डोकलाम और गलवान वाले जनरल पर कार्रवाई, चीन की सेना में क्या चल रहा?

भारतीय सेना के साथ डोकलाम और गलवान में टकराव के दौरान चीन के वेस्टर्न थिएटर कमांड की कमान संभालने वाले जनरल झाओ जोंगछी को अब अहम पदों से हटा दिया गया है

General Zhao Zongqi, PLA's commanding officer, Western Theater Command at Hawaii. (Image: US Army)
PLA के जनरल झाओ जोंगछी (फाइल फोटो)

चीन में सेना के भीतर चल रही कार्रवाई अब उस कमांड संरचना तक पहुंच गई है, जिसने भारत के साथ हुए उसके सबसे महत्वपूर्ण टकरावों में अहम भूमिका निभाई थी. 28 अगस्त को जनरल झाओ जोंगछी को चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) और दो अन्य वरिष्ठ पदों से हटा दिया गया. 

चीन-भारत सैन्य इतिहास के लिहाज से देखें तो झाओ काफी अहम चीनी कमांडर रहे हैं.

झाओ को CPPCC से हटाया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ उनके सैन्य करियर के अंत से आगे की बात है. झाओ सिर्फ एक सैन्य जनरल नहीं हैं. वे चीन के नए बनाए गए वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर थे. यह सैन्य कमांड चीन की पश्चिमी सीमाओं की जिम्मेदारी संभालता है जिसमें भारत से लगी सीमा भी शामिल है.

उनकी कमान में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान भारत का सामना किया था. वे उस सैन्य नेतृत्व का भी हिस्सा थे जिसके कार्यकाल के दौरान 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में जानलेवा झड़प हुई.

हालांकि वेस्टर्न थिएटर चीन में चल रहे इससे कहीं बड़े सैन्य फेरबदल का सिर्फ एक हिस्सा है. 2022 से अलग-अलग सैन्य शाखाओं के 100 से ज्यादा वरिष्ठ PLA अधिकारियों को कथित तौर पर हटाया गया है, उनके खिलाफ जांच हुई है या वे गायब हो गए हैं. 

यह कार्रवाई अब सेना के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुकी है. ऐसे में झाओ को हटाए जाने से बीजिंग के सामने एक असहज सवाल खड़ा होता है: चीन के सैन्य तंत्र में चल रही मौजूदा कार्रवाई आखिर कितने पुराने अधिकारियों तक पहुंच रही है?

2022 से PLA के करीब 100 वरिष्ठ अधिकारियों पर कथिततौर पर कार्रवाई हुई है (सांकेतिक फोटो)

चीन पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, झाओ ने भारत के प्रति चीन की सैन्य रणनीति को आकार दिया. उनका करियर PLA के उस दौर के अधिकारियों की पूरी कहानी बताता है, जिनका अनुभव युद्ध, विदेशों में तैनाती और चीन की पश्चिमी सीमा पर वर्षों की सेवा से बना था.

1955 में हेइलोंगजियांग प्रांत में जन्मे झाओ सिर्फ 16 साल की उम्र में PLA में शामिल हो गए थे. उन्होंने 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध में हिस्सा लिया और लाओ काई, कैम डुओंग और सा पा के आसपास लड़ाई देखी. इसके बाद उनका करियर सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा. 

उन्होंने अरबी भाषा की ट्रेनिंग ली, तंजानिया में राजनयिक पद पर काम किया और तिब्बत मिलिट्री रीजन तथा PLA की 13वीं और 14वीं ग्रुप आर्मियों में कई कमांड पद संभाले.

2016 में उनका करियर एक अहम पड़ाव पर पहुंचा जब उन्हें वेस्टर्न थिएटर कमांड का पहला कमांडर बनाया गया. यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थी. इस नई कमांड के तहत चीन की पश्चिमी सीमाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली सेनाओं को एक ही सैन्य ढांचे में रखा गया. इससे झाओ चीन के उन प्रमुख कमांडरों में शामिल हो गए जिन पर भारत की करीबी नजर थी.

डोकलाम गतिरोध ने इस कमांड को सुर्खियों में ला दिया. भारत और चीन के सैनिक दो महीने से ज्यादा समय तक आमने-सामने रहे. यह तब हुआ जब भारतीय सैनिकों ने भारत-भूटान-चीन ट्राई-जंक्शन के पास विवादित डोकलाम इलाके में चीन की सड़क निर्माण गतिविधि को रोकने के लिए कदम उठाया. 

इसके बाद 2020 आया और पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में जून 2020 की झड़प हुई जिसमें दोनों पक्षों के सैनिकों को जान गंवानी पड़ी.

झाओ को सक्रिय कमांड छोड़ने के कई साल बाद अब हटाया गया है. यही बात इस घटनाक्रम को खास तौर पर महत्वपूर्ण बनाती है. सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि चीन की मौजूदा जांच सिर्फ उन अधिकारियों तक सीमित नहीं हो सकती जो कार्रवाई के दौरान अहम भूमिका में थे. 

गलवान में हुई झड़प में भारत और चीन, दोनों के सैनिकों को जान गंवानी पड़ी थी (सांकेतिक फोटो)

यह PLA के संस्थागत इतिहास में पीछे तक जा सकती है. इसमें वेस्टर्न थिएटर का नेतृत्व भी शामिल है, जो अब जांच के घेरे में है.

