किस तरह भूलेगा दिल उनका ख्याल आया हुआ...
नूरजहां को उनकी मां ने बचपन में ही शास्त्रीय गायिका कज्जन बाई से तालीम दिलानी शुरू की जो उनसे रोज 12 घंटे रियाज कराती थीं

मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां
यतीन्द्र मिश्र
मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां का यह जन्मशताब्दी वर्ष है. उनका जन्म 21 सितंबर, 1926 को कसूर (अविभाजित भारत) में हुआ, जो ब्रिटिश इंडिया के अंतर्गत पंजाब प्रांत में आता था. वे दक्षिण एशियाई देशों में भारत की प्रतिनिधि पार्श्वगायन की आवाजों में सबसे मुखर उपस्थिति थीं, जिनकी समकालीन अमीरबाई कर्नाटकी, जोहराबाई अंबालावाली और कानन देवी रहीं.
हालांकि, नूरजहां और सुरैया के रूप में स्वतंत्रता पूर्व भारत की मात्र दो ही पार्श्वगायिका-अभिनेत्रियां थीं, जिनका डंका बजता था. उन्हें तराशने में मास्टर गुलाम हैदर, हफीज खां, श्याम सुंदर और नौशाद जैसे संगीतकारों की अग्रणी भूमिका रही.
1947 में विभाजन के साथ नूरजहां पाकिस्तान चली गईं और हिंदी संगीत का एक बड़ा सितारा पड़ोसी देश के पार्श्वगायन की आवाज बनकर हमसे बिछुड़ गया. यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि नूरजहां का सांगीतिक और फिल्मी योगदान भारतीय हिंदी फिल्मों के कारण ही सार्वकालिक महत्व का बन पाया जबकि वे अपनी मृत्यु तक पाकिस्तान में बतौर गायिका सक्रिय रहीं.
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में पारंगत नूरजहां ने पटियाला घराने के उस्ताद गुलाम मोहम्मद से ठुमरी, ध्रुपद और ख्याल की गायकी सीखी थी. उनकी मां ने बचपन में ही उनको प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका कज्जन बाई से तालीम दिलानी शुरू की थी, जो हर दिन बारह घंटे कठिन रियाज कराती थीं.
वे हिंदी फिल्म संगीत के उन प्रारंभिक प्रतिनिधि चेहरों में से एक हैं जिन्होंने गायकी में बोलों के बरतने को बिल्कुल स्पष्ट और नाटकीयता से दूर, सहज ढंग से संभव किया. शायद इसी कारण वे आज भी उसी तरह अमर हैं जिस तरह के.एल. सहगल, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी बेजोड़ रहे.
उनकी अभिनीत और पार्श्वगायन वाली फिल्मों की सूची देखने योग्य है, जिसमें 1945 में प्रदर्शित तीन बड़ी फिल्में, जीनत, गांव की गोरी और बड़ी मां यादगार रहीं.
आज की शब्दावली में कहें तो 1946 में प्रदर्शित महबूब खान की अनमोल घड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई जिसमें उनके समक्ष बतौर हीरो सुरेंद्र और सह-नायिका सुरैया मौजूद थे. देश की आजादी वाले साल दो बड़ी फिल्में मिर्जा साहिबां और जुगनू प्रदर्शित हुईं. जुगनू में महान अभिनेता दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी थी. अन्य महत्वपूर्ण फिल्मों में धीरज, चांदनी और खानदान (1942), नौकर (1943), दोस्त (1944), हमजोली (1946) और भाईजान (1945) हैं.
खानदान फिल्म से ही उनका नायिका का करिअर शुरू हुआ था, जिसमें उनके समक्ष प्राण थे. उनके गाए सदाबहार गीतों की संख्या सैकड़ों में होगी जिसे आज भी अगर यू-ट्यूब पर सुनें तो आश्चर्य होता है कि बीते दौर में जब सिंगल ट्रैक, एनालॉग तकनीकों में संगीत रिकॉर्ड किया जाता था, उस समय नूरजहां अपने स्वरों के उतार-चढ़ाव, आरोह-अवरोह, मींड-मुरकी का काम अत्यंत दक्षता से निभाती थीं.
पार्श्वगायिका लता मंगेशकर ने हमेशा स्वीकारा कि उन्होंने फिल्मों में पार्श्वगायन का व्याकरण नूरजहां का अनुसरण करते हुए सीखा. मोहम्मद रफी उनके साथ डुएट गाने के तलबगार थे. यह मिसाल है कि नूरजहां की गायकी को भारत के बड़े गायकों ने जतन से सुना, सराहा, पाठ्यपुस्तक की तरह पढ़ा और पाकिस्तान जा बसने के बाद भी उन्हें अपना मानते रहे.
नूरजहां के कुछ बेहतरीन गाने उनके शताब्दी वर्ष में याद किए जा सकते हैं जो उनकी अमरता के लिए पर्याप्त हैं. अनमोल घड़ी का सुरेंद्र के साथ ‘आवाज दे कहां है’ तो ऐतिहासिक है ही, ‘जवां है मुहब्बत हसीं है जमाना’ और ‘आ जा मेरी बर्बाद मुहब्बत के सहारे’ आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर है. बड़ी मां का ‘दिया जलाकर आप बुझाया’ हिंदी फिल्म संगीत के सर्वश्रेष्ठ गीतों में शुमार है.
विलेज गर्ल का ‘किस तरह भूलेगा दिल उनका ख्याल आया हुआ’, जीनत का ‘आंधियां गम की यूं चलीं’ और ‘बुलबुलों मत रो यहां’, जुगनू का ‘आज की रात, साज-ए-दिल पुरदर्द न छेड़’ ऐसे गीत हैं, जिन्हें शताब्दियों तक याद किया जाएगा.
पाकिस्तान में बनी फिल्म दुपट्टा (1952) का उनका बेहद सुरीला और सदाबहार गीत ‘चांदनी रातें’ आज भी भारत में लोकप्रिय है. उन्होंने नात, गजल, सुगम संगीत, मिर्जया सब गाया. पंजाबी गानों को उन्होंने अपनी लय, धमक और शोखी में बेमिसाल बनाया, जैसे ‘सानू नैर वाले पुल ते बुलाके, ते खोरे माही कित्थे रह गया’, ‘केसरी दुपट्टा गल कुर्ती शनील दी’ और ‘सैयो नी मेरा माही मेरे भाग जगावन आ गया’.
लता मंगेशकर को उनकी एक गैर फिल्मी कंपोजिशन गुल खिले चांद रात विशेष तौर पर प्रिय थी. लता जी ने मुझे एक बार संस्मरण सुनाया था कि नूरजहां उनसे जब भी मिलती थीं तो संगीतकार खय्याम के संगीत निर्देशन में रजिया सुल्तान का ‘ऐ दिल-ए-नादां’ सुनने की फरमाइश करती थीं.
नूरजहां फिल्म संगीत का ऐसा बड़ा सितारा रहीं, जिनकी खूबसूरत गायकी ने पिछली सदी को रोशन कर रखा है. यह उनकी शोहरत के खाते में दर्ज है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही उनकी गायकी और अभिनय का एहतराम करते हैं. उनके जन्म शताब्दी वर्ष में भारतवर्ष के संगीत प्रेमियों का उनको सलाम.