आवरण कथाः करना पड़ता है भाई

इंडिया टुडे में काम करने वाले कुछ योद्धा जिन्होंने कोविड को मात दी; संक्रमण होने और उससे लड़कर उबरने तथा उसके बाद के अपने अनुभवों को साझा करते हुए.

अमिताभ श्रीवास्तव,  सीनियर एसोसिएट एडिटर
अमिताभ श्रीवास्तव,  सीनियर एसोसिएट एडिटर

कोविड पॉजिटिव: 7 अप्रैल
स्थिति: इलाजरत
जगह: पटना
अमिताभ श्रीवास्तव,  सीनियर एसोसिएट एडिटर

अपने परिवार के लिए रोज तीन वक्त का खाना/नाश्ता बनाने की कोशिश में छीलते-काटते-छौंकते हुए पिछले हफ्ते मैंने कई जगह हाथ काट लिए और जल गया. मैंने कभी इस तरह खाना नहीं बनाया, पर क्या कीजिएगा! जरूरत पडऩे पर करना ही पड़ता है. 7 अप्रैल को हमारा परिवार कोविड पॉजिटिव हो गया. पत्नी सुनंदा और मेरा टेस्ट पॉजिटिव निकला. शुक्र था कि 11 वर्षीया बेटी साइया बच निकली.

यह सब 5 अप्रैल की मायूस सुबह शुरू हुआ. मैंने देखा कि मेरी पत्नी तेज बुखार से कंपकंपा रही थीं. दो दिन बाद टेस्ट ने तस्दीक की कि हमें कोविड था. मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत से ही हम वायरस से बचने में कामयाब रहे थे. यहां तक कि तब भी जब मैं काम के सिलसिले में क्वारंटीन केंद्रों पर जाता और महामारी की खबरें करता. यह सब मास्क की अच्छी आदतों की बदौलत हुआ, पर ताजा उभार के वक्त मैं किसी न किसी तरह मास्क की अनदेखी करने लगा था.

हमारी बेटी को हमारे दो बेडरूम के अपार्टमेंट के एक कमरे में डाल दिया गया. वह ज्यादातर उसी में घिरकर रह गई है. पहली रात को मैंने उसे कमरे से बाहर कुछ खोजते देखा था. वह उसकी डॉल थी जिसे वह अपने साथ सुलाना चाहती थी.

दवाइयां लेने और अपने लक्षणों से निबटने की समूची उदासी के बीच मेरी पत्नी की स्थिति मुझसे बदतर है. मैं तो खुशी और मौज-मस्ती के कुछ लम्हे चुरा ही लेता हूं—सद्गुरु जग्गी वासुदेव के वीडियो से शांति और ज्ञान हासिल करके, अपनी बेटी (जिसे सेलफोन पर मुझे कॉल करके ‘रूम सर्विस का ऑर्डर देना अच्छा लगने लगा है) के लिए हॉर्लिक्स बनाकर और अपने भीतर के पत्रकार को कुछ वक्त के लिए छुट्टी देकर.

हम यह पक्का पता नहीं लगा पाए हैं कि वायरस हमारे घर में घुसा कैसे (यह 31 मार्च को मेरे सरकारी सचिवालय जाने से आया या शायद एसी सर्विस के लिए आए तकनीशियनों से). पर अब मेरे लिए इसका मतलब नहीं रहा. अलग-थलग रहते हुए अब मेरा मकसद अगली बार पहले से बेहतर सब्जी बनाना होता है, वह इसलिए कि बेटी को पिता की खराब कुकिंग की वजह से तकलीफ उठाते न देखना पड़े.

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