ग्रासिम के मजबूत रिश्ते की कहानी
एबी नूवो के ग्रासिम में विलय से यह 11 अरब डॉलर की कंपनी बनी जो सीमेंट, वित्तीय सेवाएं, टेलीकॉम, टेक्सटाइल्स और रसायन के क्षेत्र में अग्रणी है

ग्रासिमः स्थापनाः 1947
पहला चरण
भारत की आजादी जितनी पुरानी ही निर्माण सामग्री और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज की यात्रा है. कंपनी टेक्सटाइल निर्माता के तौर पर 1947 में बनी. उसके बाद यह विस्कोस स्टेपल फाइबर, सीमेंट, स्पॉन्ज आयरन और रसायन आदि भी बनाने लगी.
हम कहां खड़े हैं
आदित्य बिरला समूह की अग्रणी कंपनी ग्रासिम दुनिया में विस्कोस रेयॉन फाइबर की सबसे बड़ी उत्पादक और निर्यातक है जिसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 24 फ फीसदी है. समूह के कारोबार का 15 फीसदी टेक्सटाइल और संबद्ध उत्पादों से आता है. अन्य अहम कारोबारों में सीमेंट और रसायन हैं. इसकी अनुषंगी कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट है जो भारत में सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक है. ग्रासिम खुद देश में कॉस्टिक सोडा का सबसे बड़ा उत्पादक है. हाल ही में आदित्य बिड़ला नूवो का ग्रासिम में विलय कर दिया गया था जिसने 9.2 अरब डॉलर के मैन्युफैक्चरिंग और सेवा कारोबार को जन्म दिया.
यात्रा
ग्वालियर की इकाई में 1950 में फैब्रिक का उत्पादन शुरू किया गया जिसके चार साल बाद मध्य प्रदेश के नागदा में वीएसएफ का उत्पादन शुरू हुआ. 1963 में हरियाणा के भिवानी में एक कम्पोजिट टेक्सटाइल मिल लगाई गई. ग्रासिम का पहला सीमेंट प्लांट मध्य प्रदेश के जावद में 1985 में लगाया गया जिसका ब्रांड था विक्रम सीमेंट. ग्रासिम के बड़े सौदों में एक है लार्सन ऐंड टूब्रो से 2004 में अल्ट्राटेक सीमेंट में निर्णायक हिस्सेदारी की खरीद.