लॉकडाउन: खेतों में खड़ा गन्ना दे रहा दर्द
लॉकडाउन की स्थिति में किसानों को पर्याप्त गन्ना पर्ची न मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

लखनऊ के करीब 135 किलोमीटर दूर सीतापुर जिले का बिस्वां ब्लॉक गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है. इसी ब्लॉक के बन्नीराय गांव में रहने वाले साढ़े तीन सौ परिवार की आजीविका का साधन गन्ना ही है. इन्हीं लोगों में एक हरनाम सिंह वर्मा भी हैं जो एक बड़े किसान नेता हैं. इनके 12 बीघा खेत में खड़ी गन्ने की फसल सूख रही है और हरनाम सिंह कातर आंखों से इसे देखने को विवश हैं. हरनाम सिंह बताते हैं, ''मार्च के अंतिम हफ्ते में जब गन्ना मिल से पर्ची आती उससे पहले लॉकडाउन हो गया. ऐसी हालत में मिल को गन्ना भेजना असंभव हो गया. खेत में खड़ी गन्ना की फसल जवान बेटी की तरह होती है इसकी जितनी जल्दी विदाई हो जाए उतना ही अच्छा है.''
हरनाम सिंह को उम्मीद थी कि सरकार 15 अप्रैल से लॉकडाउन में कुछ ढील देगी लेकिन ऐसा न होने से इनकी रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई. हरनाम सिंह अब गन्ने की फसल काट कर खेत को अगली फसल के लिए तैयार करने की कोशिश में जुट गए हैं. लॉकडाउन की स्थिति में किसानों को पर्याप्त गन्ना पर्ची न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हरनाम सिंह बताते हैं, ''किसान अधिकारियों को फोन करके उन्हें लगातार अपनी शिकायतें बता रहे हैं लेकिन बात नहीं बन रही है.''
चीनी का कटोरा कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गन्ना किसान ऐसी ही समस्या का सामना कर रहे हैं. अप्रैल की 10 से 15 तारीख तक अमूमन सभी शुगर मिलें आवंटित गन्ने की पेराई कर सत्र की समाप्ति कर देती हैं. लेकिन इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते सब थम गया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख चीनी मिल के मैनेजर राजेश सिंह बताते हैं, ''चीनी के उत्पादन में प्रयोग होने वाले कच्चे पदार्थ सल्फर और चूने की कमी से चीनी मिलों को काफी नुक्सान उठाना पड़ा है. इससे चीनी मिलों के उत्पादन की रफ्तार काफी धीमी हो गई है.'' हालांकि सरकार के दखल के बाद चीनी मिलों को कच्चा पदार्थ मिलना शुरू हुआ तो किसानों को पर्याप्त संख्या में गन्ना पर्ची न पहुंचने पर गन्ना आपूर्ति पर संकट खड़ा हो गया. मेरठ के गन्ना किसान शंभू कुमार बताते हैं, ''पेराई सत्र के शुरू हुए छह महीने का समय बीत गया है बावजूद इसके अभी तक खेतों में पेराई योग्य 25 से 30 फीसद गन्ना बचा हुआ है. गर्मी और गेहूं की कटाई को देखते हुए किसान परेशान हैं कि गन्ना मिल में नहीं गया तो लॉकडाउन की मार झेल रहे किसानों को भारी नुक्सान उठाना पड़ेगा.''
लॉकडाउन में किसानों को हो रही दिक्कतों के चलते सरकार कुछ और समय के लिए चीनी मिलों को चलाने की तैयारी में है. मेरठ मंडल के उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र बताते हैं, ''जब तक खेतों में गन्ना रहेगा तब तक चीनी मिलें चलेंगी. जिन किसानों की पर्ची खत्म हो गई है और उनका गन्ना बाकी है. ऐसे किसानों का सर्वे कराकर उनकी मदद की जाएगी.''
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