सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बना दीजिए : CJP प्रवक्ता सौरव दास

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास से इंडिया टुडे (हिंदी) के डिप्टी एडिटर अंजुम शर्मा की बातचीत 

CJP Spokes person Saurav Das (Photo : Chandradeep Kumar))
सौरव दास (फोटो : चंद्रदीप कुमार)

जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से लाखों की संख्या में युवा जुड़ रहे हैं. 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के बाद लगातार सवाल उठ रहे हैं कि असल में इसका नेतृत्व किसके हाथ है, क्या यह आंदोलन केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़ा है, इतने समय से चल रहे आंदोलन की फंडिंग कहां से आ रही है, क्या कोई राजनीतिक पार्टी नेपथ्य में है? पढ़िए जंतर-मंतर पर गूंजते नारों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दाससे इंडिया टुडे (हिंदी) के डिप्टी एडिटर अंजुम शर्मा  की बातचीत :

आप कहते रहे हैं कि यह छात्र आंदोलन है लेकिन अब इसमें दूसरे सार्वजनिक मुद्दे शामिल होते जा रहे हैं. क्या छात्रों के मूल मुद्दे पीछे छूट गए हैं?

ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह युवाओं का आंदोलन है और युवाओं के कई तरह के आक्रोश हैं, जिनमें पेपर लीक भी एक बड़ा मुद्दा है. हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि यह आंदोलन परीक्षा में पेपर लीक के खिलाफ है. हमने सरकार के सामने एक विस्तृत पॉलिसी डिमांड चार्टर भी रखा है. हमारी दो प्रमुख मांगें हैं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें एक करोड़ रुपए का मुआवजा. 

इस आंदोलन में शिक्षा से जुड़े सुधारों की चर्चा कम और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ज्यादा दिखाई दी है. क्या यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे का मामला है?

शिक्षा से जुड़े सुधारों के लिए हमारा पांच बिंदुओं वाला विस्तृत पॉलिसी डिमांड चार्टर है. उसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और कई अन्य सुधारों का विस्तार से बात कही गई  है. यह आंदोलन उन्हीं मुद्दों पर आधारित है. शिक्षा व्यवस्था में बहुत-सी ऐसी चीजें हुई हैं जो नहीं होनी चाहिए थीं.

संसद मार्च के दौरान दोनों पक्षों के वीडियो सामने आए. झड़प हुई. क्या आप मानते हैं कि आपके पार्ट पर भी मिसमैनेज हुआ?

दोनों तरफ से हिंसा नहीं हुई. हिंसा हुई और वह पुलिस की तरफ से हुई. कुछ उग्र तत्वों को पुलिस और भाजपा समर्थकों ने भीड़ में घुसाया, जिन्होंने पथराव और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं कीं लेकिन वे CJP के समर्थक या प्रदर्शनकारी नहीं थे. लोकतंत्र और ऐसे आंदोलनों में किसी भी तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है.

उस दिन कौन लीड कर रहा था? आप और आशुतोष सरकार से मिलने गए थे. सोनम वांगचुक अस्पताल में थे. दिपके काफी देर बाद दिखे. क्या यह 'लीडरलेस मूवमेंट' है? दिशा कौन तय कर रहा है?

ऐसा नहीं है. आप वही देख रहे हैं जो आप देखना चाहते हैं. सब अपनी भूमिका निभा रहे थे. अभिजीत तो मार्च में ही थे. जहां तक बात लीडर की है तो कुछ लोग सार्वजनिक रूप से सामने हैं लेकिन यहां कोई औपचारिक नेता नहीं है. हम चाहते भी यही हैं कि यह एक लीडरलेस मूवमेंट रहे. यहां जो लोग आते हैं, वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर इस आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक करते हैं और वही नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं. हमें एक स्वाभाविक, जमीनी स्तर का आंदोलन चाहिए.

लेकिन CJP के मेंबर्स की पृष्ठभूमि को लेकर तो सवाल उठ ही रहे हैं कि नेतृत्व भले सामने न हो. क्या पीछे से आम आदमी पार्टी सपोर्ट कर रही है?

ये सब बेबुनियाद बातें हैं. हर व्यक्ति का एक अतीत होता है. महत्वपूर्ण यह है कि वर्तमान क्या है और भविष्य की दिशा क्या है. हमारा वर्तमान और हमारा उद्देश्य दोनों स्पष्ट हैं. इसलिए ऐसे आरोपों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. लोग हम पर कई तरह के लेबल लगाने की कोशिश करते हैं लेकिन अब तक कुछ भी नहीं टिक पाया क्योंकि हम साफ, नए और बेहतर विचारों के साथ आए हैं.

आपने कहा था ये स्टूडेंट प्रोटेस्ट है, लेकिन धीरे-धीरे ये राजनीतिक मंच कैसे हो गया?

हमने सभी को खुला निमंत्रण दिया था. जो भी हमारी मांगों से जुड़ना चाहे, स्वागत है.

लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यहां नहीं आए.

हमने उन्हें पत्र भी भेजा है लेकिन यह आंदोलन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि कौन आता है और कौन नहीं. यह आंदोलन जनता का है और जनता के मुद्दों का है. कोई बड़ा नेता आए या न आए, उससे फर्क नहीं पड़ता. महाराष्ट्र के लोगों के लिए उद्धव ठाकरे बड़ा चेहरा हो सकते हैं और वे यहां मंच पर आए भी थे. यहां के लोगों के लिए राहुल गांधी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है. हमारे लिए सबसे बड़ा चेहरा इस देश की जनता है.

इस बीच फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे. विदेशी फंडिंग की बातें भी उठीं. फंड कहां से आ रहा है?

लोग तरह-तरह की साजिश की कहानियां गढ़ते रहते हैं. अगर किसी को लगता है कि ऐसा कुछ है, तो सरकार के पास पूरा तंत्र है, वह जांच कर सकती है. इस तरह की बातें सिर्फ साजिश या कहानियां हैं और इन्हें उसी तरह लेना चाहिए.

आंदोलन कब तक चलेगा?

जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते.

यानी पूरा आंदोलन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर टिका है.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही की दिशा में पहला कदम होगा. इसके साथ-साथ हम अपनी बाकी मांगें भी सरकार के सामने रखेंगे.

अगर कैबिनेट फेरबदल में उन्हें किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी जाए तो.

यह तय करना हमारा काम नहीं है कि वे किसी दूसरे मंत्रालय के लिए उपयुक्त हैं या नहीं. लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय के आसपास भी नहीं होना चाहिए. बच्चों के लिए वे खतरा हैं.

आप किस तरह के व्यक्ति को शिक्षा मंत्री के रूप में देखना चाहते हैं?

हम तो चाहेंगे कि सोनम वांगचुक जी को शिक्षा मंत्री बना दीजिए. हालांकि मुझे पता है कि ऐसा नहीं होगा.

संसद मार्च के पूरे अनुभव से क्या सीखा?

हमारे लिए मार्च सफल रहा. लोग संसद तक पहुंचे लेकिन जिस तरह की पुलिस कार्रवाई हुई, नहीं होनी चाहिए थी.  इस देश के युवाओं को एफआईआर या बल प्रयोग के जरिए डराया नहीं जा सकता.

आगे राजनीति में आने की कोई योजना है?

नहीं, फिलहाल तो नहीं है.

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