गोल्डी बराड़ अब अमेरिका का मोस्ट वांटेड! पंजाब का गैंग तीन महाद्वीपों तक कैसे फैला?

FBI गोल्डी बराड़ को एक ऐसे अपराध सिंडिकेट का उत्तरी अमेरिकी कमांडर बताती है जिसका नेटवर्क भारतीय जेलों से लेकर कैलिफोर्निया, कनाडा और यूरोप तक फैला है

Goldy Brar in Most Wanted list of FBI
गोल्डी बराड़ (फाइल फोटो)

कई सालों से गोल्डी बराड़ की वही तस्वीर पंजाब में उसके साथ जुड़ी रही है- दाढ़ी वाला एक युवा, कैमरे की तरफ सीधे देखते हुए और नीचे उसका नाम लिखा हुआ.  यह तस्वीर पुलिस नोटिस और खुफिया दस्तावेजों में दिखाई देती रही है, टीवी स्क्रीन पर आती रही है और सोशल मीडिया पर लगातार घूमती रही है.

इसके साथ आमतौर पर एक जानी-पहचानी कहानी भी जुड़ी होती थी. पंजाब का एक और युवा विदेश चला गया और वहां से सुरक्षित दूरी पर बैठकर कथित तौर पर अपने घर यानी पंजाब में हिंसा के आदेश दे रहा था. यहां तक कहा जाता था कि वह उत्तर भारत के सबसे खतरनाक गैंग में से एक चला रहा है.

28 सितंबर को यह तस्वीर ऐसी जगह दिखाई दी जहां इससे पहले कभी नहीं आई थी. उस दिन अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपने 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया और उसकी गिरफ्तारी तक पहुंचाने वाली सूचना के लिए 10 लाख डॉलर तक के इनाम का ऐलान किया.

बराड़ इस सूची में शामिल होने वाला 543वां नाम है. FBI की तरफ से यह सूची 1950 से जारी की जा रही है. अमेरिका में बराड़ पर संगठित अपराध की साजिश, जबरन वसूली और ड्रग्स की तस्करी की साजिश के आरोप हैं.

FBI की तलाश

FBI की सूची दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधियों की रैंकिंग नहीं है. यह लोगों का ध्यान खींचने का एक जरिया है. इसका आधार एक सीधा विचार है- किसी व्यक्ति का चेहरा जितने ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा, उतनी संभावना होगी कि कहीं न कहीं कोई उसे पहचान ले. 

FBI ने गोल्डी पर 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है (सांकेतिक तस्वीर)

कई बार यह तरीका काम भी करता है. पिछले साल ब्यूरो ने ड्रग्स के एक बड़े साम्राज्य को चलाने के आरोपी कनाडाई नागरिक रयान वेडिंग को सूची में शामिल किया था. उसे इस साल जनवरी में गिरफ्तार कर लिया गया.

बराड़ अब इस सूची में शामिल एक और भारतीय के साथ है. गुजरात के वीरमगाम के भद्रेशकुमार चेतनभाई पटेल को 2017 से इस सूची में रखा गया है. उस पर 2015 में मैरीलैंड की एक डोनट शॉप की रसोई में अपनी पत्नी पलक की चाकू मारकर हत्या करने का आरोप है. 

दोनों मामलों में बहुत कम समानता है. पटेल पर एक निजी और व्यक्तिगत हिंसक घटना का आरोप है और उसकी गिरफ्तारी पर 2.5 लाख डॉलर का इनाम है. वहीं अभियोजकों का आरोप है कि बराड़ का मामला एक पूरे आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा है.

बराड़ का जन्म पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में हुआ था. उसके पिता पंजाब पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे. 2017 में वह छात्र वीजा पर कनाडा चला गया. हर साल विदेश जाने वाले पंजाब के हजारों युवाओं की तरह उसने भी यह रास्ता चुना था. 

पांच साल बाद मई 2022 में पंजाब के मानसा जिले में गायक सिद्धू मूसेवाला की कार में गोली मारकर हत्या किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर बराड़ ने सार्वजनिक तौर पर इस हत्या की जिम्मेदारी ली. इस मामले में वह अब भी मुख्य आरोपियों में शामिल है.

