आवरण कथाः लौट आई बीमारी

यहां तक कि उन राज्यों में जहां रोज के नए मामलों में कमी और स्थिरता आई थी, वहां भी वृद्धि देखी जा रही है

बेहाल राज्य
बेहाल राज्य

सोनाली आचार्जी

आवरण कथाः बेहाल राज्य

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मई में चेतावनी दी थी कि कोविड के मामलों के लिहाज से राज्य के लिए सबसे खराब स्थिति आनी अभी बाकी है. उन्होंने कहा था, ''लॉकडाउन ने केवल संक्रमण के शिखर को छूने का समय बढ़ाने में मदद की, लेकिन यह हमेशा से स्पष्ट था कि कोरोना के मामले बढ़ेंगे.’’ वास्तव में राज्य ने पिछले 30 दिनों में कोविड के मामलों में 694 प्रतिशत की वृद्धि देखी है और सक्रिय मामलों के लिहाज से यह शीर्ष 10 राज्यों में पहुंच गया है.

10 अगस्त को राज्य में 3,500 मामले थे, 9 सितंबर को इनकी संख्या बढ़कर 28,517 पहुंच गई थी. बढ़ती संख्या ही नहीं, जिस गति से मामले बढ़ रहे हैं उसने चिकित्सा बिरादरी को चिंता में डाल दिया है. कोविड के संक्रमण के लिहाज से शीर्ष 15 जिलों में शामिल रायपुर के एमएमआइ अस्पताल में ईएनटी सलाहकार डॉ. अजीत आनंद दिगवेकर कहते हैं, ''सबसे पहले सरकार को और अधिक जांच करानी चाहिए थी.

कम जांच का मतलब है कि वायरस के कहीं अधिक अलक्षणी (एसिम्प्टोमैटिक) वाहक हैं जो अब लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के कारण चारों ओर घूम रहे हैं. दूसरी बात, लोगों की लापरवाही भी बढ़ रही है.’’ 

वास्तव में यह मई, जून और जुलाई में अपर्याप्त परीक्षण का नतीजा है, जिसके बाद अनलॉक 4.0 शुरू हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उन राज्यों में मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है जो पहले कम चिंता का विषय थे. तेलंगाना ने जांच की संक्चया जुलाई में 2,600 से बढ़ाकर अगस्त में 35,000 कर दी. जिस समय जांच कम हो रही थी तमाम संक्रमित मामलों का पता ही न चल सका.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, ''यदि आपकी आबादी 100 है और आप केवल पांच जांच कराते हैं, तो आप पांच अन्य ऐसे लोगों की पहचान नहीं कर सकेंगे जो संक्रमित हो सकते हैं. अब ये पांचों सड़कों पर हैं और संक्रमण फैला रहे होंगे. कोविड जंगल की आग की तरह फैलता है: यहां तक कि अगर स्रोत केवल पांच हैं, तो भी यह बहुत जल्द 50 हो जाएगा.’’ 

कई राज्यों में रोज हो रही तेज वृद्धि चिंताजनक स्तर पर है. जून में आंध्र प्रदेश में रोज 490 नए मामले आते थे आज वह आंकड़ा 10,600 को छू गया; उत्तर प्रदेश में जुलाई में रोज 2,600 नए मामले सामने आ रहे थे, अब वहां यह संख्या 6,622 है; इसी तरह ओडिशा में मई में एक दिन में 67 नए मामले आते थे, अब रोज 3,500 नए मामले आ रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली, केरल, गोवा और चंडीगढ़ में कोविड की वापसी का कारण खराब मास्क और हाथ की सफाई के प्रति लापरवाही के साथ-साथ मरीजों के स्वस्थ होने की बढ़ती दर तथा मरने वालों की घटती संख्या के कारण आम जनता के बीच बीमारी को लेकर बढ़ती उदासीनता है.

खास तौर से रेस्त्रां, मंदिरों, मेट्रो और कार्यालयों में फिर से भीड़ होने लगी है. मास्क भी ठीक से नहीं पहने जा रहे. दिल्ली में राजीव गांधी स्पेशिएलिटी अस्पताल के निदेशक डॉ बी.एल. शेरवाल कहते हैं, ''मास्क से लोगों की नाक बाहर झांक रही होगी, या वह ठोड़ी पर लटका होगा.’’

जनता को जागरूक करने के बड़े अभियान उन प्रमुख तरीकों में से एक होंगे जिनसे देश एक बार फिर से लॉकडाउन के दिनों वाली सावधानी में वापस लौट सकता है. लॉकडाउन के दौरान, 15वें सप्ताह तक भारत में 56,000 मामले थे, जो अमेरिका, फ्रांस, इटली, जापान, यहां तक कि चीन के 15वें सप्ताह की तुलना में कम था. आज अपने 33वें सप्ताह में कुल कोविड मामले अमेरिका को छोड़, इन सभी देशों की तुलना में कहीं अधिक हैं.

जांच की मिसाल उत्तर प्रदेश में रामपुर जिले के इंद्रा गांव में एक प्राथमिक स्कूल को कोविड जांच केंद्र के रूप में बदलना पड़ा.

''हम इलाज के मोर्चे पर मजबूत स्थिति में हैं. हमें संक्रमण के मामलों में अप्रत्याशित तौर पर बहुत तेज वृद्धि को रोकना होगा ताकि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था ही चरमरा न जाए’’

डॉ. वी.के. पॉल, नीति आयोग के सदस्य, और चेयरमैन, एम्पावर्ड कमिटी ऑन मेडिकल इमरजेंसीज

Read more!