैसी तकनीकी और देश के दूरदराज की जगहों पर डिजिटल और टेलीविजनयुक्त कक्षाएं उपलब्ध कराने वाले 32 डीटीएच चैनलों के समूह स्वयं प्रभा के जरिए क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने की उम्मीद कर रहे हैं.

'स्वयं' मुफ्त में ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराता है. इसमें 1,032 कोर्स रखे गए हैं और यह 22 लाख लोगों को अपनी सेवाएं दे रहा है. अगले तीन साल में हम इसे 2 करोड़ लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं. जीआइएएन (ग्लोबल इनीशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवक्स्र) के तहत 58 देशों के 700 प्रोफेसर प्रत्येक कोर्स पढ़ाने के लिए भारत में दो सप्ताह बिता चुके हैं. इस साल 62 देशों से 800 प्रोफेसर आएंगे. 2016 में शुरू की गई नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी में 1.7 करोड़ पुस्तकें हैं.

भाजपा के 2014 के घोषणापत्र में छात्रों को पढ़ाई के लिए ज्यादा कर्ज देने और आवेदन की प्रक्रिया आसान बनाने का वादा किया गया था.

यूपीए सरकार ने गरीब छात्रों को शिक्षा के लिए साल में ब्याज पर 800 करोड़ रु. दिए थे. हमारी सरकार ने पिछले तीन वर्ष में सालाना 1,800 करोड़ रु. खर्च किए हैं, जिससे 8,00,000 छात्रों को लाभ हुआ है. अगले तीन साल में हम दस लाख छात्रों के लिए इस रकम को बढ़ाकर 2,200 करोड़ रु. करने जा रहे हैं.

क्या हम उच्च शिक्षा के लिए एकीकृत नियामक व्यवस्था देखने जा रहे हैं?

हायर एजुकेशन एंपावरमेंट रेगुलेशन एजेंसी (एचईईआरए) बनाने से पहले हम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन में सुधार पर काम कर रहे हैं. हम पहले ही नेशनल एसेसमेंट ऐंड एक्रेडिटेशन काउंसिल को अधिक पारदर्शी बना चुके हैं.

खबर है कि एचईईआरए की योजना को रद्द किया जा रहा है.

यह सही नहीं है. हम एचईईआरए पर काम कर रहे हैं. इन कामों में समय लगता है.

उच्च शिक्षा में योग्यता का एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए आपने क्या कदम उठाए हैं?

हम एक प्रोफेशनल नाम के साथ सामान्य डिग्रियां शुरू कर रहे हैं. अगले साल हम बीए (प्रोफेशनल) कोर्स शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं. इसमें 1,000 घंटे का अतिरिक्त पाठ्यक्रम होगा जिसमें आइसीटी (इन्फॉर्मेशन ऐंड कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी), व्यक्तित्व विकास और ऐसे ही दो अन्य कोर्स होंगे.

उच्च शिक्षा में लड़कियों की संख्या काफी कम है.

आइआइटी में लड़कियों की संक्चया केवल 8 प्रतिशत है. आइआइटी काउंसिल की पहली बैठक में मैंने कहा था कि लड़कियों की संख्या 20 प्रतिशत तक पहुंचाई जानी चाहिए. पिछले साल हमने लड़कियों के लिए अलग से सीटों का एक कोटा लागू किया था ताकि 2026 तक लड़कियों की संक्चया 20 प्रतिशत तक पहुंच सके. हम 12वीं तक लड़कियों को मुक्रत शिक्षा देने पर काम कर रहे हैं. अगर लड़कियां 12वीं कर लें तो वे कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर लेंगी.

उच्च शिक्षा में अध्यापकों की काबिलियत बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा रहा है?

हमने कॉलेज के नए अध्यापकों के लिए एक महीने का अनिवार्य कोर्स शुरू किया है. 2021 से कॉलेज के अध्यापकों के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्य होगी.

विश्वविद्यालयी शिक्षा को ज्यादा रोजगारपरक कैसे बनाया जा सकता है?

विश्वविद्यालयों को समय के साथ चलने के लिए हर दो साल में पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सुधार करना चाहिए. बहुत से विश्वविद्यालयों ने पिछले 15 वर्षों से यह काम नहीं किया है. अगले वर्ष से यूजीसी और एआइसीटीई एक मॉडल पाठ्यक्रम प्रकाशित करेंगे. विश्वविद्यालय उससे मदद ले सकते हैं.

हम कब तक नई शिक्षा नीति की उम्मीद कर सकते हैं?

जल्दी ही यह नीति बनकर सामने आ जाएगी. मैंने 14 जून को पहला मसौदा देखा था.

इस बात को लेकर आलोचना होती है कि खास विचारधारा से संबंध रखने वाले व्यक्तियों को कुछ विश्वविद्यालयों में कुलपति बनाया गया है.

सभी कुलपतियों की नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर हुई है.

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