अब बदलाव यह है कि वॉशिंगटन बराड़ को किस तरह देख रहा है. अमेरिकी अभियोजक अब बराड़ को सिर्फ कनाडा में छिपे एक भारतीय गैंगस्टर के तौर पर नहीं देखते. उनका आरोप है कि वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग की उत्तरी अमेरिकी शाखा का नेतृत्व करता है. 

इस नेटवर्क पर कई देशों में ड्रग्स की तस्करी, जबरन वसूली, अपहरण और चुनिंदा हत्याओं में शामिल होने के आरोप हैं. FBI का मानना है कि बराड़ अब अमेरिका में रह रहा है.

गोल्डी ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी (फाइल फोटो)

अमेरिका का यह मामला अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन के मुख्यालय के लिए एक अप्रत्याशित जगह से शुरू होता है- एक भारतीय जेल. बिश्नोई एक दशक से ज्यादा समय से हिरासत में है और फिलहाल गुजरात की एक जेल में बंद है. 

अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि जेल जाने से उसकी गतिविधियां लगभग रुकी नहीं. केस के मुताबिक, जेल में पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट डिवाइसों के जरिए बिश्नोई बाहर मौजूद अपने सहयोगियों को निर्देश देता रहा.

कहा जाता है कि दो लोग इन निर्देशों को विदेश तक पहुंचाते थे- उत्तरी अमेरिका में बराड़ और यूरोप में रोहित गोदारा. अभियोजक उन्हें बिश्नोई का भरोसेमंद सहयोगी बताते हैं. दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में गिरोह के सदस्यों और सहयोगियों को निर्देश देने के लिए जिम्मेदार थे.

अगर यह आरोप साबित होता है तो इससे एक ऐसे गिरोह की तस्वीर सामने आती है, जिसकी कमान काफी स्पष्ट है- नेता भारत में जेल के पीछे और उसके कामकाज को हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोग चला रहे हैं. FBI के मुताबिक, बराड़ के संबंध कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो और फ्रेस्नो के अलावा कनाडा, भारत और मेक्सिको से भी हैं. यहीं से यह कहानी पंजाब से आगे निकल जाती है.

इन आरोपों में ड्रग्स से जुड़े कुछ आरोप सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं. अभियोजकों का कहना है कि नवंबर 2024 में बिश्नोई और बराड़ ने 49 किलोग्राम कोकीन की एक खेप की निगरानी की थी, जिसे कनाडा भेजा जाना था और जिसे कैलिफोर्निया में पकड़ लिया गया. 

उनका यह भी आरोप है कि गिरोह लॉस एंजिल्स इलाके में दूसरे तस्करों से ड्रग्स लूटता था. इस धंधे की भाषा में इसे ‘रिपिंग’ कहा जाता है. इस तरह मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच गिरोह ने करीब 520 किलोग्राम कोकीन और करीब 500 किलोग्राम मेथामफेटामाइन अपने कब्जे में लिया.

इनमें से किसी भी आरोप की अभी अदालत में जांच नहीं हुई है. हालांकि अगर ये आरोप साबित होते हैं तो तस्वीर सिर्फ विदेश से चलाए जा रहे जबरन वसूली के गिरोह की नहीं होगी. 

यह ऐसे गिरोह की तस्वीर होगी जो उत्तरी अमेरिका के ड्रग कारोबार में हिस्सा हासिल करने की कोशिश कर रहा था और उसे बनाए रखने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करने को तैयार था.

कनाडा के नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे लॉरेंस बिश्नोई (दाएं) का हाथ माना जाता है

पिछले करीब एक दशक में बिश्नोई गैंग और उसके प्रतिद्वंद्वी गिरोहों को लगभग पूरी तरह पंजाब के संदर्भ में देखा जाता रहा है. मूसेवाला की हत्या के बाद गैंगवार राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. 

