पहचान बनाती आवाज

खुद का संगीतबद्ध ‌सिंगल रिलीज करने को तैयार मधुवंती बागची कहती हैं कि अपना संगीत रचना ब्लॉकबस्टर गानों से अलग पहचान बनाने का एकमात्र उपाय.

Leisure: Sangeet
इस साल के अलीगढ़ महोत्सव में बागची

देवर्षि घोष

संजय लीला भंसाली की नेटफ्लिक्स सीरीज हीरामंडी  की ठुमरी ‘नजरिया की मारी’ और स्त्री 2 के ब्लॉकबस्टर आइटम गाने ‘आज की रात’ की कामयाबी को अभी दो ही साल हुए हैं लेकिन मधुवंती बागची ने अपने को महिला पार्श्वगायन के आने वाले दिनों के बड़े सितारे की तरह स्थापित कर लिया है.

मुफस्सिल बंगाल की इस गायिका ने सुनिधि चौहान, शिल्पा राव और श्रेया घोषाल के बीच की जगह में अपने को अच्छी तरह फिट कर लिया है और रिकॉर्डिंग बूथ में प्रीतम, विशाल भारद्वाज और सचिन-जिगर सरीखे दिग्गज संगीतकारों की तरफ से उनकी काफी मांग है.

पिछले साल धुरंधर के सुपरहिट गाने ‘शरारत’ में उनकी आवाज सुनाई दी थी. बागची बताती हैं, “घर का खर्च तो प्लेबैक सिंगिंग से निकल आता है. बात जब मेरे अपने संगीत की और मेरी पहचान की हो तो मैं वही करूंगी जो मैं चाहती हूं.”  

बागची ने संगीत की शिक्षा आगरा घराने में ली लेकिन उन्हें तड़क-भड़क भरा संगीत और हिप-हॉप भी उतना ही पसंद है. जल्द ही वे एक मौलिक संगीत रचना रिलीज करेंगी जिसमें उन्होंने गाया भी है. बागची साबित करना चाहती हैं कि महज ‘आज की रात’ ही उनकी पहचान नहीं, “अपनी तरह का संगीत मुझे खुद ही रचना होगा.”

बागची का यह भी कहना है कि आजकल की हिंदी फिल्मों में बिरले ही ऐसे महिला एकल गाने होते हैं जो आइटम सॉन्ग न हों, खासकर जिन्हें नायिका अकेले गा सके. “बहुत फिल्में धुरंधर की तरह संगीत का इस्तेमाल नहीं करतीं. मर्दानगी भरी फिल्म होने के बावजूद इसके ज्यादातर गाने गायिकाओं ने गाए हैं.”

अपने गैर-फिल्मी काम में बागची मुरीदों को अब के सावन, गजल लबों से बात करो और अपना ही संगीतबद्ध कैसे हम सुनने की सलाह देती हैं. कैसे हम उन्होंने 2024 में गुजर गई अपनी बिल्ली छीट (बांग्ला में जिसका मतलब है ‘पागलपन’) की याद में रचा था. 

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