वादा था चार का, बिल्डर ने बनाए पांच
स्मृति अपार्टमेंट में दो बेडरूम फ्लैट वाले 18 मंजिला दो टॉवर और तीन बेडरूम फ्लैट वाले 18 मंजिला दो समेत कुल चार टॉवर के निर्माण की जानकारी एलडीए ने ब्रॉशर में दी थी लेकिन बिल्डर ने पांचवां टॉवर भी बनाना शुरू कर दिया.

लखनऊ
लखनऊ के जयपुरिया इंस्टीट्यूट में मार्केटिंग ऐंड जनरल मैनेजमेंट विभाग में प्रोफेसर शुभेंद्र सिंह परिहार ने वर्ष 2011 में खुद का एक घर होने का सपना संजोया था. उस वक्त लखनऊ में कुर्सी रोड पर गुडब्बा थाने के बगल में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने स्मृति और सृष्टि अपार्टमेंट नाम से हाउसिंग सोसायटी प्रोजेक्ट लॉन्च किया था.
लॉटरी से शुभेंद्र ने स्मृति में साढ़े चार लाख रुपए का दो बेडरूम वाला फ्लैट बुक कराया. एलडीए ने तीन साल में फ्लैट देने का वादा किया था. तीन साल में फ्लैट बनाने का वादा करने वाला एलडीए सात साल बाद वर्ष 2018 में भी फ्लैट नहीं बना पाया. इस बीच निर्माण कंपनी ने मार्क कंस्ट्रक्शन ने एलडीए को 12 करोड़ का चपत लगा कर काम छोड़ दिया.
एलडीए ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करते हुए दूसरी कंपनी के जरिए स्मृति अपार्टमेंट का काम पूरा कराया. आठ साल बाद वर्ष 2019 में शुभेंद्र ने फ्लैट की रजिस्ट्री कराई और रहना शुरू किया. स्मृति अपार्टमेंट में दो बेडरूम फ्लैट वाले 18 मंजिला दो टॉवर और तीन बेडरूम फ्लैट वाले 18 मंजिला दो समेत कुल चार टॉवर के निर्माण की जानकारी एलडीए ने ब्रॉशर में दी थी लेकिन बिल्डर ने पांचवां टॉवर भी बनाना शुरू कर दिया.
दूसरे आवंटियों के साथ मिलकर शुभेंद्र ने इस प्रकरण की शिकायत एलडीए के उच्च अधिकारियों से की तो टॉवर का निर्माण तो रुक गया लेकिन यह आधा-अधूरा अभी तक खड़ा हुआ है. एलडीए ने आवंटियों को जो सुविधाएं देने का वादा किया था वे महज सब्जबाग ही साबित हुई हैं. एलडीए के उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी बताते हैं ''स्मृति अपार्टमेंट में जो सुविधाएं अभी तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं उनकी सूची मंगाई गई है. जल्द ही समस्याओं का निस्तारण कराया जाएगा.’’
लखनऊ के बालूअड्डा इलाके में यजदान बिल्डर ने नवंबर 2015 में नजूल की 28 हजार वर्गमीटर जमीन पर बिल्डिंग बनाने का काम शुरू किया था, 2016 में एलडीए के तत्कालीन ओएसडी ने नोटिस देकर उसे सील कराया था, लेकिन बिल्डर द्वारा मिलीभगत करके निर्माण जारी रखा गया.
लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे कहते हैं, ''अगर नजूल की जमीन पर अपार्टमेंट बना था और यह बात एलडीए अफसरों को पता थी, तो फिर शमन मानचित्र का 75 लाख रु. बिल्डर से क्यो जमा कराया गया?’’ एलडीए सचिव पवन गंगवार बताते हैं, ''नजूल की जमीन पर बने यजदान अपार्टमेंट की गहन जांच कराई जा रही है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी’’
इस बीच यूपी रेरा ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अफसरों के मुताबिक रेरा अधिनियम में कहा गया है कि आदेशों का पालन दीवानी न्यायालय की डिक्री से कराई जाएगी. रेरा ने सिविल प्रक्रिया संहिता-1908 की शक्तियों के तहत कार्रवाई का फैसला किया है. अगर बिल्डर आदेश पर कब्जा या रजिस्ट्री नहीं करेगा तो रेरा के अफसर संपत्तिक अटैच कर रिसीवर नियुक्त करेंगे.
89 प्रतिशत यानी 39,709 शिकायतों का निस्तारण अब तक कर चुका है यूपी रेरा.