इसके बाद जबरन वसूली के फोन कॉल, गोलीबारी, धमकियों और सुपारी देकर हत्याओं की जांच आगे बढ़ी तो उनका रास्ता विदेश, खासकर कनाडा तक पहुंचता रहा. विदेशों में बसे भारतीयों का समुदाय और वहां रहने वाले कुछ लोगों के बीच पैदा हुआ डर भी इस कहानी का हिस्सा बन गया. अब अमेरिका भी इसका हिस्सा है.

ऑपरेशन हार्ड बॉल

7 जुलाई को अमेरिकी न्याय विभाग ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत तीन अभियोग सार्वजनिक किए. यह भारत से जुड़े संगठित अपराध के तीन समूहों की कई साल से चल रही जांच थी. कुल 37 लोगों पर आरोप लगाए गए. इनमें से 24 हिरासत में हैं. 

इनमें अमेरिका, कनाडा और स्पेन में एक साथ चलाए गए ऑपरेशन में गिरफ्तार किए गए 17 लोग शामिल हैं. इनमें 11 कैलिफोर्निया से गिरफ्तार किए गए. सात ऐसे लोग भी हैं जो पहले से हिरासत में थे. जांचकर्ताओं ने करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन और एक दर्जन हथियार जब्त किए. इसके बाद चार और भगोड़ों को पकड़ा गया और एक की मौत हो गई.

बिश्नोई गैंग के खिलाफ एक अभियोग है. दूसरा अभियोग जग्गू भगवानपुरिया से जुड़ा है. वह कभी बिश्नोई का सहयोगी था और अब उसका प्रतिद्वंद्वी है. उस पर भी भारतीय जेल से अपना नेटवर्क चलाने का आरोप है. अभियोजकों के मुताबिक, दुनिया भर में उसके नेटवर्क में करीब 1,000 सदस्य और सहयोगी हैं. इनमें करीब 100 अमेरिका में हैं.

तीसरा अभियोग रविंदर सिंह ढांडा के कथित नेतृत्व वाले नेटवर्क के खिलाफ है. वैंकूवर में रहने वाले ढांडा पर दक्षिणी कैलिफोर्निया से कनाडा की ओर बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन भेजने का आरोप है.

इस तरह अमेरिकी जांचकर्ता एक पंजाबी गैंग के खिलाफ अकेला मामला तैयार नहीं कर रहे हैं. वे भारत में जड़ें रखने वाले और उत्तरी अमेरिका में काम करने वाले कई आपराधिक नेटवर्क का नक्शा तैयार कर रहे हैं. 

इसी वजह से उन्होंने इस कानून का इस्तेमाल किया है- रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस एक्ट यानी RICO अभियोजकों को किसी एक अपराध के बजाय पूरे आपराधिक गिरोह के खिलाफ मामला बनाने की अनुमति देता है. 

इस कानून के तहत ड्रग्स के सौदे, जबरन वसूली की मांग, धमकियां और गोलीबारी को एक ही गिरोह की गतिविधियों के तौर पर पेश किया जा सकता है. इसके साथ ही गिरोह को निर्देश देने वालों को उसके सदस्यों के किए कामों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

यह जांच भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के तरीके में बदलाव का संकेत भी हो सकती है. रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तारियों से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने बिश्नोई, बराड़, गोदारा, भगवानपुरिया और अन्य लोगों को लेकर भारत की केंद्रीय एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की और उसका सत्यापन किया था. 

लॉस एंजिल्स स्थित अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने कहा है कि वह बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करेगा. हालांकि उसने यह भी कहा है कि ऐसी प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं.

लंबे समय तक भारतीय एजेंसियों को ही विदेशों में बसे गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विदेशी सरकारों को तैयार करना पड़ता था. अब अमेरिकियों के पास अपने कारण भी हैं. कथित अपराध उनके अपने शहरों की सड़कों तक पहुंच चुके हैं.

हरदीप निज्जर की हत्या

मामले की एक कड़ी भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों से सीधे जुड़ती है. अमेरिकी अभियोग में आरोप लगाया गया है कि बिश्नोई और बराड़ ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था. 

