इमारतें सील पर ध्वस्त करने में ठिठका जेडीए

एक साल में जयपुर विकास प्राधिकरण ने नियम विरुद्ध बनाई गई 48 इमारतों को सील किया. इनमें से कई इमारतें तो नियमों को दरकिनार कर बनाई गई थी.

अवैध निर्माण पर प्रहार : सितंबर 2012 में जयपुर के अमानीशाह नाले के नजदीक बने तीन टॉवरों को विस्फोट से उड़ाया गया
अवैध निर्माण पर प्रहार : सितंबर 2012 में जयपुर के अमानीशाह नाले के नजदीक बने तीन टॉवरों को विस्फोट से उड़ाया गया

जयपुर

राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में 907 फ्लैट वाले अरावली गार्डन प्रोजेक्ट में 200 परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. समय सीमा गुजर जाने के ढाई साल बाद भी इन परिवारों को न आवास मिले, न पैसा. 27 नवंबर 2013 को इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ जो 25 अक्तूबर, 2020 तक पूरा होना था लेकिन बिल्डर ने काम अधूरा छोड़ दिया.

खरीददारों की शिकायत के बाद रेरा ने अक्तूबर 2021 में इस अधूरे प्रोजेक्ट और फ्लैट्स पर कब्जा ले लिया, लेकिन इसके बाद भी बुकिंगकर्ताओं को न आवास मिला और न ही पैसा. प्रोजेक्ट कब्जे में लेने के बाद रेरा ने भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीड़ा) को जमीन नीलाम करने की जिम्मेदारी दी, लेकिन अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. जमीन को बेचकर बुकिंगकर्ताओं को पैसा लौटाना है. 17484 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट बनाया जा रहा था.

केस: 2 जयपुर के दुर्गापुरा स्थित एफएस हाउसिंग प्रा. लि. ने अपने प्रोजेक्ट द क्रेस्ट के लिए पिछले साल एक जून को रेरा में कम्पलीशन सर्टिफिकेट दे दिया.  इस आधार पर कुछ बुकिंगकर्ताओं ने 'गृह प्रवेश’ भी कर लिया, लेकिन इसके बाद भी मौके पर निर्माण कार्य चलता रहा. लोग अब भी बिल्डर से अधिवास प्रमाण पत्र लेने का इंतजार कर रहे हैं.

नियमों के तहत यह प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही लोग बिल्डिंग में रहने के पात्र होंगे. इस प्रोजेक्ट का काम करने के लिए रेरा चार बार एक्सटेंशन दे चुका है. 31 मई 2021 को एक्सटेंशन खत्म होने से प्रोजेक्ट लैप्स हो गया. प्रमोटर की ओर से चौथी बार एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया गया, लेकिन रेरा ने आवेदन को खारिज कर दिया. बाद में अथॉरिटी ने एक दिन का एक्सटेंशन स्वीकृत किया.  

एक साल में जयपुर विकास प्राधिकरण ने नियम विरुद्ध बनाई गई 48 इमारतों को सील किया. इनमें से कई इमारतें तो नियमों को दरकिनार कर बनाई गई थी. जेडीए की ओर से सील की गई कई इमारतों में सील के बाद भी काम चलता रहा और पूरी इमारत तैयार होने के बाद उसे बेच भी दिया गया. इसके बाद जेडीए ने यह आदेश निकाला कि कहीं भी सील तोड़कर अवैध निर्माण किया गया तो ऐसे निर्माण को ध्वस्त कर भवन मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.

हकीकत में मुकदमा दर्ज कराना तो दूर जेडीए की ओर से अवैध निर्माण को तोड़ने की भी बहुत कम कार्रवाई हुई हैं. जयपुर में जब सील की गई इमारतों की जांच की गई तो 110 इमारतें ऐसी मिली जिनमें सील टूटी मिली. राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण मानसरोवर एक्सटेंशन में किए गए हैं. स्वेज फार्म संयुक्त संघ के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि, ''अवैध इमारतों में जेडीए की सील की डील चलती है. अवैध निर्माण तो जेडीए, अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से ही हो रहे हैं.’’

6 मार्च, 2019 को राजस्थान सरकार ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी निहाल चंद गोयल की अध्यक्षता में राजस्थान रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन किया. रेरा ने पिछले दिनों एक आदेश जारी कर यह कहा कि, ''प्रोजेक्ट में 8 से अधिक फ्लैट बनाने वाले हर बिल्डर को प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत कराना होगा, चाहे प्लॉट साइज 500 वर्ग मीटर से छोटा हो या बड़ा.’’ कुछ बिल्डर 500 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट पर बने प्रोजेक्ट पंजीकृत नहीं करा रहे थे.  
हालांकि, पिछले 10 साल में जयपुर में हजारों अवैध इमारतें खड़ी हो गई लेकिन इसके बाद जयपुर विकास प्राधिकरण ने कभी शहर में उस तरह बहुमंजिला इमारतों पर कार्रवाई नहीं की जैसी 2012 में विस्फोटक से बिल्डिंग उड़ाकर की थी.

2042 प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड हुए राजस्थान में अगस्त 2022 तक  

—आनंद चौधरी

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