विशेषज्ञों के मुताबिक झाओ को हटाया जाना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा भी है. उनके बाद कमांडर बने जनरल वांग हाईजियांग, जिन्होंने 2021 में वेस्टर्न थिएटर की कमान संभाली थी, 2025 से गायब हैं और माना जाता है कि उनके खिलाफ जांच चल रही है. हालांकि चीन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

वांग इसलिए भी खास थे क्योंकि वे चीन-वियतनाम युद्ध में लड़ाई लड़ने वाले आखिरी सक्रिय PLA जनरल के रूप में जाने जाते थे. उनके गायब होने और उसके बाद झाओ को हटाए जाने से यह पता चलता है कि युद्ध का अनुभव रखने वाले अधिकारियों की एक पूरी पीढ़ी चीन के वरिष्ठ सैन्य पदों से हटाई जा रही है. 

वेस्टर्न थिएटर के नेतृत्व में इससे नीचे के स्तर पर भी अधिकारियों के गायब होने की खबरें हैं. वांग के राजनीतिक कमिसार ली फेंगबियाओ के साथ-साथ शिनजियांग और तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के अधीनस्थ कमांडर लियू लिन और वांग काई तथा राजनीतिक कमिसार यांग चेंग को भी 2025 से गायब होने वाले अधिकारियों की व्यापक लहर से जोड़ा गया है.

एक प्रमुख चीन विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर इन घटनाक्रमों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है. भारत के प्रति चीन की सैन्य रणनीति के लिए जिम्मेदार कमांड संरचना के पुराने और मौजूदा दोनों नेतृत्व में असाधारण उथल-पुथल हुई है.

सेना के शीर्ष स्तर तक पहुंची इस कार्रवाई को देखें तो घटनाक्रम सिर्फ वेस्टर्न थिएटर तक सीमित नहीं हैं. 2022 से अलग-अलग सैन्य शाखाओं के 100 से ज्यादा वरिष्ठ PLA अधिकारियों को कथित तौर पर हटा दिया गया है या वे गायब हो गए हैं. 

सबसे बड़े घटनाक्रमों में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष झांग यूशिया और CMC के सदस्य तथा ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख लियू झेनली को हटाया जाना शामिल है. दोनों के खिलाफ अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के संदेह में जांच हुई थी.

इसके परिणाम बहुत बड़े हैं. CMC चीन की सशस्त्र सेनाओं की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था है. इसके दो वरिष्ठ सदस्यों को हटाया जाना दिखाता है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई PLA के शीर्ष स्तर तक कितनी गहराई से पहुंच चुकी है.

भारत के लिए झाओ को हटाए जाने का एक अतिरिक्त महत्व है. चीन पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने कहा, "अगर डोकलाम और गलवान के दौर से जुड़े किसी कमांडर को अब संदिग्ध माना जा रहा है तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि उन टकरावों से जुड़े चीन के संस्थागत रिकॉर्ड की विश्वसनीयता कितनी है." उन्होंने कहा कि इससे नेतृत्व में निरंतरता को लेकर भी चिंता पैदा होती है.

वेस्टर्न थिएटर कमांड के लगातार कई वरिष्ठ कमांडर गायब हो चुके हैं या जांच के घेरे में आए हैं. अगर अलग-अलग दौर के कमांडरों को हटाया जाता है, तो PLA के पश्चिमी कमांड से सिर्फ अधिकारी ही नहीं हटेंगे, बल्कि वहां जमा पुराना अनुभव और जानकारी भी प्रभावित होगी.

हालांकि सेना में चल रही यह कार्रवाई अपने आप में इतिहास को दोबारा नहीं लिखती. यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी होगी. किसी राजनीतिक सलाहकार संस्था या वरिष्ठ पद से हटाया जाना अपने आप में किसी अधिकारी के अपराधी होने का सबूत नहीं है. 

चीन की अपारदर्शी सैन्य व्यवस्था के कारण किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए सटीक आरोपों का पता लगाना मुश्किल है जब तक कि वहां की सरकार उनकी आधिकारिक घोषणा न करे. 

पिछले मामलों से यह भी पता चला है कि किसी अधिकारी का गायब होना हमेशा स्थाई रूप से बदनामी का संकेत नहीं होता. जैसे कि सेंट्रल थिएटर के पूर्व कमांडर वांग चियांग जांच के घेरे में होने की अटकलों के बीच गायब हो गए थे. बाद में वे फिर सामने आए और उन्हें दूसरे पद पर भेज दिया गया.

लेकिन झाओ को हटाया जाना फिर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका पद और भारत के साथ चीन के सीमा विवादों में उनकी भूमिका इस मामले को खास बनाती है. 

उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण समय में PLA के वेस्टर्न थिएटर की कमान संभाली थी जब भारत के साथ चीन के सैन्य संबंधों में सीमा का मुद्दा बेहद संवेदनशील था. उनका पूरा करियर उसी सीमा के इर्द-गिर्द बना था जो एशिया की भू-राजनीति में सबसे संवेदनशील टकराव वाले क्षेत्रों में शामिल हो चुकी है.

इसलिए चीन का संदेश सिर्फ एक जनरल के भविष्य से जुड़ा नहीं है. यह संकेत देता है कि चीन की सेना के भीतर चल रही जवाबदेही की प्रक्रिया अभी भी आगे बढ़ रही है. यहां तक कि वे कमांडर भी इसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं जो कभी PLA के सबसे महत्वपूर्ण सीमा टकरावों के केंद्र में रहे थे.

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