कनाडाई नागरिक और प्रमुख सिख अलगाववादी निज्जर की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में नकाबपोश हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

उसकी मौत के बाद दोनों देशों के बीच कई दशकों के सबसे गंभीर राजनयिक विवादों में से एक शुरू हो गया. उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा था कि हत्या में भारत सरकार के एजेंटों के शामिल होने के विश्वसनीय आरोप हैं. भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया था और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था.

अमेरिकी अभियोग में अलग कहानी सामने रखी गई है. इसमें हत्या के लिए बिश्नोई गैंग को जिम्मेदार बताया गया है और भारत सरकार के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है. 

अभियोग सार्वजनिक होने के एक दिन बाद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि भारत सरकार के अधिकारी इसमें शामिल थे. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने उनकी टिप्पणी पर ध्यान दिया है.

ट्रूडो के आरोप के तीन साल बाद कनाडा की अपनी पुलिस ने प्रभावी तौर पर उससे दूरी बना ली है. हालांकि इससे दोष का सवाल खत्म नहीं होता. बिश्नोई और बराड़ पर लगाए गए आरोप अभी सिर्फ आरोप हैं और उन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है. निज्जर के परिवार के लिए जवाबों का इंतजार जारी है.

बराड़ की बढ़ती बदनामी

वॉशिंगटन ने बराड़ की तलाश तेज की है. 8 जुलाई को अभियोग सार्वजनिक किए जाने के अगले दिन FBI ने उसकी गिरफ्तारी तक पहुंचाने वाली सूचना के लिए 50,000 डॉलर के इनाम का ऐलान किया था. 

सितंबर के आखिर तक यह इनाम 20 गुना बढ़ चुका था. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने कहा है कि उसे सूची में शामिल किया जाना उसे तलाशने के साझा संकल्प को दिखाता है.

भारत में 2024 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत बराड़ को आतंकवादी घोषित किया गया था. उस पर हत्या, जबरन वसूली और हथियारों व विस्फोटकों की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया गया. 

भारत में कई मामलों में वह अब भी वांटेड है. सितंबर 2025 में कनाडा ने बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया था.

इस पूरे घटनाक्रम में एक विडंबना है. वर्षों तक दूरी ही बराड़ की सबसे बड़ी सुरक्षा लगती थी. विदेश में रहकर वह कथित तौर पर अपने सहयोगियों को निर्देश दे सकता था, धमकियां दे सकता था और ऐसी छवि बना सकता था जिसका असर पंजाब तक पहुंचता था. 

लेकिन जिन नेटवर्क ने उसे भारतीय पुलिस की पहुंच से दूर रखा, उन्हीं ने अब तीन महाद्वीपों की कानूनी एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत गोल्डी बराड़ को वापस ला पाएगा या नहीं. सवाल यह भी है कि उसके आसपास के नेटवर्क का क्या होगा और उन युवाओं का क्या होगा जिनमें कुछ अभी किशोर हैं और जिन्हें ऐसे नेटवर्क अपने साथ जोड़ लेते हैं.

अगर अमेरिकी मामला अदालत में साबित होता है तो बराड़ को सिर्फ ऐसे गैंगस्टर के तौर पर याद नहीं किया जाएगा जो पुलिस की पहुंच से बाहर निकल गया था. 

वह पंजाब की गैंग समस्या के एक नए दौर का प्रतीक भी होगा, जिसमें कोई आपराधिक गिरोह एक देश में लोगों को भर्ती कर सकता है, दूसरे देश में पैसा जुटा सकता है, तीसरे देश के रास्ते ड्रग्स भेज सकता है और दुनिया के दूसरे हिस्से से फोन पर हिंसा के आदेश दे सकता है.

FBI ने बराड़ को पकड़ने के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम रखा है. असल में वह उसके पीछे काम कर रहे पूरे तंत्र को सामने लाने की कोशिश कर रही है. अगर अभियोजक आरोप साबित कर पाते हैं तो पता चलेगा कि यह नेटवर्क पंजाब से कहीं ज्यादा दूर तक फैला है.

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